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कोयले की बढ़ती कीमतों से ईंट-भट्ठा उद्योग संकट में
फतेहाबाद में उत्पादन लागत बढ़ी, भट्ठे बंद होने का खतरा, निर्माण कार्य हो सकता है महंगा
फतेहाबाद जिले में कोयले की कीमतों में भारी वृद्धि और सप्लाई में बाधा के कारण ईंट-भट्ठा उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है।
फतेहाबाद जिले में ईंट-भट्ठा उद्योग इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। सप्लाई चेन में बाधा और कोयले की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो कई भट्ठों के बंद होने का खतरा है, जिससे निर्माण कार्य महंगा हो सकता है।
इस मुद्दे पर जिला स्तरीय ईंट-भट्ठा एसोसिएशन की बैठक गुरुवार को भुना स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष महेश कुमार ने की। इस बैठक में जिले भर के भट्ठा संचालकों और व्यापारियों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं रखीं।
बैठक में महेश शर्मा ने कहा कि कोयले की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने उद्योग पर भारी दबाव डाल दिया है। फरवरी में लगभग ₹13,000 प्रति टन मिलने वाला कोयला अब करीब ₹18,000 प्रति टन हो गया है। इसके अलावा 18 प्रतिशत जीएसटी और लगभग ₹3,400 प्रति टन परिवहन शुल्क के कारण उत्पादन लागत और बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत के कारण भट्ठा संचालकों का बजट बिगड़ गया है और कुछ को घाटे में काम करना पड़ रहा है। यदि कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो कई भट्ठों का संचालन खतरे में पड़ सकता है।
बैठक में उपस्थित लोगों ने यह भी बताया कि कोयले पर जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किए जाने और बाजार में कथित एकाधिकार के कारण कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। उन्होंने बाजार में पारदर्शिता की कमी की भी आलोचना की, जिससे संचालकों को मनमाने दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
भट्ठा मालिकों ने चेतावनी दी कि यदि कोयले की कीमतों और कालाबाजारी पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया, तो ईंटों की कीमत बढ़ेगी, जिससे मकान निर्माण महंगा हो जाएगा और निर्माण गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं।
