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नूंह की किसान की बेटी मुस्कान थाईलैंड में खेलेगी अंतरराष्ट्रीय पिट्ठू चैंपियनशिप, भारतीय टीम में हुआ चयन
मेवात के बिवां गांव की रहने वाली मुस्कान ने अपने हुनर से हासिल की पहचान, 2 से 6 दिसंबर तक पटाया में होने वाली प्रतियोगिता में सीनियर मिक्स्ड कैटेगरी में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व
हरियाणा के नूंह जिले के बिवां गांव की मुस्कान का चयन भारतीय पिट्ठू टीम में हुआ है। एक किसान की बेटी मुस्कान थाईलैंड के पटाया में 2 से 6 दिसंबर तक होने वाली अंतरराष्ट्रीय पिट्ठू चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगी। कभी गलियों में दोस्तों के साथ खेला जाने वाला यह पारंपरिक खेल अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जा रहा है।
हरियाणा के नूंह जिले के मेवात क्षेत्र की बेटी मुस्कान ने अपनी मेहनत और खेल प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। छोटे किसान की बेटी और ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष की छात्रा मुस्कान का चयन भारतीय पिट्ठू टीम में हुआ है। वह थाईलैंड के पटाया में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय पिट्ठू चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
यह प्रतियोगिता 2 से 6 दिसंबर तक आयोजित होगी। मुस्कान सीनियर मिक्स्ड कैटेगरी में भारतीय टीम की ओर से खेलेंगी। पिट्ठू फेडरेशन ऑफ इंडिया के पत्र के अनुसार, उन्होंने इंदौर के सेंट नॉर्बर्ट स्कूल में आयोजित चयन प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा साबित कर टीम में जगह बनाई।
मुस्कान के चयन से बिवां गांव ही नहीं, बल्कि पूरे मेवात क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता उन लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखती हैं।
H2: गलियों में खेलते-खेलते अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं मुस्कान
पिट्ठू या सात पत्थरों का खेल मेवात के बच्चों के लिए नया नहीं है। मुस्कान ने भी बचपन से ही गांव की गलियों में दोस्तों के साथ यह खेल खेला। खास बात यह रही कि उन्होंने स्कूल के बाद भी खेलना जारी रखा और कॉलेज में पढ़ाई के दौरान भी अपनी रुचि बनाए रखी।
मुस्कान को हरियाणा सरकार की ओर से खेल नर्सरी भी आवंटित हुई थी। इसी बीच उन्हें इंटरनेट के माध्यम से पता चला कि पिट्ठू अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेला जा रहा है। इसके बाद उन्होंने इंदौर जाकर चयन प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया और अपने परिवार को इसके लिए राजी किया।
H2: लड़कियों के लिए खेलों में आगे बढ़ने के अवसर सीमित
मुस्कान ने बताया कि मेवात जैसे क्षेत्रों में लड़कियों के लिए खेल को पेशे के रूप में अपनाने के अवसर काफी कम हैं। उनके अनुसार, यहां पिट्ठू लगभग हर बच्चा खेलता है, लेकिन आमतौर पर यह खेल गांव और मोहल्लों तक ही सीमित रह जाता है।
उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में बेहतर महिला खिलाड़ियों में शामिल होने के कारण उन्हें भरोसा था कि वह चयन प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। शुरुआत में उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस खेल के जरिए भारतीय टीम का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा।
मुस्कान के मुताबिक, चयनकर्ताओं ने उनकी प्राकृतिक खेल प्रतिभा को पहचाना। पहली ही कोशिश में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना उनके लिए बेहद सुखद आश्चर्य था। अब वह पेशेवर प्रशिक्षण ले रही हैं।
H2: सिर्फ पदक नहीं, दूसरी लड़कियों के लिए रास्ता बनाना है लक्ष्य
मुस्कान का कहना है कि उनकी यह यात्रा केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। वह चाहती हैं कि उनकी उपलब्धि से मेवात की अन्य लड़कियों को भी पारंपरिक खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।
उनका मानना है कि अगर लड़कियों को उचित प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर मिलें, तो वे खेलों के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। मुस्कान की सफलता स्थानीय खेलों को नई पहचान दिलाने और ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
H2: क्या है पिट्ठू या सात पत्थरों का खेल?
