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पशु चिकित्सकों को एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस रोकने पर प्रशिक्षण
गुरु अंगद देव वेटरनरी यूनिवर्सिटी में ‘वन हेल्थ’ को बढ़ावा देने के लिए दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित
गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी में पशु चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग और वन हेल्थ अवधारणा पर जोर दिया गया।
Guru Angad Dev Veterinary and Animal Sciences University के Centre for One Health ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को नियंत्रित करने और वन हेल्थ अवधारणा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पशु चिकित्सकों के लिए दो दिवसीय क्षमता-विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
अधिकारियों के अनुसार, यह प्रशिक्षण Department of Animal Husbandry Punjab के अंतर्गत कार्यरत पशु चिकित्सा अधिकारियों के लिए आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम Asian Development Bank (ADB) और Zenex द्वारा वित्तपोषित परियोजना के तहत आयोजित किया गया।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए Jasbir Singh Bedi, निदेशक, सेंटर फॉर वन हेल्थ ने कहा कि पशु चिकित्सा पेशेवर पशुओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे प्रतिरोधी रोगजनकों (रेजिस्टेंट पैथोजेन्स) के उभरने और फैलने को रोका जा सके जो पशुओं के साथ-साथ मनुष्यों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
कार्यक्रम की आयोजन सचिव Deepali Kalambhe ने प्रतिभागियों को प्रमुख जूनोटिक रोगों के बारे में जानकारी दी। ये वे बीमारियां हैं जो पशुओं से मनुष्यों में फैलती हैं।
उन्होंने इन रोगों की रोकथाम और नियंत्रण रणनीतियों पर भी चर्चा की और कहा कि पशु चिकित्सा पेशेवरों के बीच जल्दी पहचान, निगरानी और जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि ऐसे संक्रमणों के प्रसार को समय रहते रोका जा सके।
