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JIT पर बढ़ा दबाव: 440 मामलों में आदेश के बावजूद आवंटियों को नहीं मिला ₹85 करोड़ का रिफंड
जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की आवासीय योजनाओं के सैकड़ों आवंटी वर्षों से भुगतान का इंतजार कर रहे, उपभोक्ता आयोगों के आदेश भी नहीं हुए पूरी तरह लागू
जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (JIT) की तीन प्रमुख आवासीय योजनाओं के आवंटियों ने करीब ₹85 करोड़ के लंबित रिफंड को लेकर नाराजगी जताई है। उपभोक्ता आयोगों के पक्ष में आए आदेशों के बावजूद सैकड़ों लाभार्थियों को अब तक उनका पैसा नहीं मिल पाया है।
रिफंड में देरी को लेकर आवंटियों की बढ़ी चिंता
जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (JIT) की तीन प्रमुख आवासीय योजनाओं— बीबी भानी कॉम्प्लेक्स, सूर्या एन्क्लेव एक्सटेंशन और इंद्रापुरम मास्टर गुरबंता सिंह एन्क्लेव — के आवंटियों ने रिफंड भुगतान में हो रही लंबी देरी पर गंभीर चिंता जताई है।
आवंटियों का कहना है कि विभिन्न उपभोक्ता आयोगों द्वारा उनके पक्ष में फैसले दिए जाने के बावजूद लगभग ₹85 करोड़ की राशि अब तक जारी नहीं की गई है।
440 मामलों में निर्णय, फिर भी सैकड़ों लोग भुगतान से वंचित
आवंटियों के अनुसार वर्ष 2015 से अब तक विभिन्न उपभोक्ता मंचों में लगभग 440 मामलों का निपटारा हो चुका है।भुगतान की स्थिति
- कुल निर्णयित मामले: लगभग 440
- भुगतान प्राप्त करने वाले आवंटी: करीब 150
- अब भी भुगतान का इंतजार: लगभग 290
- लंबित रिफंड राशि: करीब ₹85 करोड़
आवंटियों का आरोप है कि अदालतों और आयोगों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद भुगतान प्रक्रिया बेहद धीमी बनी हुई है।
ब्याज का बोझ भी बढ़ा रहा नुकसान
आवंटियों ने यह भी दावा किया कि लंबित भुगतान पर जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट को हर वर्ष लगभग ₹9 करोड़ ब्याज के रूप में अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर भुगतान किया जाता तो सार्वजनिक धन पर इतना अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता।
2006 में शुरू हुई योजना से जुड़ा है विवाद
यह विवाद वर्ष 2006 में शुरू की गई इंद्रापुरम मास्टर गुरबंता सिंह एन्क्लेव योजना से जुड़ा बताया जा रहा है।
योजना से जुड़े प्रमुख तथ्य
- लगभग 880 आवंटियों ने फ्लैटों में निवेश किया था।
- वर्ष 2009 में ट्रस्ट ने कब्जा लेने के लिए नोटिस जारी किए।
- कब्जा लेने की अवधि 15 सितंबर से 15 अक्टूबर 2009 तय की गई थी।
- कब्जा नहीं लेने वालों पर ₹1,000 मासिक ‘वॉच एंड वार्ड’ शुल्क लगाने की चेतावनी दी गई थी।
मूलभूत सुविधाओं के अभाव का आरोप
दर्शन सिंह आहूजा ने आरोप लगाया कि जब फ्लैटों का कब्जा देने की पेशकश की गई थी, तब वहां रहने योग्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
आवंटियों की शिकायतें
- पेयजल आपूर्ति का अभाव
- बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं
- सीवरेज व्यवस्था अधूरी
- स्ट्रीट लाइट्स की कमी
- आधारभूत नागरिक सुविधाओं का अभाव
आहूजा का दावा है कि बिजली कनेक्शन फरवरी 2013 में उपलब्ध कराए गए, जबकि कब्जा लेने के नोटिस वर्ष 2009 में जारी कर दिए गए थे।
उपभोक्ता मंचों का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हुए लोग
मूलभूत सुविधाओं और अतिरिक्त शुल्कों को लेकर असंतोष बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में आवंटियों ने उपभोक्ता आयोगों का रुख किया।
जालंधर, होशियारपुर, राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग तथा राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, नई दिल्ली में कई मामलों की सुनवाई हुई और अनेक फैसले आवंटियों के पक्ष में आए।
समाधान की मांग तेज
आवंटियों का कहना है कि न्यायिक आदेशों के बाद भी भुगतान लंबित रहना चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप कर लंबित रिफंड जल्द जारी करने की मांग की है।
उनका कहना है कि वर्षों से लंबित यह मामला हजारों परिवारों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित कर रहा है।
Key Highlights:
- JIT की तीन आवासीय योजनाओं के आवंटियों ने उठाई रिफंड की मांग
- करीब ₹85 करोड़ की राशि अब भी लंबित
- 440 मामलों में उपभोक्ता मंचों से आ चुके हैं फैसले
- लगभग 290 आवंटी अभी भी भुगतान का इंतजार कर रहे
- हर साल करीब ₹9 करोड़ ब्याज का अतिरिक्त बोझ
- मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर लगाए गए गंभीर आरोप
- सरकार और ट्रस्ट से शीघ्र भुगतान की मांग
FAQ Section:
Q1. मामला किस संस्था से जुड़ा है?
उत्तर: यह मामला जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (JIT) की आवासीय योजनाओं से जुड़ा है।
Q2. कितनी राशि का रिफंड लंबित बताया जा रहा है?
उत्तर: आवंटियों के अनुसार करीब ₹85 करोड़ का रिफंड अभी भी लंबित है।
Q3. कितने मामलों में उपभोक्ता मंचों ने फैसला दिया है?
उत्तर: लगभग 440 मामलों में विभिन्न उपभोक्ता आयोगों द्वारा निर्णय दिए जा चुके हैं।
Q4. कितने आवंटियों को अब तक भुगतान नहीं मिला?
उत्तर: करीब 290 आवंटी अभी भी अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
Q5. आवंटियों की मुख्य शिकायत क्या है?
उत्तर: उनका आरोप है कि कब्जा देते समय आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं और न्यायिक आदेशों के बावजूद रिफंड में देरी हो रही है।
Conclusion:
जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की आवासीय योजनाओं से जुड़ा यह मामला अब सैकड़ों आवंटियों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। उपभोक्ता आयोगों के आदेशों के बावजूद लंबित रिफंड का भुगतान न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। आवंटी अब उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित अधिकारी जल्द हस्तक्षेप कर इस लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान निकालेंगे।

