Bhupender Yadav ने मंगलवार को Ashok Gehlot पर Aravalli Range में अवैध खनन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
यादव ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान अवैध खनन की घटनाएं इतनी बढ़ गई थीं कि उसी के आधार पर Supreme Court of India को अरावली को लेकर निर्देश जारी करने पड़े।
उन्होंने कहा,
“2012 में जब गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार राजस्थान में अवैध खनन करा रही थी, तब मैंने उस समय भी यह मुद्दा उठाया था। यह संसद के रिकॉर्ड में दर्ज है। गहलोत सरकार के दौरान अरावली में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा था, जिसके कारण इस मामले में याचिकाएं दाखिल की गईं और सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया।”
यादव ने बताया कि अरावली क्षेत्र में चार टाइगर रिजर्व और 18 वन्यजीव अभयारण्य हैं और सरकार वहां इको-सेंसिटिव ज़ोन को अंतिम रूप देने पर काम कर रही है।
इस दौरान संसद में विवाद भी देखने को मिला। Jairam Ramesh ने यादव पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और उनसे माफी मांगने की मांग की। इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस सांसद Pramod Tiwari ने भी आरोप लगाया कि मंत्री ने कांग्रेस नेता Neeraj Dangi के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
यादव ने यह भी कहा कि Supreme Court of India ने केंद्र सरकार के अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट की सराहना की है।
उन्होंने बताया कि फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय से विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा था, जो अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की स्पष्ट परिभाषा तय करेंगे।
इसके अलावा मंत्री ने कहा कि सरकार ने Great Nicobar Island से जुड़े मुद्दों पर भी अदालत में जवाब दाखिल किया है।
यादव ने यह भी बताया कि सरकार टाइगर रिजर्व के बाहर भी बाघों की सुरक्षा बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विशेष क्षेत्रों की पहचान कर रही है।
