Haryana MSME Policy 2026: प्रदूषण फैलाने वाली 16 इंडस्ट्रीज को नहीं मिलेगा सरकारी इंसेंटिव, थर्ड-पार्टी जांच की तैयारी

8 अगस्त को अधिसूचित नई Progressive MSME & Export Promotion Policy में निवेश और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य, पर्यावरण नियमों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों पर सख्ती

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हरियाणा की नई Progressive MSME & Export Promotion Policy 2026 में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। नीति के तहत प्रदूषण फैलाने वाली या पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील 16 श्रेणियों की औद्योगिक इकाइयों को सरकारी प्रोत्साहन से बाहर रखा गया है।

 

हरियाणा सरकार ने MSME और निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए Progressive MSME & Export Promotion Policy 2026 अधिसूचित की है। 8 अगस्त को अधिसूचित इस नीति का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 55,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना और पांच लाख रोजगार के अवसर पैदा करना है। हालांकि, सरकार ने निवेश प्रोत्साहन के साथ पर्यावरणीय मानकों को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया है।

नई नीति के तहत प्रदूषण फैलाने वाली और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील 16 श्रेणियों की औद्योगिक इकाइयों को ‘Restrictive List’ में रखा गया है। इन इकाइयों को नीति के तहत मिलने वाले सरकारी प्रोत्साहनों का लाभ नहीं मिलेगा।

नई MSME Policy में क्या है खास?

हरियाणा की नई नीति का उद्देश्य राज्य में MSME क्षेत्र, निवेश और निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देना है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे बड़े औद्योगिक एवं निर्यात केंद्रों को इसका प्रमुख लाभ मिलने की उम्मीद है।

नीति के तहत पात्र औद्योगिक इकाइयों को कई तरह के प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इनमें Capital Subsidy, राज्य GST की प्रतिपूर्ति और Stamp Duty Refund जैसे लाभ शामिल हैं।

किसी इकाई को मिलने वाले प्रोत्साहन की मात्रा उसके स्थान और संबंधित जोन पर निर्भर करेगी। Prime Zone और Focus Zone में स्थापित इकाइयों को अपेक्षाकृत अधिक प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है।

16 श्रेणियों की इंडस्ट्रीज को इंसेंटिव से बाहर रखा गया

नई नीति के Clause 6.1 और Annexure I में उन 16 श्रेणियों की पहचान की गई है जिन्हें प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

Restrictive List में शामिल प्रमुख श्रेणियों में Stone Crushers और Washeries, Lime एवं Brick Kilns, कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर, Fly Ash और Cement Block Units, Copper एवं Zinc Smelters, Tanneries, Sulphuric Acid और Electroplating Units तथा Used-Oil Refining Units शामिल हैं।

इसके अलावा ऐसे Dyeing और Dye-Intermediate Units भी इस सूची में हैं, जिनमें Zero Liquid Discharge यानी ZLD सिस्टम नहीं है।

Firecracker Manufacturing और Poultry Units को भी प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, Hatcheries को इससे अलग रखा गया है।

Residential Areas और Dark Zones पर भी पाबंदी

नीति में केवल विशिष्ट उद्योगों को ही नहीं, बल्कि उनके स्थान और पर्यावरणीय प्रभाव को भी ध्यान में रखा गया है।

Residential Areas में Trade Effluents या Air Emissions पैदा करने वाली इकाइयों पर भी प्रतिबंध लागू होंगे। इसके अलावा भूजल की कमी वाले ‘Dark Zones’ में उद्योगों को लेकर भी नीति में सख्त प्रावधान किए गए हैं।

सरकार के इन प्रावधानों का उद्देश्य वायु और जल प्रदूषण, भूजल पर दबाव और आवासीय क्षेत्रों में अनुपयुक्त औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े पर्यावरणीय जोखिमों को कम करना है।

Haryana में Industrial Pollution बना बड़ी चुनौती

पर्यावरण से जुड़े ये प्रावधान ऐसे समय में आए हैं जब हरियाणा के औद्योगिक प्रदूषण को लेकर लगातार निगरानी और सवाल उठते रहे हैं।

