Category
उत्तराखंड

हरिद्वार के घाटों पर अचानक क्यों मांगे जा रहे हैं आधार कार्ड! जान लीजिए इसके पीछे की बड़ी वजह

हरिद्वार के घाटों पर अचानक क्यों मांगे जा रहे हैं आधार कार्ड! जान लीजिए इसके पीछे की बड़ी वजह हर की पैड़ी और इसके आसपास के घाटों पर गंगा सभा और तीर्थ पुरोहितों ने एक सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है. उत्तराखंड के ऋषिकेश में कफन के कपड़ों से कंबल बनाकर बेचने वाले गिरोह के खुलासे के बाद अब धर्मनगरी हरिद्वार में भी माहौल गरमा गया है. हर की पैड़ी और इसके आसपास के घाटों पर गंगा सभा और तीर्थ पुरोहितों ने एक सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है. इस अभियान के तहत घाटों के किनारे दुकान या ठेली लगाने वाले व्यक्तियों के आधार कार्ड की गहन जांच की जा रही है. हालांकि, इस मामले में अभी तक किसी अधिकारी का कोई  बयान नहीं आया है.  तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि कोई भी गैर-हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र में व्यापार न करे. कुंभ 2027 से पहले उठ रही 'घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक' की मांग के बीच इस कार्रवाई ने और जोर पकड़ लिया है. तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित के अनुसार, यदि कोई गैर-हिंदू क्षेत्र में व्यवसाय करता पाया जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत श्री गंगा सभा को दी जाएगी ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके. वहीं, देहरादून के रानी पोखरी क्षेत्र में लोगों द्वारा फेंके गए अपने मृत परिजनों के रजाई-गददों को उठाकर दूसरे लोगों को बेचने के आरोप में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि स्थानीय लोगों द्वारा शिकायत की गयी थी कि उनके क्षेत्र की एक दुकान पर मृतकों के परिजनों द्वारा फेंके गए रजाई-गद्दे बेचे जा रहे हैं जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं.  
उत्तराखंड 

उत्तराखंड में गहरी खाई में गिरी बस, 7 यात्रियों की मौत, 10 से अधिक घायल

उत्तराखंड में गहरी खाई में गिरी बस, 7 यात्रियों की मौत, 10 से अधिक घायल Bus Accident : उत्तराखंड (Uttarakhand News) के अल्मोड़ा जिले में एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। एक बस गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि दो महिलाओं समेत बारह यात्री घायल हो गए। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह हादसा भिकियासैन–विनायक–जलाली मोटर रोड पर शिलापानी के पास हुआ। बस भिकियासैन से रामनगर जा रही थी और सुबह करीब 6 बजे द्वाराहाट से रवाना हुई थी। रास्ते में बस चालक ने नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद बस गहरी खाई में गिर गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि घायलों को भिकियासैन के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे। घायलों को खाई से निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। अधिकारियों के अनुसार, बस में कुल 19 यात्री सवार थे। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया था। मृतकों में पांच पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। मृतकों की पहचान: गोविंद बल्लभ (80 वर्ष) और उनकी पत्नी पार्वती देवी (75 वर्ष), दोनों निवासी जमोली सूबेदार नंदन सिंह अधिकारी (65 वर्ष), जमोली तारा देवी (50 वर्ष), बाली गणेश (25 वर्ष) उमेश (25 वर्ष) एक अज्ञात युवक, जिसकी पहचान अभी की जा रही है घायलों में शामिल हैं:नंदा बल्लभ (50 वर्ष), नौबदा; राकेश कुमार (40 वर्ष), नौबदा; नंदी देवी (40 वर्ष), सिंगोली; हांसी सती (36 वर्ष), सिंगोली; मोहित सती (16 वर्ष), नौगर; बुद्धी बल्लभ (58 वर्ष), अमोली; हरिचंद्र (62 वर्ष), पाली; भूपिंदर सिंह (64 वर्ष), जमोली; जितेंद्र रेखाड़ी (37 वर्ष), विनायक; बस चालक नवीन चंद्र (55 वर्ष); हिमांशु पालिवाल (17 वर्ष); और प्रकाश चंद (43 वर्ष), चचरौती। पीएम और सीएम ने जताया दुखप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकाकुल परिवारों को धैर्य प्रदान करने की कामना की।
उत्तराखंड 

आंध्र प्रदेश के मदनपल्ली में अटल-मोदी सुशासन यात्रा में शामिल हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी

