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- AI वाले गणेश आउट, शास्त्रों वाले गणपति की वापसी! इस गणेशोत्सव बदल गया श्रद्धालुओं का ट्रेंड
AI वाले गणेश आउट, शास्त्रों वाले गणपति की वापसी! इस गणेशोत्सव बदल गया श्रद्धालुओं का ट्रेंड
गणेशोत्सव 2026 में एआई आधारित काल्पनिक डिजाइनों की जगह पारंपरिक और शास्त्रों के अनुसार बनी गणेश प्रतिमाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। छत्तीसगढ़ के थनौद गांव से हजारों मूर्तियां देश के कई राज्यों में भेजी जा रही हैं।
इस बार गणेशोत्सव में श्रद्धालु आधुनिक एआई-प्रेरित गणेश प्रतिमाओं के बजाय पारंपरिक और शास्त्रसम्मत स्वरूप को प्राथमिकता दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ के थनौद गांव के मूर्तिकारों को चार राज्यों से बड़ी संख्या में ऑर्डर मिल रहे हैं।
AI वाले गणेश आउट, शास्त्रों वाले गणपति की वापसी! इस गणेशोत्सव बदल गया श्रद्धालुओं का ट्रेंड
गणेशोत्सव 2026 से पहले देशभर में गणेश प्रतिमाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि इस बार बाजार में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से प्रेरित आकर्षक और काल्पनिक गणेश प्रतिमाएं चर्चा में थीं, वहीं अब श्रद्धालु फिर से पारंपरिक और शास्त्रसम्मत गणपति स्वरूप को प्राथमिकता दे रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के थनौद गांव के मूर्तिकारों का कहना है कि इस वर्ष पारंपरिक प्रतिमाओं की मांग पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ी है। यही वजह है कि यहां तैयार की गई हजारों प्रतिमाएं देश के विभिन्न राज्यों में भेजी जा रही हैं।
पारंपरिक गणेश प्रतिमाओं की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी
मूर्तिकारों के अनुसार श्रद्धालु अब ऐसे स्वरूप की प्रतिमाएं पसंद कर रहे हैं, जिनका उल्लेख धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में मिलता है। लोग पूजा के लिए पारंपरिक रूप से विराजमान गणपति की प्रतिमाओं को अधिक शुभ और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मान रहे हैं।चार राज्यों तक भेजी जा रहीं हजारों प्रतिमाएं
छत्तीसगढ़ के थनौद गांव से तैयार की गई गणेश प्रतिमाएं चार राज्यों में भेजी जा रही हैं। गणेशोत्सव नजदीक आने के साथ ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे स्थानीय मूर्तिकारों और कारीगरों के रोजगार को भी बढ़ावा मिला है।
स्थानीय कारीगरों को मिल रहा बड़ा लाभ
पारंपरिक प्रतिमाओं की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय शिल्पकारों और मूर्तिकारों को मिल रहा है। कई परिवार महीनों पहले से प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हैं ताकि समय पर सभी ऑर्डर पूरे किए जा सकें।
धार्मिक परंपराओं की ओर लौट रहे श्रद्धालु
विशेषज्ञों का मानना है कि गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालु अब धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुरूप प्रतिमाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं। यही कारण है कि आधुनिक और काल्पनिक डिजाइनों की तुलना में पारंपरिक गणपति की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
Key Highlights:
- गणेशोत्सव 2026 में पारंपरिक गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ी।
- एआई आधारित काल्पनिक डिजाइनों की लोकप्रियता में कमी।
- छत्तीसगढ़ के थनौद गांव से चार राज्यों में भेजी जा रहीं हजारों प्रतिमाएं।
- स्थानीय मूर्तिकारों को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं।
- श्रद्धालु शास्त्रसम्मत गणपति स्वरूप को दे रहे हैं प्राथमिकता।
FAQ Section:
Q1. इस बार किस तरह की गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है?
उत्तर: पारंपरिक और शास्त्रसम्मत गणेश प्रतिमाओं की मांग तेजी से बढ़ी है।
Q2. एआई आधारित प्रतिमाओं की मांग क्यों घटी है?
उत्तर: श्रद्धालु धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय स्वरूप वाली प्रतिमाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं।
Q3. थनौद गांव कहां स्थित है?
उत्तर: थनौद गांव छत्तीसगढ़ में स्थित है और यहां बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं।
Q4. थनौद से प्रतिमाएं कहां भेजी जा रही हैं?
उत्तर: यहां से चार राज्यों में हजारों पारंपरिक गणेश प्रतिमाएं भेजी जा रही हैं।
Q5. इससे स्थानीय कारीगरों को क्या फायदा हुआ है?
उत्तर: बढ़ती मांग के कारण स्थानीय मूर्तिकारों और कारीगरों को अधिक रोजगार और कारोबार मिल रहा है।
Conclusion:
गणेशोत्सव 2026 में श्रद्धालुओं की पसंद एक बार फिर पारंपरिक और शास्त्रसम्मत गणेश प्रतिमाओं की ओर लौटती दिखाई दे रही है। इससे न केवल धार्मिक परंपराओं को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय मूर्तिकारों और हस्तशिल्प उद्योग को भी नई मजबूती मिल रही है।.jpg-(1).jpeg)
