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हरित क्रांति का हीरो, लेकिन जंगलों में सबसे पीछे! पंजाब का सिर्फ 3.67% हिस्सा ही वन, पर्यावरण पर बढ़ा बड़ा खतरा
CAMPA रिपोर्ट 2022-23 ने पंजाब की पर्यावरणीय चुनौती को उजागर किया है। राज्य का केवल 3.67% भूभाग ही वनाच्छादित है, जबकि अधिकांश जंगल तीन जिलों तक सीमित हैं।
हरित क्रांति के लिए देशभर में पहचान रखने वाला पंजाब अब वन क्षेत्र के मामले में गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। CAMPA रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार राज्य का केवल 3.67% हिस्सा ही वनाच्छादित है और इनमें से 63% वन केवल होशियारपुर, रूपनगर और पठानकोट जिलों में स्थित हैं।
पंजाब में वन क्षेत्र बेहद सीमित, CAMPA रिपोर्ट ने दिखाई चिंता की तस्वीर
देश की खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले पंजाब में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। CAMPA (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority) रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार, राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का केवल 3.67% हिस्सा ही वनाच्छादित है।
रिपोर्ट बताती है कि पंजाब के अधिकांश प्राकृतिक वन कुछ चुनिंदा जिलों तक ही सीमित रह गए हैं, जबकि राज्य के बड़े हिस्से में हरित आवरण बेहद कम है।
63% वन सिर्फ तीन जिलों में केंद्रित
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के कुल वन क्षेत्र का लगभग 63% हिस्सा केवल तीन जिलों—होशियारपुर, रूपनगर (रोपड़) और पठानकोट—में स्थित है।इन जिलों की भौगोलिक स्थिति और शिवालिक क्षेत्र की मौजूदगी के कारण यहां अपेक्षाकृत अधिक वन क्षेत्र बचा हुआ है, जबकि राज्य के मैदानी इलाकों में प्राकृतिक जंगल बेहद सीमित हैं।
हरित क्रांति और शहरीकरण का पड़ा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, पंजाब में हरित क्रांति के बाद कृषि क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ। इसके साथ ही बढ़ते शहरीकरण, औद्योगीकरण और बुनियादी ढांचा विकास ने प्राकृतिक वनों पर दबाव बढ़ाया।
इसी कारण राज्य में वन क्षेत्र लगातार सीमित होता गया और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
पर्यावरण और जलवायु पर बढ़ रही चिंता
कम वन क्षेत्र का असर केवल जैव विविधता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव कई अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ता है।
संभावित प्रभाव
- तापमान में वृद्धि और हीट वेव का खतरा।
- भूजल और जल संरक्षण पर प्रतिकूल असर।
- वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में कमी।
- वायु गुणवत्ता और कार्बन अवशोषण क्षमता पर प्रभाव।
- जलवायु परिवर्तन के जोखिम में बढ़ोतरी।
वन संरक्षण और पौधारोपण पर जोर
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में बड़े पैमाने पर पौधारोपण, प्राकृतिक वनों का संरक्षण और स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
साथ ही शहरी क्षेत्रों में ग्रीन बेल्ट विकसित करने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने से वन आवरण में सुधार किया जा सकता है।
Key Highlights:
- CAMPA रिपोर्ट 2022-23 में पंजाब के वन क्षेत्र की स्थिति सामने आई।
- राज्य का केवल 3.67% भूभाग वनाच्छादित।
- कुल वन क्षेत्र का 63% हिस्सा होशियारपुर, रूपनगर और पठानकोट में।
- हरित क्रांति, कृषि विस्तार और शहरीकरण को प्रमुख कारण माना गया।
- पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण की जरूरत पर जोर।
FAQ Section
Q1. पंजाब का कितना हिस्सा वनाच्छादित है?
उत्तर: CAMPA रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार, पंजाब का केवल 3.67% भूभाग वनाच्छादित है।
Q2. सबसे अधिक वन किस क्षेत्र में हैं?
उत्तर: राज्य के लगभग 63% वन होशियारपुर, रूपनगर और पठानकोट जिलों में स्थित हैं।
Q3. वन क्षेत्र कम होने के प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर: हरित क्रांति के बाद कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढांचा विकास को प्रमुख कारण माना जाता है।
Q4. कम वन क्षेत्र से क्या नुकसान हो सकता है?
उत्तर: इससे जलवायु परिवर्तन, तापमान वृद्धि, जैव विविधता में कमी, भूजल संकट और वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
Q5. समाधान क्या हो सकता है?
उत्तर: बड़े पैमाने पर पौधारोपण, प्राकृतिक वनों का संरक्षण, स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाना आवश्यक है।
Conclusion
हरित क्रांति के जरिए देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने वाला पंजाब अब पर्यावरणीय संतुलन की चुनौती का सामना कर रहा है। CAMPA रिपोर्ट 2022-23 के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में वन क्षेत्र बेहद सीमित है और अधिकांश जंगल कुछ जिलों तक ही सिमट गए हैं। ऐसे में दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण के लिए वनीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में प्रभावी कदम उठाना समय की आवश्यकता है।.jpg.jpeg)