आंध्र प्रदेश के मदनपल्ली में अटल-मोदी सुशासन यात्रा में शामिल हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आंद्र प्रदेश के मदनपल्ली में अटल-मोदी सुशासन यात्रा में शामिल हुए. उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आंध्र प्रदेश के मदनपल्ली में आयोजित अटल-मोदी सुशासन यात्रा में शामिल हुए. इस दौरान उत्तराखंड के सीएम ने वहां एक जनसभा को भी संबोधित किया. तिरुपति में आयोजित इस सभा में हजारों लोगों ने भाग लिया था. गौरतलब है कि सीएम धामी पीएम ने कई बार कहा कि वो नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरी करने के लिए तत्परता के साथ आगे बढ़ रहे हैं.  धामी ने कहा है कि वो पीएम मोदी के विजन को जमीन पर उतारने में जुटे हुए हैं. धामी ने दक्षिण भारत में चुनाव के दौरान भी कई बार दौरा कर चुक हैं. उत्तराखंड के सीएम हिंदी पट्टी के राज्यों में भी चुनाव प्रचार कर चुके हैं.  धामी उत्तराखंड में सुशासन और विकास के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं. सीएम धामी ने कहा है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनेगा और उत्तराखंड देश को आगे ले जाने के लिए पूरी ताकत झोंकेगा.   
उत्तराखंड 

कंबल-रजाई निकाल लो, पहाड़ों मे तंग कर रही सूखी ठंड, दिल्ली से लखनऊ तक सर्दी ढाएगी सितम

कंबल-रजाई निकाल लो, पहाड़ों मे तंग कर रही सूखी ठंड, दिल्ली से लखनऊ तक सर्दी ढाएगी सितम उत्तराखंड में बारिश नहीं होने की वजह से इसका असर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में तो पड़ रहा है. इसके साथ ही दिल्ली और एनसीआर वाले क्षेत्र में भी इसका सीधा असर हो रहा है. क्योंकि अमूमन जब पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और अच्छी बर्फबारी होती है, तो निचले इलाके खासकर दिल्ली और एनसीआर वाले क्षेत्रों में इसका असर होता है. लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से सूखी ठंड लगातार बढ़ रही है. देहरादून: उत्तराखंड में आनेवाले अगले एक हफ्ते तक कड़ाके की ठंड का सामना लोगों को और करना पड़ेगा. राज्य में फिलहाल बारिश के आसार नहीं दिख रहे हैं. पहाड़ों में बारिश नहीं हो रही है. जिसकी वजह से निचले इलाकों दिल्ली और एनसीआर में इसका असर देखने को मिल रहा है और तापमान काफी नीचे जा चुका है. उत्तराखंड में लगातार सर्दी का सितम लोगों को परेशान कर रहा है. उत्तराखंड में मौसम शुष्क बना हुआ है. जिसकी वजह से सूखी ठंड ने लोगों को परेशान कर रखा है. उत्तराखंड मौसम विभाग के मुताबिक नवंबर के पूरे महीने में बारिश नहीं हुई है. यहां तक की दिसंबर की शुरुआत भी बिना बारिश के हुई है. बारिश नहीं होने से लगातार सूखी ठंड पड़ रही है. सुबह और शाम लगातार ठंड बढ़ती जा रही है. उत्तराखंड मौसम विभाग ने 5 दिसंबर, 7 दिसंबर और 8 दिसंबर को तीन जिलों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है. मौसम विभाग के मुताबिक उत्तरकाशी चमोली और पिथौरागढ़ में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश की संभावना है. लेकिन इसके साथ ही 3200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में बर्फबारी की संभावना जताई है. लेकिन बाकी के उत्तराखंड के 10 जिलों में मौसम शुष्क बना रहेगा. फिलहाल मैदानी क्षेत्रों में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तापमान पहुंच चुका है. उत्तराखंड में बारिश नहीं होने की वजह से इसका असर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में तो पड़ रहा है. इसके साथ ही दिल्ली और एनसीआर वाले क्षेत्र में भी इसका सीधा असर हो रहा है. क्योंकि अमूमन जब पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और अच्छी बर्फबारी होती है, तो निचले इलाके खासकर दिल्ली और एनसीआर वाले क्षेत्रों में इसका असर होता है. लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से सूखी ठंड लगातार बढ़ रही है. चाहे वह उत्तराखंड का मैदानी क्षेत्र हो या फिर दिल्ली और एनसीआर सब जगह ठंड के सितम से आम लोग परेशान है. सुबह और शाम तापमान गिरने की वजह से सड़कों पर लोग नहीं निकल पा रहे हैं. साथ ही सुबह मॉर्निंग वॉक करने वाले भी अब काम ही देखे जा रहे हैं. वहीं अब बारिश की बात करें तो 1 अक्टूबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक मात्र 11% ही बारिश प्रदेश भर में हुई है. नवंबर का महीना बिना बारिश के गुजारा है और दिसंबर के चार दिन अभी तक बारिश का नामोनिशान नहीं है. वैसे नवंबर के महीने में अमूमन बारिश कम ही रिकॉर्ड की जाती है. वहीं आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 सालों में इस बार न्यूनतम तापमान सबसे कम रिकॉर्ड किया गया है. नवंबर के महीने में उत्तराखंड के अल्मोड़ा ,बागेश्वर, देहरादून ,पौड़ी, चंपावत, टिहरी ,हरिद्वार ,नैनीताल ,रुद्रप्रयाग ,उत्तरकाशी में बारिश नहीं हुई है. यही वजह है कि हड्डियों को गला देने तक वाली ठंड पड़ रही है. जिसकी वजह से इसका न सिर्फ खेती और बागवानी पर असर पड़ रहा है. बल्कि आम लोगों के सामान्य चीजों को भी काफी प्रभावित कर रहा है. खासकर बुजुर्ग बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. सूखी ठंड पड़ने से लोगों को खांसी सर्दी जुकाम और बुखार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
उत्तराखंड 