पिट्ठू को कई जगहों पर लगोरी या सात पत्थरों के नाम से भी जाना जाता है। यह उत्तर भारत की गलियों और मैदानों में लोकप्रिय पारंपरिक खेल है।
इस खेल में एक टीम गेंद से सात पत्थरों के ढेर को गिराती है। इसके बाद टीम के खिलाड़ियों को विरोधी टीम की गेंद से बचते हुए पत्थरों को दोबारा जमाना होता है। दूसरी टीम गेंद से खिलाड़ियों को आउट करने की कोशिश करती है।
यह खेल बच्चों में फुर्ती, निशाना लगाने की क्षमता, टीमवर्क और तालमेल विकसित करने के लिए जाना जाता है।
H2: 30 से अधिक देशों में खेला जाता है पिट्ठू
पिट्ठू अब केवल भारत के स्थानीय इलाकों तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह खेल 30 से अधिक देशों में खेला जाता है। लगोरी के नाम से भी इसकी पहचान है और 2015-16 में मुंबई में इसके विश्व कप के आयोजन की योजना बनाई गई थी।
पिट्ठू फेडरेशन ऑफ इंडिया का गठन 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में इस खेल का उल्लेख किए जाने के बाद हुआ था। फेडरेशन के अनुसार, यह विश्व, एशियाई और दक्षिण एशियाई पिट्ठू महासंघों से संबद्ध है।
Key Highlights:
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हरियाणा के नूंह जिले की मुस्कान का भारतीय पिट्ठू टीम में चयन हुआ।
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मुस्कान एक छोटे किसान की बेटी और ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं।
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वह 2 से 6 दिसंबर तक थाईलैंड के पटाया में होने वाली चैंपियनशिप में खेलेंगी।
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उनका चयन इंदौर के सेंट नॉर्बर्ट स्कूल में हुई चयन प्रतियोगिता के आधार पर हुआ।
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मुस्कान सीनियर मिक्स्ड कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
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वह मेवात की लड़कियों के लिए खेलों में नए अवसर खोलना चाहती हैं।
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पिट्ठू को लगोरी और सात पत्थरों के नाम से भी जाना जाता है।
FAQ Section:
1. मुस्कान कौन हैं?
मुस्कान हरियाणा के नूंह जिले के बिवां गांव की रहने वाली हैं। वह एक छोटे किसान की बेटी और ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं।
2. मुस्कान का चयन किस टीम में हुआ है?
उनका चयन अंतरराष्ट्रीय पिट्ठू चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम की सीनियर मिक्स्ड कैटेगरी में हुआ है।
3. अंतरराष्ट्रीय पिट्ठू चैंपियनशिप कहां और कब होगी?
यह प्रतियोगिता थाईलैंड के पटाया में 2 से 6 दिसंबर तक आयोजित होगी।
4. पिट्ठू खेल को किन नामों से जाना जाता है?
पिट्ठू को लगोरी और सात पत्थरों के नाम से भी जाना जाता है।
5. मुस्कान की सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?
उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को पारंपरिक खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है। मुस्कान चाहती हैं कि दूसरी लड़कियों को भी खेलों में बेहतर अवसर मिलें।
Conclusion:
नूंह जिले की मुस्कान ने गांव की गलियों में खेले जाने वाले पारंपरिक खेल पिट्ठू के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर नई मिसाल पेश की है। एक छोटे किसान के परिवार से आने वाली मुस्कान का भारतीय टीम में चयन ग्रामीण प्रतिभाओं की क्षमता को दर्शाता है। अब उनकी नजर थाईलैंड में होने वाली चैंपियनशिप पर है। उनकी यह उपलब्धि मेवात की दूसरी लड़कियों को भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

