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हांसी हिंसा मामले में 10 किसान कार्यकर्ताओं को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, पुलिस ने 13 नामजद समेत 200 पर दर्ज किया केस
CM नायब सिंह सैनी के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हुआ था टकराव; छह पुलिसकर्मी समेत कई लोग घायल
हांसी में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में अदालत ने 10 किसान कार्यकर्ताओं को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने 13 नामजद प्रदर्शनकारियों और करीब 200 अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
हरियाणा के हांसी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में अदालत ने 10 किसान कार्यकर्ताओं को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नवनीत कौर के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजने के आदेश दिए गए।
यह टकराव उस समय हुआ, जब किसान और अन्य प्रदर्शनकारी डेयरी संचालक जीवन कुंडू की हत्या के कथित मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे।
10 किसान कार्यकर्ता न्यायिक हिरासत में भेजे गए
पुलिस ने जिन 10 किसान कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान शमशेर नंबरदार, सुरेंद्र, सुभाष चंद्र, सतपाल, सुरेश कोठ, सुमित, रणबीर, वजीर, जगमहेंद्र और सुलेंद्र के रूप में हुई है।पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नवनीत कौर ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
13 नामजद समेत करीब 200 लोगों पर केस
पुलिस के अनुसार, मामले में 13 प्रदर्शनकारियों को नामजद किया गया है, जबकि करीब 200 अन्य लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के अलावा राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 2 और 3 तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से रोकने संबंधी अधिनियम, 1984 की धारा 3 के तहत कार्रवाई की गई है।
मामले में गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, हमला, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े आरोप शामिल हैं।
झड़प में छह पुलिसकर्मी घायल
हांसी में हुई झड़प के दौरान छह पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें हांसी के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार भी शामिल हैं। SP को कलाई में मामूली चोट आई और उन्हें हाथ पर पट्टी बांधे हुए देखा गया।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से कथित तौर पर पथराव किया गया, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
सोशल मीडिया वीडियो से भी उठा विवाद
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में कथित तौर पर SP विनोद कुमार कुछ पुलिसकर्मियों के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर पत्थर फेंकते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में भी नजर आने का दावा किया गया है।
हालांकि, SP ने बाद में कहा कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया जा रहा था और पुलिस ने उन्हें दूर रखने तथा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जवाबी कार्रवाई की।
जीवन कुंडू हत्याकांड को लेकर प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का विरोध करने का ऐलान किया था। उनकी मुख्य मांग डेयरी संचालक जीवन कुंडू की हत्या के कथित मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी थी।
प्रदर्शनकारी शहर के कई स्थानों पर एकत्र हुए और सरकारी कॉलेज की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जहां मुख्यमंत्री का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था।
कई प्रदर्शनकारी ट्रैक्टरों और पैदल कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस द्वारा उन्हें रोके जाने के बाद कथित तौर पर पथराव हुआ, जिसके बाद लाठीचार्ज किया गया।
बाद में सरकारी कॉलेज परिसर को पुलिस ने घेर लिया और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम बिना किसी अन्य व्यवधान के संपन्न हो गया।
विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
हांसी में हुई पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों को लेकर विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने प्रदर्शन स्थल का दौरा कर मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
सैलजा ने कहा कि लोकतंत्र में न्याय की मांग कर रहे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच के साथ प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की मांग की।
Key Highlights:
- हांसी की अदालत ने 10 किसान कार्यकर्ताओं को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
- सभी आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नवनीत कौर के समक्ष पेश किया गया।
- गिरफ्तार आरोपियों में शमशेर नंबरदार, सुरेंद्र, सुभाष चंद्र, सतपाल, सुरेश कोठ, सुमित, रणबीर, वजीर, जगमहेंद्र और सुलेंद्र शामिल हैं।
- पुलिस ने 13 नामजद प्रदर्शनकारियों और करीब 200 अन्य लोगों पर केस दर्ज किया।
- आरोपों में गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, हमला और सरकारी काम में बाधा शामिल हैं।
- राष्ट्रीय सम्मान और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई।
- झड़प में छह पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें हांसी SP विनोद कुमार भी शामिल हैं।
- प्रदर्शनकारी जीवन कुंडू हत्याकांड के कथित मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।
- पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने से रोका था।
- कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
FAQ Section:
हांसी मामले में कितने किसान कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया?
पुलिस ने 10 किसान कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है, जिन्हें अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
हांसी में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प क्यों हुई?
प्रदर्शनकारी जीवन कुंडू हत्याकांड के कथित मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद झड़प हुई।
पुलिस ने कितने लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है?
पुलिस ने 13 प्रदर्शनकारियों को नामजद किया है और करीब 200 अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।
झड़प में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए?
पुलिस के अनुसार, छह पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें हांसी SP विनोद कुमार भी शामिल हैं।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या थी?
प्रदर्शनकारी डेयरी संचालक जीवन कुंडू की हत्या के कथित मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।
कुमारी सैलजा ने क्या मांग की?
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने पुलिस कार्रवाई की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
Conclusion:
हांसी में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान हुई पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बड़ा मुद्दा बन गई है। अदालत ने 10 किसान कार्यकर्ताओं को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि पुलिस ने करीब 200 अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। दूसरी ओर, विपक्ष और किसान संगठन पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
