Malerkotla की साइबर पुलिस ने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर उकसाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में यूएपीए (UAPA) के एक आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत **Bharatiya Nyaya Sanhita (बीएनएस) और Information Technology Act के तहत एफआईआर दर्ज की है।
साइबर क्राइम सेल और सीआईए विंग की संयुक्त जांच टीम डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है ताकि गिरोह के अन्य संभावित साथियों की पहचान की जा सके।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों को गिरफ्तार कर ‘जिहाद’ के नाम पर कुछ लोगों की हत्या कर दहशत फैलाने की साजिश को भी विफल कर दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
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Farhan Anjum (लोहारा मालेर)
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Adnan Khan (सेखां वाला, मलेरकोटला)
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Waris Ali (मंडियाला)
जांच के दौरान आरोपियों के पास से .32 बोर की एक पिस्तौल, तीन कारतूस और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए।
पुलिस के अनुसार 5 मार्च को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में बीएनएस की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपियों पर देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने, आपराधिक धमकी देने और हत्या के प्रयास से संबंधित गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है।
मामले की जानकारी देते हुए Gagan Ajit Singh, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), मलेरकोटला ने बताया कि पुलिस टीम ने एसपी (एच) Gursharan Singh Sandhu, सीआईए प्रभारी Harjinder Singh और साइबर सेल के एसएचओ Manjot Singh के नेतृत्व में जांच करते हुए इस गिरोह के सरगना की पहचान की।
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी Farhan Anjum युवाओं को पाकिस्तानी इस्लामी विद्वान और वक्ता Dr Israr Ahmed तथा अहले हदीस के विद्वान Molana Yusuf Pasrori के भाषण सुनने के लिए प्रेरित कर सांप्रदायिक नफरत फैलाने की कोशिश कर रहा था।
पुलिस के अनुसार आरोपियों को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति की हत्या की साजिश रच रहे थे, ताकि दहशत फैलाई जा सके और उन्हें बदनामी के जरिए पहचान मिल सके।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को दुबई से फंडिंग मिली थी।
हालांकि पुलिस ने अभी तक जांच के पूरे विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं। सूत्रों के अनुसार आरोपियों के संभावित निशानों में दिल्ली का एक हिंदू कट्टरपंथी नेता भी शामिल था।
एसएसपी ने कहा कि पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं कि आरोपी मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे थे और देश की संप्रभुता के लिए खतरा बन रहे थे, लेकिन फिलहाल अधिक जानकारी सार्वजनिक करने से जांच प्रभावित हो सकती है।
