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हिमाचल विधानसभा में सियासी तकरार तेज, जयराम ठाकुर का सरकार पर तीखा हमला
राज्यपाल अभिभाषण पर बहस में कांग्रेस सरकार घिरी, CM सुक्खू ने वित्तीय संकट का दिया हवाला
हिमाचल विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरा और CM सुक्खू ने जवाब दिया।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वित्तीय चुनौतियों और केंद्र से कम समर्थन का हवाला देते हुए अपनी सरकार का बचाव किया।
बहस की शुरुआत करते हुए जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्यपाल का अभिभाषण, जो केवल दो मिनट से थोड़ा अधिक समय का था, वर्तमान सरकार की उपलब्धियों की कमी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राज्यभर में विकास कार्य ठप पड़े हैं और युवा, महिलाएं तथा सरकारी कर्मचारी असंतोष के चलते सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस की चुनावी गारंटियों, विशेषकर महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के वादे, पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 35,000 से अधिक महिलाओं को लाभ देने के लिए 1,500 करोड़ रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक केवल 7.43 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं, जो अधूरे वादों का स्पष्ट उदाहरण है।
राज्य की वित्तीय और प्रशासनिक स्थिति पर चिंता जताते हुए ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) की संपत्तियों को लीज पर देकर “बेचा” जा रहा है। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, भर्तियों की कमी और 1,000 से अधिक संस्थानों को बंद करने के आरोप भी लगाए। साथ ही, हिमकेयर योजना के तहत भुगतान में देरी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था ठप हो गई है।
ठाकुर ने यह भी कहा कि केंद्र से पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलने के बावजूद राज्य सरकार उसे स्वीकार नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं वित्त मंत्री और गृह मंत्री सहित केंद्रीय मंत्रियों से राज्य के लिए अतिरिक्त सहायता की मांग की थी।
हाल ही में लिए गए प्रशासनिक फैसलों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सलाहकारों और बोर्ड-निगमों के प्रमुखों से कैबिनेट रैंक वापस लेना केवल दिखावटी कदम है और वास्तविक सुधार के लिए उन्हें पदों से हटाना जरूरी है।