अरावली क्षेत्र में Stone Crushing और Mining गतिविधियां न्यायिक एवं नियामकीय जांच के दायरे में रही हैं। वहीं Dyeing, Tanning और Chemical Industries से जुड़े प्रदूषण और अपशिष्ट निस्तारण को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं।

हरियाणा State Pollution Control Board के 30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, NCR Haryana में 968 में से 956 औद्योगिक इकाइयों में Basic Air Pollution Control Devices उपलब्ध नहीं थे। यह आंकड़ा औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरणीय अनुपालन की चुनौती का संकेत देता है।

Incentive जारी करने से पहले होगी Independent Inspection

नई नीति का एक अहम पहलू सरकारी प्रोत्साहनों के वितरण की प्रक्रिया से जुड़ा है। उद्योग विभाग अब लाभ जारी करने से पहले Independent Third-Party Inspection कराने की योजना बना रहा है।

Additional Chief Secretary, Industries अमित अग्रवाल के अनुसार, सरकार केवल कागजी दस्तावेजों या Self-Declaration पर निर्भर नहीं रहना चाहती।

इस व्यवस्था के तहत औद्योगिक इकाइयों की वास्तविक स्थिति और पर्यावरणीय अनुपालन की स्वतंत्र जांच के बाद ही प्रोत्साहन जारी किए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

Key Highlights:

  • Haryana Progressive MSME & Export Promotion Policy 2026 को 8 अगस्त को अधिसूचित किया गया।
  • अगले पांच वर्षों में 55,000 करोड़ रुपये निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • नीति के तहत पांच लाख रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।
  • प्रदूषणकारी और पर्यावरण-संवेदनशील 16 श्रेणियों को Restrictive List में रखा गया है।
  • इन श्रेणियों की इकाइयों को सरकारी इंसेंटिव नहीं मिलेगा।
  • Stone Crushers, Tanneries, Smelters और कुछ Chemical Units समेत कई उद्योग प्रतिबंधित सूची में हैं।
  • ZLD सिस्टम के बिना कुछ Dyeing और Dye-Intermediate Units को भी इंसेंटिव नहीं मिलेगा।
  • Residential Areas में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक गतिविधियों पर रोक का प्रावधान है।
  • Groundwater-scarce Dark Zones में भी उद्योगों को लेकर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  • इंसेंटिव जारी करने से पहले Independent Third-Party Inspection की योजना है।
  • सरकार Self-Certification पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय भौतिक सत्यापन पर जोर दे रही है।

FAQ Section:

Haryana Progressive MSME & Export Promotion Policy 2026 कब अधिसूचित हुई?

हरियाणा की Progressive MSME & Export Promotion Policy 2026 को 8 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया गया।

नई MSME Policy का मुख्य लक्ष्य क्या है?

सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 55,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना और पांच लाख रोजगार के अवसर पैदा करना है।

कितनी श्रेणियों की इंडस्ट्रीज को इंसेंटिव से बाहर रखा गया है?

नई नीति में प्रदूषणकारी या पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील 16 श्रेणियों को Restrictive List में रखा गया है। इन इकाइयों को नीति के तहत प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।

क्या नई नीति में Pollution Control की जांच होगी?

हां। उद्योग विभाग प्रोत्साहन जारी करने से पहले Independent Third-Party Inspection की व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

क्या Self-Certification के आधार पर इंसेंटिव मिलेगा?

सरकार केवल कागजी दस्तावेजों और Self-Declaration पर निर्भर नहीं रहना चाहती। इंसेंटिव जारी करने से पहले स्वतंत्र भौतिक सत्यापन की व्यवस्था की योजना है।

Conclusion:

हरियाणा की Progressive MSME & Export Promotion Policy 2026 निवेश और रोजगार बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय अनुपालन को भी प्राथमिकता देती है। 16 प्रदूषणकारी या संवेदनशील औद्योगिक श्रेणियों को इंसेंटिव से बाहर रखने और लाभ जारी करने से पहले थर्ड-पार्टी निरीक्षण की योजना से सरकार ने संकेत दिया है कि औद्योगिक विस्तार के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को भी महत्व दिया जाएगा। आने वाले समय में इस नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश प्रोत्साहन और पर्यावरणीय अनुपालन के बीच संतुलन कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।Screenshot_825

Edited By: Atul Sharma

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