- Hindi News
- राज्य
- पंजाब
- फरीदकोट में विवाद: गुरुद्वारों में योग कक्षाओं पर सिख संगठनों का विरोध, ‘मर्यादा उल्लंघन’ का आरोप
फरीदकोट में विवाद: गुरुद्वारों में योग कक्षाओं पर सिख संगठनों का विरोध, ‘मर्यादा उल्लंघन’ का आरोप
‘सीएम दी योगशालाएं’ योजना के तहत चल रही योग कक्षाओं को रोका गया, गुरुद्वारों में पारंपरिक प्रशिक्षण की मांग तेज
फरीदकोट में गुरुद्वारा परिसर में योग कक्षाएं चलाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सिख संगठनों ने इसे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए कक्षाएं रुकवा दीं।
फरीदकोट में गुरुद्वारों के अंदर योग कक्षाओं पर बवाल
पंजाब के Faridkot में आज उस समय विवाद खड़ा हो गया जब कुछ सिख संगठनों ने स्थानीय गुरुद्वारा परिसर में चल रही योग कक्षाओं पर आपत्ति जताई। यह कक्षाएं पंजाब सरकार की “सीएम दी योगशालाएं” योजना के तहत आयोजित की जा रही थीं।
सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर चल रही योग कक्षाओं को रोक दिया और इसे गुरुद्वारे की धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताया।
‘मर्यादा उल्लंघन’ का आरोप, सिख संगठनों की आपत्ति
सिख कार्यकर्ताओं का कहना है कि गुरुद्वारा परिसर में योग कक्षाएं आयोजित करना धार्मिक परंपराओं और मर्यादा का उल्लंघन है। उनका आरोप है कि कई प्रतिभागी बिना सिर ढके कक्षाओं में शामिल हो रहे थे, जो गुरुद्वारा मर्यादा के खिलाफ माना जाता है।कार्यकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार की इस पहल से धार्मिक स्थलों की पवित्रता प्रभावित हो रही है।
चार गुरुद्वारों में पहुंचकर रोकी गईं कक्षाएं
सिख संगठनों के कार्यकर्ताओं ने फरीदकोट के चार गुरुद्वारों का दौरा किया, जहां योग कक्षाएं चल रही थीं। सभी स्थानों पर उन्होंने हस्तक्षेप कर कक्षाओं को रोक दिया।
‘गटका’ प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की मांग
सिख संगठनों ने मांग की कि गुरुद्वारों में योग की जगह पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट ‘गटका’ का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को अपनी विरासत से जोड़ा जा सके।
सिख नेताओं का बयान और आपत्ति
इस मामले पर सिख नेताओं Gursewak Singh Bhana और Sharanjit Singh Saran ने कहा कि लंबे समय से यह देखा जा रहा है कि गुरुद्वारों में चल रही योग कक्षाओं के दौरान मर्यादा का उल्लंघन हो रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रशिक्षक पंजाब से बाहर के हैं और यह पहल धार्मिक स्थलों की परंपरा के अनुरूप नहीं है।
अकाल तख्त से हस्तक्षेप की मांग
सिख संगठनों ने अपील की है कि Akal Takht के जत्थेदार इस मामले में हस्तक्षेप करें और गुरुद्वारों में योग कक्षाओं पर औपचारिक रोक लगाने का आदेश जारी करें।
‘राजनीतिक हस्तक्षेप’ का आरोप
सिख कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही यह योग पहल धार्मिक स्थलों में एक तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप है, जिससे गुरुद्वारों की पवित्रता प्रभावित हो रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि आगे से गुरुद्वारा परिसर में ऐसी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
Key Highlights:
- फरीदकोट के गुरुद्वारों में योग कक्षाओं पर विवाद
- ‘सीएम दी योगशालाएं’ योजना के तहत चल रही थीं कक्षाएं
- सिख संगठनों ने कक्षाएं रुकवाईं
- मर्यादा उल्लंघन और सिर ढकने के नियम का मुद्दा
- ‘गटका’ प्रशिक्षण शुरू करने की मांग
- अकाल तख्त से हस्तक्षेप की अपील
FAQ Section:
Q1: विवाद क्यों हुआ?
गुरुद्वारा परिसर में योग कक्षाएं चलाने को लेकर सिख संगठनों ने आपत्ति जताई।
Q2: किस योजना के तहत योग कक्षाएं चल रही थीं?
पंजाब सरकार की “सीएम दी योगशालाएं” योजना के तहत।
Q3: सिख संगठनों की मुख्य मांग क्या है?
गुरुद्वारों में योग की जगह ‘गटका’ प्रशिक्षण शुरू करने की मांग।
Q4: क्या किसी धार्मिक संस्था से हस्तक्षेप की मांग की गई?
हां, अकाल तख्त के जत्थेदार से हस्तक्षेप की अपील की गई है।
Conclusion:
फरीदकोट में उठा यह विवाद धार्मिक मर्यादा और सरकारी स्वास्थ्य पहल के बीच टकराव को दर्शाता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक व धार्मिक बहस को जन्म दे सकता है।

