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जालंधर में सिख संगठनों की बैठक, ‘सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026’ पर जताई आपत्ति
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा—सजा का समर्थन, लेकिन धार्मिक मामलों में दखल स्वीकार नहीं
जालंधर में सिख संगठनों की बैठक में राज्य सरकार के नए सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026 पर चर्चा हुई। जत्थेदार ने कहा कि सजा का समर्थन है, लेकिन धार्मिक हस्तक्षेप अस्वीकार्य है।
जालंधर में सिख संगठनों की अहम बैठक
पंजाब के जालंधर स्थित गुरुद्वारा दीवान अस्तान में रविवार को कई सिख संगठनों की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इसमें सिंह सभाओं, सुखमनी सेवा सोसाइटी और अन्य धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने की।
‘सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026’ पर हुई चर्चा
बैठक का मुख्य मुद्दा राज्य सरकार द्वारा लाया गया ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026’ रहा। इस कानून के प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप पर जताई चिंता
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा कि सिख समुदाय बेअदबी मामलों में दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने के पक्ष में है, लेकिन धार्मिक मामलों में किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।सजा का समर्थन, लेकिन कानून पर सवाल
ज्ञानी गर्गज ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को बेअदबी मामलों में दोषी पाया जाता है तो उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि नया कानून धार्मिक गतिविधियों को नियंत्रित करने की दिशा में कदम हो सकता है।
सरकार से पुराने मामलों पर कार्रवाई की मांग
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक हुए बेअदबी मामलों में सरकार ने प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी डेरा या धार्मिक संगठन के अनुयायी ऐसे मामलों में शामिल पाए जाते हैं, तो उसके प्रमुखों की जिम्मेदारी पर भी विचार होना चाहिए।
बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा
बैठक में शामिल संगठनों ने कहा कि वे धार्मिक स्वतंत्रता और सिख मर्यादा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट रहेंगे और जरूरत पड़ने पर आगे की रणनीति तय करेंगे।
Key Highlights:
- जालंधर में सिख संगठनों की विशेष बैठक
- सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026 पर चर्चा
- धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप पर आपत्ति
- बेअदबी मामलों में सख्त सजा का समर्थन
- पुराने मामलों की जांच पर सवाल
FAQ Section:
Q1. बैठक कहाँ हुई?
जालंधर के गुरुद्वारा दीवान अस्तान में।
Q2. बैठक की अध्यक्षता किसने की?
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने।
Q3. मुख्य मुद्दा क्या था?
राज्य सरकार का सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026।
Q4. सिख संगठनों की क्या मांग है?
बेअदबी मामलों में सजा का समर्थन, लेकिन धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप का विरोध।
Conclusion:
जालंधर की यह बैठक सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के दायरे को लेकर गंभीर बहस को दर्शाती है। संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे न्याय के पक्ष में हैं, लेकिन धार्मिक मामलों में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे।

