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कुरुक्षेत्र गुरुकुल के 114वें स्थापना दिवस पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्राकृतिक खेती को बताया मिट्टी की उर्वरता लौटाने का रास्ता
राष्ट्रपति ने कहा- गुरुकुल जैसी संस्थाएं भारत की ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाती हैं। CM नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के 60 साल पूरे होने का भी किया जिक्र।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना दिवस और स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती को मिट्टी की उर्वरता बहाल करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी मौजूद रहे।
गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना दिवस समारोह में पहुंचीं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में आयोजित 114वें स्थापना दिवस समारोह और स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी स्मरणोत्सव को संबोधित किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र जैसी संस्थाएं भारत की ज्ञान परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक और शैक्षणिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में ऐसे संस्थानों का योगदान महत्वपूर्ण है।
गांव, कृषि और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रपति का जोर
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गांवों और कृषि को देश की आत्मा से जोड़ते हुए प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की आत्मा गांवों में बसती है और ग्रामीण नागरिकों का जीवन कृषि पर निर्भर करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिमी संस्कृति को अपनाने के कारण जमीन की उर्वरता प्रभावित हो रही है, लेकिन प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को दोबारा बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने जताया गर्व
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र का पवित्र परिसर इतिहास की प्रेरणा, वर्तमान के गौरव और भविष्य के संकल्प को एक साथ प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि यह दिन हरियाणा के प्रत्येक नागरिक के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि राज्य अपने गठन के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर डायमंड जुबली मना रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुकुल की शिक्षा परंपरा और सांस्कृतिक विरासत समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
आचार्य देवव्रत की प्राकृतिक खेती की पहल की सराहना
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
उन्होंने बताया कि आचार्य देवव्रत 180 एकड़ भूमि पर रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किए बिना प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और कृषि में पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
विद्यार्थियों ने मलखंभ और सूर्य नमस्कार से दिखाई प्रतिभा
समारोह के दौरान गुरुकुल कुरुक्षेत्र के विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और शारीरिक शिक्षा पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
विद्यार्थियों ने मलखंभ, सूर्य नमस्कार और विभिन्न व्यायामों का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और शारीरिक क्षमता का परिचय दिया।
आचार्य देवव्रत ने स्वामी श्रद्धानंद के योगदान को किया याद
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र स्वामी श्रद्धानंद के विचारों, आदर्शों और संकल्पों की जीवंत विरासत है।
उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद को महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और शिक्षाविद बताते हुए कहा कि उन्होंने इसी भूमि से शुद्धि आंदोलन को गति दी थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी उन्होंने यहां से कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की थीं।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुरुकुल शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाना भी है।
Key Highlights
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया।
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स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी स्मरणोत्सव भी आयोजित हुआ।
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राष्ट्रपति ने भारतीय ज्ञान परंपरा और नैतिक मूल्यों को संरक्षित करने में गुरुकुलों की भूमिका बताई।
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प्राकृतिक खेती के जरिए मिट्टी की उर्वरता बहाल करने पर जोर दिया।
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के 60 वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया।
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आचार्य देवव्रत 180 एकड़ जमीन पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
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विद्यार्थियों ने मलखंभ, सूर्य नमस्कार और व्यायाम का प्रदर्शन किया।
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आचार्य देवव्रत ने स्वामी श्रद्धानंद के सामाजिक और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े योगदान को याद किया।
FAQ Section
1. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कुरुक्षेत्र में किस कार्यक्रम में शामिल हुईं?
वह गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 114वें स्थापना दिवस समारोह और स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी स्मरणोत्सव में शामिल हुईं।
2. राष्ट्रपति ने प्राकृतिक खेती को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता को बहाल किया जा सकता है और कृषि को बेहतर बनाया जा सकता है।
3. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किस उपलब्धि का जिक्र किया?
उन्होंने हरियाणा के गठन के 60 वर्ष पूरे होने और राज्य की डायमंड जुबली का उल्लेख किया।
4. आचार्य देवव्रत कितनी जमीन पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री के अनुसार, आचार्य देवव्रत 180 एकड़ जमीन पर रासायनिक कीटनाशकों के बिना प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
5. गुरुकुल के विद्यार्थियों ने कौन-कौन से प्रदर्शन किए?
विद्यार्थियों ने मलखंभ, सूर्य नमस्कार और विभिन्न शारीरिक व्यायामों का प्रदर्शन किया।
6. स्वामी श्रद्धानंद का गुरुकुल कुरुक्षेत्र से क्या संबंध बताया गया?
आचार्य देवव्रत के अनुसार, गुरुकुल कुरुक्षेत्र स्वामी श्रद्धानंद के विचारों और आदर्शों की विरासत है। उन्होंने इसी भूमि से शुद्धि आंदोलन को गति दी थी।
Conclusion
गुरुकुल कुरुक्षेत्र का 114वां स्थापना दिवस समारोह भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक शिक्षा और प्राकृतिक खेती के संदेश के साथ आयोजित हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा और ग्रामीण कृषि व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया, जबकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल की विरासत तथा प्राकृतिक खेती के प्रयासों को रेखांकित किया।
