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Chalo Amritsar Campaign के तहत अमृतसर की बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति पर उठी चिंता
450वें स्थापना दिवस से पहले स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की मांग तेज, महिलाओं ने संभाला मोर्चा
साल 2027 में अमृतसर की 450वीं स्थापना वर्षगांठ से पहले शहर की बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। “चलो अमृतसर” अभियान के तहत विभिन्न सामाजिक और पर्यावरण संगठनों ने शहर को स्वच्छ और टिकाऊ बनाने की मांग उठाई है।
साल 2027 में Amritsar अपनी 450वीं स्थापना वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में चौथे सिख गुरु Guru Ram Das द्वारा 1577 में बसाए गए इस पवित्र शहर की बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
Golden Temple (दरबार साहिब) के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध अमृतसर आज कचरा प्रबंधन और स्वच्छता संकट से जूझ रहा है, जो इसकी विरासत और आध्यात्मिक पवित्रता दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है।
शासन-प्रशासन से जवाबदेही और नागरिकों से अधिक जिम्मेदारी की मांग को लेकर पंजाब भर की महिलाओं ने Chalo Amritsar Campaign के बैनर तले एकजुट होकर शहर में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ शहरी प्रबंधन की मांग उठाई है।शुक्रवार को बढ़ते पर्यावरणीय संकट पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में Kuldeep Singh Gargaj, पूर्व कैबिनेट मंत्री Bikramjit Singh Majithia, अमृतसर के मेयर Jatinder Singh Moti Bhatia, Khalsa University के वाइस चांसलर Mehal Singh और Punjab Pollution Control Board की अध्यक्ष Reena Gupta मौजूद रहे।
‘Between Reverence and Reality’ डॉक्यूमेंट्री ने दिखाई हकीकत
“Between Reverence and Reality” नामक डॉक्यूमेंट्री पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्रों द्वारा तैयार की गई है। इसमें अमृतसर के पुराने दीवारबंद शहर में बढ़ते पर्यावरण संकट और प्रदूषण के कारण शहर की आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक पहचान पर पड़ रहे प्रभाव को दर्शाया गया है।
यह अभियान Samita Kaur के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। इसमें Indu Aurora, Swaranjit Kaur, Amrita Rana, Simarpreet Sandhu, Bhushan Malik, Ritu Malhan, Damanjeet Kaur और Shweta Mehra जैसे कई प्रमुख लोग शामिल हैं।
इनसे जुड़े संगठन हैं:
- Voice of Amritsar
- OTT Foundation
- Earthy Instincts
- Green Thumb
शहर की गरिमा बहाल करने की मांग
समिता कौर ने कहा,
“इस अभियान का उद्देश्य गुरु राम दास द्वारा कल्पित उस शहर की गरिमा और पवित्रता को पुनर्स्थापित करना है, जो कभी अपने वेटलैंड्स, बागों और प्राकृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता था।”
उन्होंने मांग की कि:
- वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरा प्रबंधन लागू किया जाए
- पर्यावरणीय पुनर्स्थापन किया जाए
- कचरे की अलग-अलग श्रेणियों में सख्ती से छंटाई लागू हो
- पवित्र शहर और उसके आसपास सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
‘सेवा, सिदक और सिखी साथ-साथ’
Kuldeep Singh Gargaj ने सामुदायिक जागरूकता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा,
“हमारे पवित्र स्थलों को कूड़े के ढेरों के नीचे दबने नहीं दिया जा सकता। यह हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह समझे कि सेवा, सिदक और सिखी एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।”
उन्होंने कहा कि 450वें स्थापना समारोह से पहले विशेषकर पुराने दीवारबंद शहर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। साथ ही सरकार को भी कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
वायु प्रदूषण पर भी चिंता
Harwinder Singh ने कहा कि अमृतसर की खराब होती वायु गुणवत्ता केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और शहर की पहचान से जुड़ा गंभीर संकट बन चुकी है।


