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शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ा, DTF ने जताई कड़ी आपत्ति
हजारों शिक्षक कक्षाओं से दूर, पढ़ाई प्रभावित—मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) ने शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ को लेकर विरोध जताया और जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
Democratic Teachers Front (DTF) ने शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ पर कड़ी आपत्ति जताई है और जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
जिला अध्यक्ष Sukhdev Dansewal और संयुक्त सचिव Praveen Sherpur के नेतृत्व में शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल Parampreet Singh, सहायक आयुक्त, से Hoshiarpur स्थित डीसी कार्यालय में मिला। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न शिक्षक और कर्मचारी यूनियनों के सदस्य भी शामिल थे।
ज्ञापन में यूनियन ने बताया कि बड़ी संख्या में शिक्षकों को जनगणना कार्य, मतदाता सूची संशोधन (SIR सर्वे), बीएलओ ड्यूटी, स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में नामांकन, ड्रग सर्वे और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है। इससे सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक माहौल गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, क्योंकि हजारों शिक्षक कक्षाओं से बाहर हैं। इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिए पर रहने वाले छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि ड्यूटी आवंटन में अनियमितताएं हो रही हैं। उनका कहना है कि कुछ मामलों में अधिकारियों ने पहले जारी की गई ड्यूटी सूची में बदलाव कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया, जबकि दूसरों पर अधिक बोझ डाल दिया।
DTF ने मांग की कि चुनाव, जनगणना, स्वास्थ्य योजनाएं और सर्वे जैसे गैर-शैक्षणिक कार्य शिक्षित बेरोजगार युवाओं को दिए जाएं, ताकि कक्षा में पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नौकरी करने वाले दंपतियों में से केवल एक को ही ड्यूटी दी जाए, जबकि गर्भवती महिलाओं और दो साल से कम उम्र के बच्चों की माताओं को छूट दी जाए।
यूनियन ने यह भी कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारियों के बीच कार्यों का समान वितरण होना चाहिए, न कि पूरा बोझ केवल शिक्षा विभाग पर डाला जाए।
