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हरियाणा में गेहूं खरीद नियमों पर बवाल, किसानों-व्यापारियों का विरोध तेज
बायोमेट्रिक और फोटो अपलोड नियमों से धीमी पड़ी खरीद प्रक्रिया, सिरसा में धरना
सिरसा और फतेहाबाद में नए गेहूं खरीद नियमों के कारण किसानों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसके विरोध में धरना प्रदर्शन किया गया।
सोमवार को Vijyendra Kumar, अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि एवं किसान कल्याण), ने Sirsa के Kalanwali Mandi का निरीक्षण किया।
इस बीच, Sirsa और Fatehabad में किसानों और व्यापारियों को नए गेहूं खरीद नियमों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन नियमों के तहत बायोमेट्रिक सत्यापन और ट्रैक्टरों की तस्वीरें अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
इन उपायों के कारण मंडियों से गेहूं की उठान (लिफ्टिंग) धीमी हो गई है, जिससे भुगतान में देरी हो रही है और किसानों व व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
सोमवार को Samyukt Kisan Morcha ने सिरसा मार्केट कमेटी में तीन घंटे का धरना दिया, जिसे किसानों, मजदूर संगठनों और व्यापारिक प्रतिनिधियों का समर्थन मिला। किसान नेताओं ने नए नियमों को वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
Bajarang Garg, राज्य अध्यक्ष, हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल, ने Sirsa Anaj Mandi का दौरा करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां किसानों और व्यापारियों को मुश्किल में डाल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में 125 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन के बावजूद इस बार खरीद लक्ष्य केवल 72 लाख MT रखा गया है, जो पिछले साल के 80 लाख MT से कम है।
उन्होंने बताया कि अब तक 74 लाख MT गेहूं मंडियों में आ चुका है, लेकिन केवल 13 लाख MT की ही उठान हुई है, जिससे किसान 19 दिनों तक मंडियों में इंतजार कर रहे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें मंडियों के बाहर लगी हुई हैं, जो धीमी खरीद प्रक्रिया को दर्शाती हैं।
गर्ग ने व्यापारियों के कमीशन में कटौती की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जहां पहले 2.5% कमीशन मिलता था, वहीं अब गेहूं खरीद पर इसे घटाकर ₹64.62 प्रति क्विंटल से ₹55 प्रति क्विंटल कर दिया गया है और सरसों पर 2.5% से घटाकर 1.25% कर दिया गया है।
वहीं, Vijyendra Kumar ने कहा कि गेहूं की खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और किसानों की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि करीब 90% गेहूं की आवक दर्ज की जा चुकी है और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उठान की प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि मंडियों में स्टॉक जमा न हो।
