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दूध और डेयरी उत्पादों के फेल सैंपलों पर लोगों में नाराजगी, सख्त कार्रवाई की मांग
दो वर्षों में 211 सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल, पनीर और देसी घी में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
जिले में दूध और उससे बने उत्पादों के लगातार फेल हो रहे सैंपलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। निवासियों ने खाद्य सुरक्षा विभाग से दोषी विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द करने और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जिले में दूध और उससे बने उत्पादों के सैंपल लगातार गुणवत्ता जांच में फेल होने के बाद लोगों ने दोषी खाद्य कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में दूध और उससे बने विभिन्न उत्पादों के 211 सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए और उन्हें “घटिया स्तर” का घोषित किया गया। इससे जिले के बाजारों में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
इस अवधि में दूध, दही, पनीर, देसी घी और लस्सी सहित कुल 1,220 सैंपलों की जांच की गई।स्थानीय लोगों ने खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जिसमें उनके लाइसेंस रद्द करना भी शामिल हो।
आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 71 पनीर के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए। इसके बाद देसी घी का स्थान रहा, जिसके 27 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे।
लोगों में नाराजगी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषी दुकानदारों के लाइसेंस भी रद्द किए जाने चाहिए।
स्थानीय निवासी Amarbir Kaur ने बताया कि नकली पनीर खाने से उनके परिवार को फूड पॉइजनिंग का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने कहा,
“सिर्फ जुर्माना लगाने से काम नहीं चलेगा। ऐसे विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द होने चाहिए। तभी दूसरे लोग खाद्य सुरक्षा को गंभीरता से लेंगे।”
कई अन्य लोगों ने भी स्वास्थ्य विभाग से डेयरी यूनिटों और मिठाई की दुकानों पर बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाने की मांग की। उनका कहना है कि दूध और पनीर जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में मिलावट सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
एक अन्य निवासी ने कहा,
“ये आंकड़े दिखाते हैं कि मिलावट कोई अलग-थलग समस्या नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती हुई समस्या है। अब सख्त और डर पैदा करने वाली कार्रवाई की जरूरत है।”
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी Ashish Chawla ने बताया कि विभाग ने कई स्तरों पर कार्रवाई की रणनीति अपनाई है।
उन्होंने कहा,
“दूध उत्पादों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। अस्वच्छ परिस्थितियों में काम करने वाले विक्रेताओं के मौके पर चालान काटे जाते हैं। घटिया खाद्य पदार्थों के मामलों को अतिरिक्त उपायुक्त की अदालत में भेजा जाता है, जहां 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।”
उन्होंने आगे बताया कि यदि कोई सैंपल मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त घोषित होता है, तो मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में भेजा जाता है, जहां 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और छह महीने तक की सजा हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग मोबाइल फूड टेस्टिंग कार्यक्रम भी चला रहा है।
12 दूध के सैंपल लिए गए
स्थानीय खाद्य सुरक्षा टीम ने शुक्रवार को विशेष प्रवर्तन अभियान चलाते हुए दूध के 12 सैंपल एकत्र किए।
अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान जिले में सुबह और शाम के समय दूध की सप्लाई की निगरानी के लिए चलाया गया।
डॉ. चावला ने बताया कि शहर के विभिन्न प्रवेश मार्गों पर नाके लगाए गए और दूध की सप्लाई की गहन जांच की गई।
उन्होंने कहा कि सुबह के समय खुले दूध के चार सैंपल लिए गए, जबकि आठ अन्य सैंपल भी जांच के लिए एकत्र किए गए।


