सभी दस्तावेज सही, जांच के लिए तैयार: राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा

आरडीजी ग्रांट के लिए हिमाचल के सांसदों से एकजुट होने की अपील, पैराग्लाइडिंग सुरक्षा पर भी दी प्रतिक्रिया

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राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने अपने दस्तावेजों को सही बताते हुए जांच के लिए तैयार रहने की बात कही और हिमाचल के विकास मुद्दों पर सभी सांसदों से मिलकर काम करने की अपील की।

राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने रविवार को कहा कि उनके आधिकारिक दस्तावेजों में दिए गए सभी तथ्य और आंकड़े पूरी तरह सही हैं और वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शर्मा ने अपने चुनाव को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और स्पष्ट किया कि उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले अपने सभी ठेके सरेंडर कर दिए थे।

सामूहिक प्रयासों की अपील करते हुए उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सभी सांसदों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के लिए जरूरी आरडीजी (RDG) ग्रांट हासिल करने के लिए एकजुट होकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वह इस दिशा में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं और केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष राज्य के प्रमुख मुद्दे उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अपनी प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए शर्मा ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में संशोधन की आवश्यकता और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए भुभू जोत सुरंग के निर्माण में तेजी लाने पर जोर दिया।

हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा संसद में पैराग्लाइडिंग सुरक्षा को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने उन्हें “अनुचित” और तथ्यों पर आधारित न होने वाला बताया।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश 2012 में एयरो स्पोर्ट्स नियम लागू करने वाला पहला राज्य था, जिन्हें समय-समय पर अपडेट किया जाता रहा है।

शर्मा ने बताया कि राज्य में लगभग 2,200 लाइसेंस प्राप्त टैंडम पायलट हैं, जिनकी हर साल फिटनेस जांच होती है और उनके उपकरणों की नियमित रूप से तकनीकी समिति द्वारा जांच की जाती है।

उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रामक बयान राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं और पर्यटन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं के बावजूद सड़क परिवहन बंद नहीं किया जाता। उन्होंने यूरोप के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वहां हर साल 10 से 15 पैराग्लाइडर की मौत होती है।

हिमाचल में 2017 से 2024 के बीच 18 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें 9 विदेशी और 9 भारतीय पायलट शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि पैराग्लाइडिंग पर रोक लगाने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है, क्योंकि इससे हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।Screenshot_2466

Edited By: Karan Singh

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