भारत-इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर पहली दौर की वार्ता शुरू

पीएम मोदी के इजरायल दौरे के साथ वार्ता का आगाज़, रक्षा व हाई-टेक सहयोग पर भी जोर

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भारत और इजरायल ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर औपचारिक बातचीत का पहला दौर शुरू किया है। यह वार्ता प्रधानमंत्री Narendra Modi की इजरायल यात्रा के साथ शुरू हुई है।

भारत और Israel के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर पहली दौर की वार्ता शुरू हो गई है। यह पहल प्रधानमंत्री Narendra Modi की 25 फरवरी से शुरू हुई दो दिवसीय इजरायल यात्रा के साथ मेल खाती है।

नई दिल्ली में 25-26 फरवरी तक चलने वाली इस वार्ता से पहले नवंबर 2025 में ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को गहरा करने के लिए संरचित बातचीत का ढांचा तय किया।

वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल माल व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित एफटीए से विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अधिक स्थिरता और पूर्वानुमेयता मिलेगी। साथ ही हाई-टेक, कृषि और सेवा क्षेत्रों में पूरक क्षमताओं का लाभ उठाकर व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी।

दोनों पक्षों की तकनीकी टीमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, मूल नियम (Rules of Origin), स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, कस्टम प्रक्रियाएं, व्यापार सुगमता और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रही हैं।

वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा के साथ यह वार्ता शुरू होना उपयुक्त समय है। उन्होंने नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला और कहा कि एफटीए से इन क्षेत्रों का पूरा लाभ उठाया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इस दौरान भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, जल प्रबंधन तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से भी मुलाकात करेंगे।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग वार्ता के प्रमुख विषयों में शामिल होंगे। उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली, ड्रोन और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के संयुक्त विकास एवं सह-उत्पादन पर भी चर्चा होगी।

यह यात्रा पश्चिम एशिया में जारी क्षेत्रीय तनाव के बीच हो रही है। हालांकि, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास तनाव कम करने की दिशा में जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत की यह पहल उसकी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति को दर्शाती है—जिसके तहत वह इजरायल और अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य देशों से भी संवाद बनाए रखता है।Screenshot_1507

Edited By: Karan Singh

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