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SIR विवाद पर कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला का बयान, चुनावी रोल में नाम हटने और पारदर्शिता पर उठाए सवाल
अमृतसर सांसद ने कहा- विपक्ष लंबे समय से डुप्लीकेट वोट और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के मुद्दे उठाता रहा है
SIR विवाद को लेकर अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में 2023 में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया।
SIR विवाद पर गुरजीत सिंह औजला की प्रतिक्रिया
SIR विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने, डुप्लीकेट वोट और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाता रहा है।
औजला के अनुसार, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कथित तौर पर उठाई गई आपत्तियों के बाद विपक्ष द्वारा पहले से उठाए जा रहे ये मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आए हैं।मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल
औजला ने कहा कि विपक्ष सार्वजनिक मंचों पर लंबे समय से मतदाता सूचियों में संभावित गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करता रहा है।
उन्होंने कहा कि SIR विवाद के बीच चुनावी प्रक्रिया से संबंधित इन मुद्दों पर दोबारा चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, इन दावों और आपत्तियों से जुड़े तथ्यों का निर्धारण संबंधित आधिकारिक प्रक्रिया और जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
2023 के कानून का भी किया जिक्र
कांग्रेस सांसद ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित नया कानून पेश किया था।
औजला ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान है।
चयन समिति की संरचना पर उठाया सवाल
औजला के अनुसार, चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि तीन सदस्यीय समिति में सरकार से जुड़े दो प्रतिनिधियों की मौजूदगी से विपक्ष के सदस्य की भूमिका कितनी प्रभावी रह जाती है।
औजला ने कहा कि विपक्ष इसी वजह से नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार और विपक्ष के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठाता रहा है।
Key Highlights:
- SIR विवाद पर अमृतसर सांसद गुरजीत सिंह औजला ने प्रतिक्रिया दी।
- औजला ने मतदाता सूची से नाम हटने और डुप्लीकेट वोट के मुद्दे उठाए।
- उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।
- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून का उल्लेख किया।
- चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होने की बात कही।
- औजला ने चयन समिति में सरकार और विपक्ष के प्रतिनिधित्व के संतुलन पर सवाल उठाया।
FAQ Section:
SIR विवाद पर गुरजीत सिंह औजला ने क्या कहा?
औजला ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने, डुप्लीकेट वोट और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठाता रहा है।
औजला ने किन चुनावी मुद्दों का उल्लेख किया?
उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटने, डुप्लीकेट वोट और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया।
2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित क्या बदलाव हुआ?
2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित कानून लाया गया था।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कौन शामिल होते हैं?
औजला द्वारा बताए गए प्रावधान के अनुसार चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
औजला ने चयन समिति को लेकर क्या सवाल उठाया?
उन्होंने सवाल किया कि तीन सदस्यीय समिति में सरकार से जुड़े दो प्रतिनिधियों की मौजूदगी से विपक्ष के सदस्य की भूमिका और प्रभाव कितना रह जाता है।
Conclusion:
SIR विवाद के बीच कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने मतदाता सूचियों, डुप्लीकेट वोट और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े विपक्ष के पुराने सवालों को दोहराया। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और 2023 के कानून के तहत गठित चयन समिति की संरचना पर भी सवाल उठाए। उनके बयान से चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर सामने आई है।