बदरीनाथ धाम में अलर्ट पर पुलिस, असम राइफल्स की टीम भी तैनात, 25 नवंबर को बंद होंगे कपाट

बदरीनाथ धाम में अलर्ट पर पुलिस, असम राइफल्स की टीम भी तैनात, 25 नवंबर को बंद होंगे कपाट उत्तराखंड में तीन धामों के कपाट बंद हो चुके हैं. वहीं, बदरीनाथ धाम में यात्रा जारी है. भक्तों की संख्या को देखते हुए सिक्योरिटी फोर्स अलर्ट पर है. यहां असम राइफल्स की टीम और बम स्क्वाड को तैनात किया गया है. दिल्ली के लालकिले के पास हुए बम धमाके के बाद पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है. उत्तराखंड में भी राज्य सरकार ने सभी जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है. खासतौर पर बदरीनाथ धाम में भक्तों की भीड़ को देखते हुए सिक्योरिटी को और कड़ा कर दिया गया है. यहां अब असम राइफल्स की टीम को भी तैनात कर दिया गया है. उत्तराखंड के चारों धामों में तीन धाम के कपाट बंद हो चुके हैं. इस समय केवल बदरीनाथ धाम श्रद्धालुओं के लिए खुला है. यहां रोजाना भारी संख्या में तीर्थयात्री दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती और गश्त बढ़ा दी गई है. पुलिस ने बदरीनाथ क्षेत्र में आने-जाने वाले वाहन की गहन जांच शुरू कर दी है. बम स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर टीम मौके पर चमोली के एसपी सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक, बदरीनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने के लिए बम निरोधक दस्ता (Bomb Squad) और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर टीम को तैनात कर दिया गया है. इसके अलावा 7 सदस्यीय विशेष टीम बदरीनाथ पहुंच चुकी है. धाम के कपाट 25 नवंबर को बंद होंगे. इस वजह से वहां पर भक्तों की संख्या बनी हुई है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. पुलिस और प्रशासन ने किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए अतिरिक्त बलों को तैनात किया है. चेकिंग अभियान जारी बदरीनाथ के अलावा देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर, नैनीताल समेत सभी प्रमुख शहरों में 24 घंटे का सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है. पुलिस की टीमें हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं. दिल्ली धमाके में हर्षुल घायल दिल्ली में सोमवार को एक कार में हुए भीषण विस्फोट में उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में गदरपुर के रहने वाले हर्षुल सेतिया घायल हो गए थे. हर्षुल की जनवरी में शादी तय है. वह अपनी मां अंजू सेतिया, छोटे भाई और मंगेतर के साथ शादी की शॉपिंग के लिए दिल्ली गए थे. धमाके की आवाज से इलाके में अफरातफरी मच गई और आसपास खड़ी गाड़ियों के शीशे टूट गए. इन्हीं शीशों के टुकड़ों से हर्षुल के सिर में चोट लगी. फिलहाल उनका इलाज जारी है.  
उत्तराखंड 

जय बाबा केदार... शीतकाल के लिए बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट, अब 6 महीने कहां होंगे दर्शन?

