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3 महीने बाद खत्म हुआ किसानों का धरना: सर्विस लेन निर्माण को मंजूरी मिलने पर BKU ने लिया फैसला
पूर्वी बाईपास पर दोनों ओर सर्विस लेन बनेगी, केंद्र और NHAI ने दी स्वीकृति
Bharatiya Kisan Union (BKU) के किसानों ने करीब तीन महीने से चल रहा धरना समाप्त कर दिया है। यह फैसला सर्विस लेन निर्माण को मंजूरी मिलने के बाद लिया गया।
Bharatiya Kisan Union (BKU) के बैनर तले किसानों ने लगभग तीन महीने से चल रहा अपना धरना समाप्त कर दिया है। यह फैसला हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष Harvinder Kalyan द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद लिया गया कि केंद्रीय मंत्रालय और National Highways Authority of India (NHAI) ने मेरठ रोड से रसूलपुर गांव के बीच पूर्वी बाईपास के दोनों ओर सर्विस लेन बनाने को मंजूरी दे दी है।
🚜 धरने की पृष्ठभूमि
किसानों ने 6 फरवरी से निर्माणाधीन पूर्वी बाईपास के पास धरना शुरू किया था और निर्माण कार्य रोक दिया था।
🏛️ बैठक और समाधान
बुधवार को करनाल कोऑपरेटिव शुगर मिल के रेस्ट हाउस में किसानों के साथ लंबी बैठक के दौरान Harvinder Kalyan ने बताया कि सर्विस लेन के लिए भूमि अधिग्रहण जल्द शुरू होगा, हालांकि इसमें कुछ समय लगेगा।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को उन्होंने करनाल सांसद और केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar के समक्ष उठाया, जिन्होंने इसे केंद्र सरकार तक पहुंचाया।
पहले रिटेनिंग वॉल बनाने का विकल्प था, लेकिन NHAI की नीति के तहत यह संभव नहीं था। अब जमीन अधिग्रहण कर सर्विस लेन बनाने का विकल्प मंजूर किया गया है।
🛣️ परियोजना का महत्व
यह परियोजना Bharatmala Pariyojana के तहत करनाल रिंग रोड का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य:
- NH-44 पर ट्रैफिक जाम कम करना
- कनेक्टिविटी सुधारना
- यात्रा समय घटाना
- आसपास के गांवों का विकास बढ़ाना
🤝 सरकार का समर्थन
Harvinder Kalyan ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने में केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar और मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
🗣️ प्रशासन और किसानों की प्रतिक्रिया
उपायुक्त Dr Anand Kumar Sharma ने आश्वासन दिया कि प्रशासन NHAI के साथ मिलकर परियोजना को समय पर पूरा करेगा।
वहीं BKU के प्रदेश अध्यक्ष Rattan Singh Mann ने सरकार का धन्यवाद किया और कहा कि संगठन विकास के पक्ष में है, लेकिन किसानों के हित सर्वोपरि हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल धरना स्थगित किया गया है, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने पर इसे फिर से शुरू किया जा सकता है।
🧩 निष्कर्ष
यह फैसला किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत से निकले समाधान का उदाहरण है, जिसमें विकास और किसान हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
