Maharshi Dayanand University की 304वीं कार्यकारी परिषद बैठक पर विवाद, सरकार और कुलपति के बीच मतभेद उभरे

शिक्षकों की नियुक्ति और बैठक स्थगन के निर्देशों को लेकर टकराव; राज्यपाल को करना पड़ा हस्तक्षेप

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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय की 304वीं कार्यकारी परिषद बैठक ने राज्यभर में चर्चा छेड़ दी है। शिक्षकों की नियुक्तियों की पुष्टि, सरकार के निर्देशों और बैठक स्थगन के मुद्दे पर राज्य सरकार और कुलपति प्रो. राजबीर सिंह के बीच मतभेद सामने आए हैं।

बुधवार को हुई Maharshi Dayanand University (MDU) की 304वीं कार्यकारी परिषद (EC) बैठक ने राज्य स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। इस घटनाक्रम ने राज्य सरकार और कुलपति Rajbir Singh के बीच कथित “मतभेदों” को उजागर कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार विवाद का केंद्र एजेंडा से जुड़े मुद्दे हैं, जिनमें पिछले महीने हुई EC बैठक की कार्यवाही की पुष्टि शामिल है। उस बैठक में 11 शिक्षकों की नियुक्तियों को मंजूरी दी गई थी। बताया जाता है कि वह बैठक राज्य सरकार की पुनर्निर्धारण की सलाह के बावजूद आयोजित की गई थी।

सूत्रों ने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि 14 जनवरी को राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया था कि जब तक अंतिम निर्णय न हो जाए, तब तक बिना पूर्व अनुमति कोई नियुक्ति आदेश जारी न किए जाएं और न ही नए जॉइनिंग की अनुमति दी जाए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने विभिन्न विभागों में चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए 302वीं EC बैठक की कार्यवाही की पुष्टि आवश्यक थी, जिसे 304वीं EC बैठक के एजेंडा में रखा गया, जिससे मामला विवादास्पद बन गया।”

हालांकि, MDU के एक अधिकारी ने दावा किया कि EC के किसी सदस्य ने नियुक्तियों की स्वीकृति पर आपत्ति नहीं जताई, इसलिए पुष्टि मात्र औपचारिक प्रक्रिया थी।

बताया जाता है कि इस घटनाक्रम से सरकार और विश्वविद्यालय के बीच मतभेद और गहरे हो गए। 304वीं EC बैठक से एक दिन पहले, 17 फरवरी को, राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय को अगली सूचना तक बैठक स्थगित करने का निर्देश दिया था। उल्लेखनीय है कि यह बैठक प्रो. राजबीर सिंह के दूसरे तीन वर्षीय कार्यकाल की समाप्ति से ठीक दो दिन पहले निर्धारित थी।

एक संकाय सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जबकि राज्य सरकार ने अभी तक इन नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय नहीं लिया था, विश्वविद्यालय प्रशासन पिछली EC बैठक की कार्यवाही की पुष्टि कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध था। इससे टकराव जैसी स्थिति बन गई और राज्यपाल कार्यालय को हस्तक्षेप करना पड़ा।”

उन्होंने बताया कि इस विवाद के चलते रजिस्ट्रार Krishan Kant को निलंबित कर दिया गया था। बताया जाता है कि उन्होंने सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए EC सदस्यों से बैठक में शामिल न होने की अपील की थी। हालांकि, राज्यपाल ने 12 घंटे के भीतर उनका निलंबन रद्द कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, 304वीं EC बैठक के एजेंडा में कई शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पदोन्नति मामलों को भी शामिल किया गया था। इसके अलावा, कथित रूप से प्रशासन-विरोधी समूह से जुड़े कुछ संकाय सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी चर्चा प्रस्तावित थी।

बैठक का समय, उसका एजेंडा, सरकार के निर्देशों के कथित उल्लंघन और राज्यपाल के हस्तक्षेप जैसे मुद्दे राज्यभर के शैक्षणिक हलकों में गहन चर्चा का विषय बने हुए हैं।

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए MDU के जनसंपर्क निदेशक प्रो. आशीष दहिया ने स्पष्ट किया कि EC बैठक विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत कुलपति को प्राप्त वैधानिक अधिकारों के अनुसार बुलाई गई थी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर किसी प्राधिकरण की अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था और विश्वविद्यालय ने अपनी वैधानिक स्वायत्तता के आलोक में मामले की समीक्षा करने के बाद ही आगे कदम बढ़ाया।Screenshot_1352

Edited By: Karan Singh

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