जय बाबा केदार... शीतकाल के लिए बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट, अब 6 महीने कहां होंगे दर्शन? आज भाई दूज के मौके पर सुबह करीब 8:30 बजे अगले छह महीने के लिए केदारनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए गए। इस दौरान पूरी केदारघाटी हर हर महादेव और जय बाबा केदार के जयघोष से गूंज उठी। उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर के कपाट आज से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस मौके पर केदारनाथ धाम में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। आज भाई दूज के मौके पर सुबह करीब 8:30 बजे अगले छह महीने के लिए केदारनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए गए। हजारों श्रद्धालुओं ने भी बाबा के दर्शन किए। इस दौरान पूरी केदारघाटी हर हर महादेव और जय बाबा केदार के जयघोष से गूंज उठी। इस मौके पर सीएम पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट आज दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे। 6 महीने ऊखीमठ में होंगे दर्शन अब 6 महीने तक बाबा केदार की पूजा शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में होगी। कपाट बंद होने के बाद भगवान शिव की चल डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए रवाना होगी। यात्रा के पहले दिन, यानी आज डोली रामपुर में रात्रि विश्राम करेगी। इसके बाद 24 अक्टूबर को गुप्तकाशी पहुंचेगी। तीसरे दिन 25 अक्टूबर को डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी। यहां बाबा केदार की पूजा-अर्चना और दर्शन की व्यवस्था पूरे 6 महीने तक की जाएगी। केदारनाथ और बदरीनाथ में रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंचे  उत्तराखंड में मानसून के दौरान आपदाओं के कारण बार-बार बाधित हुई चारधाम यात्रा ने बर्फबारी और लगातार खराब मौसम के बावजूद रफ्तार पकड़े रही। केदारनाथ और बदरीनाथ मंदिर में उमड़े श्रद्धालुओं की संख्या ने नये रिकॉर्ड कायम किए। केदारनाथ में जहां इस साल दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या बुधवार को 16.56 लाख के पार चली गई, वहीं बदरीनाथ में यह आंकड़ा 14.53 लाख से अधिक हो गया। आंकड़ों के मुताबिक, पिछला रिकॉर्ड 2024 में बना था, जब पूरे यात्राकाल में 16.52 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन के लिए केदारनाथ मंदिर पहुंचे थे, जबकि बदरीनाथ के दर्शन के लिए 14.35 लाख श्रद्धालु गए थे।   
उत्तराखंड 

दिल्ली में गुलाबी ठंड, केदारनाथ में बर्फ, गीजर ऑन... इस बार आ रही कड़ाके वाली ठंड

चमोली जिला प्रशासन ने पहले ही छह और सात अक्टूबर के लिए ट्रैकिंग गतिविधियों पर रोक लगा दी थी. अधिकारियों ने आम जनता और पर्यटकों से अनावश्यक आवाजाही से बचने और पूरी सावधानी बरतने की अपील की है. तीर्थयात्रियों से विशेष रूप से कहा गया है कि वे अपने साथ गर्म कपड़े रखें और मौसम की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर पर्याप्त सावधानी बरतें. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है, जिसके कारण पूरे उत्तर भारत में ठंड के मौसम का आगाज हो गया है. कश्मीर के ऊपरी इलाकों में हुए ताजा हिमपात और निचले मैदानी इलाकों में बारिश के चलते घाटी के दिन के तापमान में भारी गिरावट आई है. पहाड़ों पर हुई इस बर्फबारी का असर अब दिल्ली-एनसीआर में भी साफ दिखने लगा है. पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश और बर्फीली हवाओं के कारण दिल्ली में अचानक ठंड की एंट्री हो गई है. मौसम में आई इस तेज गिरावट से लोगों को अब गीजर ऑन करने की नौबत आ गई है, जो यह दर्शाता है कि गुलाबी ठंड अब जोरदार सर्दी में बदल रही है. केदारनाथ, बदरीनाथ में भी बर्फबारी  पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में यह बड़ा बदलाव आया है, जहां एक ओर पहाड़ बर्फ की चादर से ढक गए है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों की ऊंची चोटियों पर बर्फ गिरी है. इन क्षेत्रों में केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, हेमकुंड, औली और मुनस्यारी शामिल हैं. अक्टूबर की शुरुआत में ही सीजन की यह पहली बर्फबारी हुई है. केदारनाथ में भगवान के दर्शन के लिए आए श्रद्धालु इस अचानक हुई बर्फबारी का आनंद लेते नजर आए. निचले इलाकों में हो रही बारिश के कारण पूरे प्रदेश के तापमान में गिरावट आई है, जिससे पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में ठंडक बढ़ गई है. मौसम विभाग का अलर्ट और प्रशासन की तैयारी मौसम विभाग ने मंगलवार तक प्रदेश के कई स्थानों पर बारिश जारी रहने और 4,000 मीटर या उससे अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में और अधिक बर्फबारी होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है. इस चेतावनी को देखते हुए, प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए हैं. चमोली जिला प्रशासन ने पहले ही छह और सात अक्टूबर के लिए ट्रैकिंग गतिविधियों पर रोक लगा दी थी. अधिकारियों ने आम जनता और पर्यटकों से अनावश्यक आवाजाही से बचने और पूरी सावधानी बरतने की अपील की है. तीर्थयात्रियों से विशेष रूप से कहा गया है कि वे अपने साथ गर्म कपड़े रखें और मौसम की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर पर्याप्त सावधानी बरतें. हिमाचल प्रदेश में बर्फ की सफेद चादरहिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है. सीजन की पहली बर्फबारी ने पूरे इलाके को बर्फ की सफेद चादर से ढक दिया है. अचानक आई इस बर्फबारी से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे लोग अपने घरों के भीतर दुबककर बैठने को मजबूर हो गए हैं. बर्फबारी से रोहतांग दर्रा, बारालाचा, कुंजुम, तांदी, केलांग, उदयपुर और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्र पूरी तरह बर्फ से ढक गए हैं. सुबह होते-होते सड़कों पर बर्फ की मोटी परत जम गई, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. लोगों के लिए बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है और ठंडी हवाओं के थपेड़ों से बचने के लिए लोग घरों के अंदर दुबकने को मजबूर हो गए हैं. कश्मीर के ऊपरी इलाकों में ताजा हिमपात और मैदानी इलाकों में बारिश के कारण सोमवार को घाटी में दिन के तापमान में भारी गिरावट आई. अधिकारियों ने बताया कि अनंतनाग जिले के सिंथन टॉप, गुलमर्ग के अफरवत, ज़ोजिला दर्रा, कुपवाड़ा के बंगस, गुरेज घाटी के राजदान दर्रा और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की खबर है.
हिमाचल  उत्तराखंड  दिल्ली 

