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हिमाचल एंट्री टैक्स के खिलाफ आंदोलन को Kuldeep Singh Gargaj का समर्थन
जत्थेदार ने टैक्स को “जजिया” जैसा बताया, तुरंत खत्म करने की मांग; 2 मई से आंदोलन तेज होने की चेतावनी
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने हिमाचल प्रदेश के एंट्री टैक्स के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने इस टैक्स को धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताते हुए इसे तुरंत समाप्त करने की मांग की।
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने आज हिमाचल प्रदेश के एंट्री टैक्स के खिलाफ आंदोलन कर रही संघर्ष समिति को अपना समर्थन दिया। समिति के सदस्यों से मुलाकात के बाद जत्थेदार ने इस टैक्स की कड़ी निंदा की और इसे “जजिया” के समान बताते हुए इसे तुरंत समाप्त करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि पंजाब के धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं पर यह टैक्स लगाना एक अन्यायपूर्ण बोझ है। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि धार्मिक भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
किरतपुर साहिब में आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि श्रद्धालु दूर-दूर से श्रद्धा के साथ गुरुद्वारों में मत्था टेकने आते हैं और उन पर इस प्रकार का टैक्स लगाना बेहद निंदनीय है।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगल शासन के दौरान लगाया गया “जजिया टैक्स” भी धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण माना जाता था, और वर्तमान स्थिति लोगों में वैसी ही चिंताएं पैदा कर रही है।
जत्थेदार ने सभी सरकारों से अपील की कि वे बिना देरी किए हस्तक्षेप करें और इस एंट्री टैक्स को समाप्त करें ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।
उन्होंने चल रहे आंदोलन को वैध बताते हुए कहा कि इसकी सफलता के लिए जनता का और अधिक समर्थन जरूरी है।
🚜 2 मई से आंदोलन होगा तेज
इस बीच, हिमाचल एंट्री टैक्स के खिलाफ आंदोलन और तेज होने जा रहा है। किसान संगठनों और विरोध समूहों ने 2 मई से नए सिरे से प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
संघर्ष समिति, जिसका नेतृत्व Kirti Kisan Morcha कर रहा है, ने घोषणा की कि 2 मई से किरतपुर साहिब–मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हिमाचल जाने वाले वाहनों के लिए एंट्री टैक्स बैरियर को टोल-फ्री कर दिया जाएगा।
यह फैसला नूरपुर बेदी के पास मुन्ने गांव में हुई बैठक के बाद लिया गया, जहां नेताओं ने कहा कि आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है।
नेताओं ने “अन्यायपूर्ण और अवैध” बताए जा रहे इस टैक्स को हटाने की मांग दोहराई और एक ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई टोल वसूली का विरोध किया, इसे यात्रियों पर दोहरा बोझ बताया।
🚫 राजनीतिक नेताओं को मंच नहीं मिलेगा
प्रदर्शनकारियों ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा कि न तो सत्तारूढ़ और न ही विपक्षी दलों के किसी भी राजनीतिक नेता को मंच से संबोधित करने की अनुमति दी जाएगी, हालांकि वे आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।
⚠️ सरकारों पर उठे सवाल
किसान नेताओं ने पंजाब सरकार की निष्क्रियता की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि वह राज्य के लोगों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल जाने वाले वाहनों पर समान टैक्स न होने के कारण पड़ोसी राज्य को एकतरफा नीति जारी रखने का मौका मिल रहा है।
Veer Singh Badwa और Gaurav Rana ने कहा कि National Highways Authority of India (NHAI) कई बार निवेदन के बावजूद इस मुद्दे को हिमाचल सरकार के साथ हल करने में विफल रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो हिमाचल और पंजाब दोनों सरकारों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
