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झुग्गी और सड़क पर रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू
आधार कार्ड, फैमिली आईडी, स्वास्थ्य जांच और स्कूल प्रवेश के लिए प्रशासन ने लगाए विशेष शिविर
जिला प्रशासन ने झुग्गियों और सड़कों पर रहने वाले बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष शिविरों की शुरुआत की है। अभियान के तहत बच्चों के आधार कार्ड, फैमिली आईडी और स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
झुग्गियों और सड़कों पर रहने वाले बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास के तहत जिला प्रशासन ने उन्हें आधार कार्ड, फैमिली आईडी, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य सरकारी लाभ उपलब्ध कराने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने शुरू किए हैं।
इस पहल का उद्देश्य इन बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाना और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
प्रशासन ने जिले में ऐसे करीब 350 बच्चों की पहचान की है। विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर उनके दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं और उन्हें शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम, रेड क्रॉस, CRID, बाल कल्याण और अन्य विभागों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है।इन विशेष शिविरों में डॉक्टर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं, जिसमें ब्लड प्रेशर, वजन, लंबाई और बीमारियों की स्क्रीनिंग शामिल है। गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण भी किया जा रहा है।
इस परियोजना के नोडल अधिकारी और अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) राहुल रैया ने कहा, “हमने पांच स्थानों की पहचान की है जहां इन बच्चों की जांच और सहायता के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि इन बच्चों को उनकी जरूरी सुविधाएं मिल सकें।”
अभियान के दूसरे दिन गुरुवार को NH-44 स्थित शनि मंदिर के पास विशेष शिविर लगाया गया, जिसमें झुग्गी क्षेत्रों और संवेदनशील परिस्थितियों में रहने वाले बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे।
शिविर में कुल 113 बच्चों का पंजीकरण किया गया। इनमें से 15 बच्चों के आधार कार्ड मौके पर ही बनाए गए। 30 बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए पात्र पाए गए, जबकि 6 से 15 वर्ष आयु वर्ग के 19 बच्चों को स्कूलों में दाखिले के योग्य पाया गया। अधिकारियों को उनके दाखिले सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
त्वचा रोग से पीड़ित चार बच्चों और दांतों की समस्या वाले चार बच्चों को इलाज के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया। इसके अलावा 35 बच्चों को आयरन और पेट के कीड़ों की दवा दी गई। शिविर में HPV वैक्सीन और HIV के बारे में जागरूकता एवं काउंसलिंग सत्र भी आयोजित किए गए।
उपायुक्त डॉ. आनंद शर्मा ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क पर रहने वाले, भीख मांगने या बाल श्रम में लगे बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
उन्होंने कहा, “पहचान दस्तावेज न होने के कारण ये बच्चे अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। इन शिविरों के माध्यम से हम उन्हें जरूरी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।”