चारधाम परियोजना को लेकर मुरली मनोहर जोशी ने क्यों लिखा CJI को पत्र

मुरली मनोहर जोशी ने  CJI को लिखे अपने पत्र में कोर्ट के उस आदेश का जिक्र किया है इसमें चारधाम परियोजना के तहत सड़कों के चौड़ीकरण की अनुमति देने की बात कही है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने चारधाम परियोजना के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है. उन्होंने इस परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखा है. साथ इस परियोजना को लेकर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. उन्होंने अपने इस पत्र में हिमाचल प्रदेश में बीते दिनों आई प्राकृतिक आपदाओं का भी जिक्र किया है. आपको बता दें CJI को जिन लोगों ने पत्र लिखकर इस परियोजना को लेकर कोर्ट के फैसले पर विचार करने की बात कही है, उनमें डॉ कर्ण सिंह, डॉ मुरली मनोहर जोशी, कुंवर रेवती रमण सिंह, के एन गोविंदाचार्य, प्रो शेखर पाठक, रामचंद्र गुहा, सांसद रंजीत रंजन, उज्ज्वल रमन सिंह जैसे नाम शामिल हैं.  सड़क चौड़ीकरण का कर रहे हैं विरोध मुरली मनोहर जोशी ने  CJI को लिखे अपने पत्र में कोर्ट के उस आदेश का जिक्र किया है इसमें चारधाम परियोजना के तहत सड़कों के चौड़ीकरण की अनुमति देने की बात कही है. जोशी ने अदालत से अपने पहले के आदेश की समीक्षा करने की मांग की है. इस पत्र में कहा गया है कि इस तरह की स्थिति बेहद खतरनाक है. पत्र में कहा गया है कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश में उभरते “अस्तित्वगत संकट” को स्वीकार किया है. यदि अभी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो पूरे देश को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.  इस पत्र में विशेष रूप से भागीरथी इको-सेंसिटिव ज़ोन (BESZ) का उल्लेख किया गया है, जो गंगा का उद्गम स्थल है और हाल ही में धाराली आपदा जैसी त्रासदियों का सामना कर चुका है. नागरिकों का कहना है कि इस क्षेत्र में ‘आरओएमएडी' (ROMAD) डिज़ाइन से सड़क निर्माण की अनुमति देना जीवन, आजीविका और नदी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है. पत्र में यह भी स्वीकार किया गया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा बलों की आवाजाही के लिए हर मौसम में संपर्क मार्ग आवश्यक है. लेकिन इसके साथ ही जोर दिया गया है कि हिमालय में इन्फ़्रास्ट्रक्चर का विकास “आपदा एवं जलवायु-लचीले दृष्टिकोण” से होना चाहिए, जो भू-भाग की पारिस्थितिक सीमाओं का सम्मान करता हो.नागरिकों ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि चारधाम परियोजना के निर्णय की पुनः समीक्षा कर अधिक टिकाऊ ढांचा अपनाया जाए, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित हो सके. क्या है चार धार परियोजना आपको बता दें कि चार धाम परियोजना उत्तराखंड के चार प्रमुख धार्मिक स्थलों - बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को सबी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करने वाली एक योजना है. यह भारत सरकार की राजमार्ग  परियोजना है. इस परियोजना के तहत 889 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की योजना है ताकि उत्तराखंड के इन पवित्र स्थलों तक श्रद्धालु पूरे साल बगैर किसी रोकटोक के पहुंच सके. आपको बता दें कि चार धाम परियोजना उत्तराखंड के चार प्रमुख धार्मिक स्थलों - बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को सबी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करने वाली एक योजना है. यह भारत सरकार की राजमार्ग  परियोजना है. इस परियोजना के तहत 889 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की योजना है ताकि उत्तराखंड के इन पवित्र स्थलों तक श्रद्धालु पूरे साल बगैर किसी रोकटोक के पहुंच सके.
उत्तराखंड 

