तरणतारन मंडी में मक्के की खरीद ठप, तीन दिन से किसान परेशान, MSP से कम दाम मिलने का आरोप

खरीदारों और आढ़तियों के बीच कमीशन विवाद बना वजह, मंडी में बिना बिके पड़ा मक्का, किसानों की बढ़ी चिंता

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तरणतारन की अनाज मंडी में पिछले तीन दिनों से मक्के की खरीद पूरी तरह प्रभावित है। खरीदारों और आढ़तियों के बीच कमीशन को लेकर चल रहे विवाद के कारण किसान अपनी फसल बेचने में असमर्थ हैं। वहीं, किसानों ने MSP से कम कीमत मिलने का भी आरोप लगाया है।

तरणतारन मंडी में मक्के की खरीद पर ब्रेक

पंजाब के तरणतारन अनाज मंडी में मक्का उत्पादक किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खरीदारों और आढ़तियों (आढ़तियों) के बीच कमीशन शुल्क को लेकर चल रहे विवाद के कारण पिछले तीन दिनों से मक्के की खरीद लगभग ठप पड़ी है।

इस स्थिति के चलते मंडी में बड़ी मात्रा में मक्का बिना बिके पड़ा हुआ है और किसान अपनी उपज के उचित मूल्य को लेकर चिंतित हैं।

मंडी में लगातार पहुंच रही फसल, लेकिन नहीं हो रही खरीद

मंडी सुपरवाइजर अमरिंदर सिंह के अनुसार, पिछले चार दिनों से मंडी में लगातार मक्के की आवक हो रही है, लेकिन विवाद के चलते खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो गई है।

उन्होंने कहा कि किसानों की फसल मंडी में पहुंच रही है, लेकिन खरीदारों और आढ़तियों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण पिछले तीन दिनों से खरीद नहीं हो पाई है। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही विवाद का समाधान निकल जाएगा।

किसान बोले- खर्च बढ़ा, फसल नहीं बिक रही

किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल की कटाई और सुखाने पर काफी खर्च किया है। इसके बाद वे अच्छी कीमत की उम्मीद लेकर मंडी पहुंचे थे, लेकिन खरीद रुकने से आर्थिक संकट बढ़ गया है।

किसानों की प्रमुख समस्याएं

  • फसल मंडी में पड़ी होने से नुकसान का खतरा
  • कटाई और सुखाने पर बढ़ा खर्च
  • खरीद प्रक्रिया ठप होने से नकदी संकट
  • उचित मूल्य नहीं मिलने की चिंता
  • मंडी में लंबे समय तक इंतजार की मजबूरी

किसानों का कहना है कि समय पर खरीद नहीं होने से उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

MSP और बाजार भाव के बीच बड़ा अंतर

इस पूरे विवाद ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और वास्तविक बाजार कीमतों के बीच के अंतर को भी उजागर कर दिया है।

MSP कितना है?

केंद्र सरकार ने मक्के का MSP ₹2,410 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जिसे पंजाब सरकार ने भी लागू किया हुआ है।

हालांकि किसानों का आरोप है कि अब तक किसी भी किसान को MSP के अनुसार भुगतान नहीं मिला है। उनका कहना है कि बाजार में खरीद MSP से काफी कम दरों पर हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की

किसानों ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप कर खरीद प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को समय पर खरीद और उचित मूल्य सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

कृषि विविधीकरण पर भी पड़ सकता है असर

पंजाब में सरकार लगातार किसानों को धान-गेहूं चक्र से बाहर निकलकर मक्का जैसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। लेकिन यदि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य और समय पर खरीद नहीं मिलेगी तो फसल विविधीकरण की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

किसानों का कहना है कि सरकार को केवल फसल बदलने की सलाह देने के बजाय विपणन और खरीद व्यवस्था को भी मजबूत बनाना होगा।


Key Highlights:

  • तरणतारन मंडी में तीन दिनों से मक्के की खरीद बंद
  • खरीदारों और आढ़तियों के बीच कमीशन विवाद बना कारण
  • मंडी में बड़ी मात्रा में मक्का बिना बिके पड़ा
  • किसानों को आर्थिक नुकसान और नकदी संकट की चिंता
  • मक्के का MSP ₹2,410 प्रति क्विंटल निर्धारित
  • किसानों ने MSP से कम कीमत मिलने का आरोप लगाया
  • सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

FAQ Section:

Q1. तरणतारन मंडी में मक्के की खरीद क्यों रुकी हुई है?

उत्तर: खरीदारों और आढ़तियों के बीच कमीशन शुल्क को लेकर विवाद के कारण खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

Q2. खरीद कितने दिनों से बंद है?

उत्तर: पिछले तीन दिनों से मक्के की खरीद नहीं हो रही है।

Q3. मक्के का MSP कितना निर्धारित किया गया है?

उत्तर: केंद्र सरकार ने मक्के का MSP ₹2,410 प्रति क्विंटल तय किया है।

Q4. किसानों की मुख्य शिकायत क्या है?

उत्तर: किसानों का कहना है कि उन्हें MSP के अनुसार कीमत नहीं मिल रही और खरीद प्रक्रिया रुकने से आर्थिक नुकसान हो रहा है।


Conclusion:

तरणतारन मंडी में मक्के की खरीद को लेकर पैदा हुआ गतिरोध किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। एक ओर फसल मंडी में पड़ी है, वहीं दूसरी ओर MSP और बाजार भाव के बीच अंतर किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। ऐसे में खरीदारों और आढ़तियों के बीच विवाद का शीघ्र समाधान तथा खरीद प्रक्रिया की बहाली किसानों के हित में बेहद आवश्यक है।

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Edited By: Karan Singh

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