पूजा-पाठ ही नहीं सुख समृद्धि का भी केंद्र रहे हैं ये मंदिर

IIT रुड़की के इस अध्ययन में पाया गया कि 1350 ईस्वी से पहले निर्मित आठ प्राचीन शिव मंदिर जल, ऊर्जा और खाद्य उत्पादकता की प्रबल संभावनाओं वाले क्षेत्रों में स्थित थे. अगर मैं आपसे कहूं कि केदारनाथ , कालेश्वरम , श्रीशैलम, कलवियूर, रामेश्वरम, चिदंबरम, कांचीपुरम और तिरुवन्नमलाई जैसे मंदिर सिर्फ यहां होने वाली पूजा-पाठ के लिए ही नहीं है बल्कि इस क्षेत्र की उत्पादकता की वजह से भी खास हैं, तो आपको शायद ही मेरी बातों पर भरोसा हो. लेकिन IIT रुड़की और अमृता विश्व विद्यापीठम की हालिया रिसर्च ने इस लेकर बड़ा दावा किया है. इस रिसर्च में दावा किया गया है कि इन मंदिरों को खासतौर पर उन्हीं इलाकों में बनाया गया है जहां पानी, ऊर्जा और खाद्य उत्पादकता के लिहाज से आसपास के इलाके से सबसे उन्नत थे. यानी अगर कहा जाए कि इन मंदिरों को उन ही इलाकों में बनाया गया जहां दूसरे क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा उत्पादक थे तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा.  IIT रुड़की के इस अध्ययन में पाया गया कि 1350 ईस्वी से पहले निर्मित आठ प्राचीन शिव मंदिर जल, ऊर्जा और खाद्य उत्पादकता की प्रबल संभावनाओं वाले क्षेत्रों में स्थित थे. शोधकर्ताओं के अनुसार शिव शक्ति अक्ष रेखा (SSAR) क्षेत्र के 18.5% भू-भाग - जहां ये मंदिर स्थित हैं. इन मंदिर के पास अगर खेती की जाए तो सालाना 44 मिलियन टन तक चावल का उत्पादन किया जा सकता है. साथ ही साथ अगर नवीकरणीय ऊर्जा की बात करें तो यहां से लगभग 597 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन हो सकता है. इससे भारत के विकास को और तेजी से बढ़ाने में मदद मिल सकती है. सालाना 44 मीट्रिक टन चावल का हो सकता है उत्पादन इस अध्ययन में पाया गया है कि ये सभी मंदिर पारिस्थितिक संतुलन समृद्ध हैं. शोधकर्ताओं ने भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) भू-स्थानिक विश्लेषण का उपयोग करके मंदिरों के स्थानों को स्थलाकृति, वन आवरण, वर्षा, मृदा स्वास्थ्य और कृषि आंकड़ों के साथ जोड़ा है. आपको बता दें कि जिस बेल्ट में ये मंदिर स्थित हैं, उसके 18.5% भू-भाग पर सालाना 44 मीट्रिक टन चावल का उत्पादन हो सकता है. ये सभी आठ मंदिरों का निर्माण न केवल आध्यात्मिक और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखकर किया गया था, बल्कि संसाधनों की उपलब्धता और कृषि उर्वरता को भी ध्यान में रखकर किया गया था. मंदिर निर्माण प्राकृतिक संसाधन वितरण की वैज्ञानिक समझ को दर्शाता है.  पहले का फॉरेस्ट एरिया और घना था इस अध्ययन से पता चला है कि उस काल में वन क्षेत्र (फॉरेस्ट एरिया) आज की तुलना में लगभग 2.4 गुना अधिक सघन था, जिसके परिणामस्वरूप मृदा धारण क्षमता बेहतर हुई और पारिस्थितिक स्थिरता भी बेहतर हुई. हालांकि बारिश की मात्रा वर्तमान स्तर से भिन्न थी, फिर भी उनका भौगोलिक वितरण काफी हद तक स्थिर रहा, जिससे सदियों तक विश्वसनीय कृषि परिस्थितियां सुनिश्चित रहीं. मंदिरों के स्थान सीधे उन क्षेत्रों से संबंधित थे जहां सालभर जल स्रोतों, उपजाऊ भूमि और जलविद्युत या सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता थी.शोधकर्ताओं ने स्थिरता से जुड़े प्राकृतिक पैटर्न की पहचान करने के लिए सुदूर संवेदन और साहित्य सर्वेक्षणों को संयोजित किया. नेचर पोर्टफोलियो द्वारा ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस शोध ने सुझाव दिया कि भारत के एनसिएंट प्लानिंग मॉडल माइथोलॉजी (कथाओं) से गहराई से जुड़े हुए हैं. और समकालीन विकास के लिए पारिस्थितिकी (इकोलॉजी फॉर कंटेम्पररी डेवलपमेंट)  टेम्पलेट के रूप में काम कर सकते हैं. साथ ही कहा गया है कि भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का है, और अकेले SSAR बेल्ट की अनुमानित उत्पादन क्षमता इस लक्ष्य के दसवें हिस्से से भी अधिक योगदान दे सकती है. IIT रुड़की के जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग के प्रोफ़ेसर केएस काशिविश्वनाथ, जो इस अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं, ने कहा कि यह ऐतिहासिक अंतर्दृष्टि से कहीं अधिक प्रदान करता है. इन मंदिर स्थलों के पीछे का विज्ञान हमें अपनी विरासत से प्राप्त स्थायी योजना का खाका प्रदान करता है. ये निष्कर्ष केवल पुरातात्विक नहीं हैं. ये आधुनिक भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता और संसाधन सुरक्षा के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं. टीम ने निष्कर्ष निकाला कि मंदिर स्थल न केवल पवित्र थे, बल्कि पारिस्थितिक रूप से उत्पादक परिदृश्यों के अनुरूप रणनीतिक रूप से चुने गए थे.
उत्तराखंड 

हरिद्वार की सड़क पर जब उतरी हाथियों की फौज..

हरिद्वार की सड़कों पर हाथियों का झुंड देख लोग दहशत में आ गए. हाथियों को देख पूरे जगजीतपुर बाजार में हल्‍ला मच गया. लोग चिल्‍ला- चिल्‍लाकर दूसरों लोगों को हाथियों से बचने की चेतावनी देने लगे. हरिद्वार की सड़कों पर आज सुबह एक, दो नहीं, बल्कि सात-सात हाथियों का झुंड बड़ी तेजी से जगजीतपुर के मुख्य बाजार की ओर बढ़ता दिखाई दिया. हाथियों की फौज को देखकर, वहां हड़कंप मंच गया. हालांकि, हाथियों ने किसी पर हमला नहीं किया, लेकिन ये काफी तेज गति से गुजर रहे थे. ऐसे में लोग दहशत में आ गए, क्‍योंकि ऐसा लग रहा था कि हाथी अपने रास्‍ते में आने वाले लोगों को कुचल कर निकल जाएंगे. हाथियों की चल को देख लोग इधर-उधर भागने लगे. इस अफरा-तफरी के माहौल को एक शख्‍स ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया.   जगजीतपुर के बाजार से जब हाथी गुजर रहे थे, तब वहां काफी लोग मौजूद थे. हाथियों को देख पूरे बाजार में हल्‍ला मच गया. लोग चिल्‍ला- चिल्‍लाकर दूसरों लोगों को हाथियों से बचने की चेतावनी देने लगे. हाथियों के गुजरने से पूरी सड़क ही कुछ देर के लिए जाम हो गई. हाथियों के झुंड को जिसने भी देखा, वो वहीं रुक गया.  इस बीच एक के बाद एक सात हाथी बड़ी तेजी से निकलते चले आए. लोग कुछ समझ पाते, इतने में ही हाथियों का झुंड उनके सामने था. कई स्‍थानीय व्‍यक्तियों ने हाथियों की इस फौज के दृश्‍य को अपने मोबाइल में भागते-भागते कैद कर लिया.  दरअसल, अक्सर हाथियों की आवाजाही इस क्षेत्र में होती ही रहती है, लेकिन हमेशा ही हाथी आराम से आते-जाते रहते हैं. हाथी किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. यहां तक देखा गया है कि हाथी खड़े व्यक्ति को देख आराम से अपना रास्ता भी बदल लेते हैं, लेकिन आज हाथियों की तेज चाल देख लोग दहशत में आ गए. ऐसा लग रहा था कि हाथी आज कुछ ज्‍यादा ही जल्‍दी में थे. 
उत्तराखंड 

देहरादून में सौंग नदी ने दिखाया ऐसा विकराल रूप, पुल-सड़कें सब बहीं

स्थानीय लोगों का कहना है अनुसार सौंग नदी ने इस बार विकराल रूप धारण कर लिया है और करीब 500 मीटर तक फैल गई है. इसके चलते सड़क और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. उत्तराखंड में मॉनसून की बारिश का कहर जारी है. लगातार हो रही बारिश ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. राजधानी देहरादून में भारी नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं. खासतौर पर सहस्‍त्रधारा और मालदेवता क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं. देहरादून में सौंग नदी उफान पर है. न‍दी की लहरें सड़कें बहा ले गई हैं. पुल ध्‍वस्‍त हो गए हैं. देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. ये गूगल मैप इमेज देख कर आप समझ सकते हैं, कौन-सा पुल क्षतिग्रस्‍त हुआ है.  दो लोग लापता, तलाश जारी  बताया जा रहा है कि दो लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है. स्थानीय लोगों का कहना है अनुसार सौंग नदी ने इस बार विकराल रूप धारण कर लिया है और करीब 500 मीटर तक फैल गई है. इसके चलते सड़क और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. वहीं, सहस्‍त्रधारा में बादल फटने से मकानों और दुकानों को काफी नुकसान पहुंचा है. राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं. 5 वर्षों में ऐसा उफान नहीं देखा!  स्थानीय प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे और निचले इलाकों में न जाने की अपील की है. मौसम विभाग ने भी अगले 48 घंटों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. विभाग का कहना है कि अब तक पिछले 10-15 सालों में सॉन्ग नदी का इतना उफान पहली बार देखा गया है. फिलहाल लगातार बारिश जारी है और खतरा बढ़ता जा रहा है. प्रशासन अलर्ट मोड पर है और आपदा प्रबंधन टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य में जुटी हैं. भारी बारिश की वजह से सोमवार रात कारलीगाढ़ सहस्त्रधारा क्षेत्र में बादल फटने की घटना सामने आई है. घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है. जिला प्रशासन ने आसपास के निवासियों को रात में ही सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया.
उत्तराखंड 

बादल फटने की वजह से देहरादून के किन-किन टूरिस्ट प्लेसेज को पहुंचा नुकसान? जाने

उत्तराखंड के देहरादून में बादल फटने से भीषण तबाही की बात सामने आई है। कई मंदिर, घर और सड़कें जलमग्न हो गई हैं। कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और मलबा लोगों के घरों के अंदर तक घुसा है। एक जगह तो पुल भी बह गया है। उत्तराखंड के देहरादून में हालात खतरनाक हैं। यहां के प्रसिद्ध टूरिस्ट स्पॉट सहस्त्रधारा के पास मंगलवार सुबह 5 बजे बादल फट गया। इसका असर ये हुआ कि तमसा नदी, कारलीगाड़ नदी, सहस्त्रधारा नदी में जलस्तर बढ़ गया और आसपास के इलाकों में पानी भर गया और सड़कें बह गईं।  सहस्त्रधारा: सहस्त्रधारा देहरादून का एक फेमस टूरिस्ट स्पॉट है, जहां बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहुंचते हैं। यहां पहाड़ों से पानी गिरता है और लोग पानी में मस्ती करने के लिए पहुंचते हैं। खबर है कि सहस्त्रधारा समेत आसपास के इलाके (घड़ीकैंट, आईटी पार्क, तपोवन, घंगौरा) में पानी भरा है। मुख्य बाजार में दो से तीन बड़े होटल और कई दुकानें क्षतिग्रस्त होने की भी खबर है। टपकेश्वर महादेव मंदिर: ये यहां का फेमस मंदिर है, जो तमसा नदी के किनारे है। यहां भी पानी भरने की वजह से मंदिर और दुकानें जलमग्न हैं और कुछ लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। फन वैली के पास तबाही: देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास भारी बारिश के कारण एक पुल बह गया। मसूरी में क्या हैं हालात?  मसूरी में देर रात भारी बारिश हुई है, जिसकी वजह से मजदूरों के आवास पर मलबा गिरा और एक मजदूर की मौत हो गई। इसके अलावा एक मजदूर के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। 300 से 400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा, ‘‘देहरादून में सहस्त्रधारा और माल देवता तथा मसूरी से भी नुकसान की खबरें मिली हैं। देहरादून में दो से तीन लोग लापता बताए जा रहे हैं। मसूरी में एक व्यक्ति की मौत की खबर मिली है और इसकी पुष्टि की जा रही है।’’  आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया, "प्रभावित इलाकों में टीम राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई हैं, और 300 से 400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।"
उत्तराखंड 
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software