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जालंधर में ‘द एक्टिंग हार्ट्स’ थिएटर वर्कशॉप का उत्साह, 9 से 71 वर्ष तक के प्रतिभागी ले रहे हिस्सा
युवा से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक सीख रहे अभिनय की बारीकियां, 12वें संस्करण में थिएटर के जरिए व्यक्तित्व विकास पर जोर
जालंधर में आयोजित ‘द एक्टिंग हार्ट्स – थिएटर फॉर ऑल’ वर्कशॉप में हर आयु वर्ग के लोग उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। 12वें संस्करण की इस अनूठी पहल का उद्देश्य थिएटर के माध्यम से अभिनय कौशल, आत्मविश्वास और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना है।
जालंधर में थिएटर के प्रति बढ़ रहा आकर्षण
Jalandhar में आयोजित ‘The Acting Hearts – Theatre for All’ वर्कशॉप ने एक बार फिर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। थिएटर की दुनिया से परिचित कराने और अभिनय की मूलभूत तकनीकों को सिखाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह कार्यशाला अपने 12वें संस्करण में पहुंच चुकी है।
इस वर्ष वर्कशॉप में 9 वर्षीय बच्चे से लेकर 71 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक तक हिस्सा ले रहे हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
13 साल पहले हुई थी शुरुआत
इस पहल की शुरुआत करीब 13 वर्ष पहले Dr Ankur Sharma ने की थी। वे YUVAA Theatre के संस्थापक और क्रिएटिव डायरेक्टर हैं।समय के साथ यह वर्कशॉप जालंधर में थिएटर और रचनात्मक गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों के बीच एक लोकप्रिय मंच बन गई है। विशेष रूप से गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों और वयस्कों के लिए यह एक आकर्षक गतिविधि के रूप में उभरी है।
अभिनय की बुनियादी क्षमताओं पर विशेष फोकस
वर्कशॉप में प्रतिभागियों को अभिनय की चार प्रमुख आधारशिलाओं पर प्रशिक्षण दिया जाता है:
प्रमुख प्रशिक्षण मॉड्यूल:
- शरीर (Body)
- मन (Mind)
- आवाज़ (Voice)
- संवेदनात्मक समझ (Sensory Perception)
इन मॉड्यूल्स के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव के जरिए अभिनय की तकनीकें सिखाई जाती हैं।
खेल और गतिविधियों के जरिए सीख रहे अभिनय
कार्यशाला के दौरान विभिन्न प्रकार के मूवमेंट एक्सरसाइज और रचनात्मक खेल आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य शरीर और मन के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है।
प्रतिभागियों को अपनी आवाज़ की क्षमता बढ़ाने, स्पष्ट उच्चारण, संवाद अदायगी और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
10 दिनों में तैयार होता है नाटक
यह वर्कशॉप केवल अभिनय प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। प्रतिभागी 10 दिनों के दौरान मिलकर:
- नाट्य दृश्य तैयार करते हैं
- कविताएं लिखते हैं
- गीत गाते हैं
- नृत्य प्रस्तुतियां तैयार करते हैं
इन सभी गतिविधियों का अंतिम उद्देश्य एक एकांकी नाटक (One-Act Play) तैयार करना होता है, जिसका मंचन कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों के परिवारों के सामने किया जाता है।
उम्र नहीं, जुनून है सबसे बड़ी योग्यता
इस थिएटर वर्कशॉप की सबसे खास बात यह है कि इसमें शामिल होने के लिए कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं है।
आयोजकों का मानना है कि थिएटर केवल अभिनय सीखने का माध्यम नहीं बल्कि आत्मविश्वास, संवाद कौशल, रचनात्मक सोच और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का प्रभावी साधन भी है।
अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण का अनुभव
डॉ. अंकुर शर्मा दो दशकों से अधिक समय से शिक्षण और थिएटर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित Yale University तथा ब्रिटेन की प्रसिद्ध Royal Academy of Dramatic Art (RADA) से नाट्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उनके मार्गदर्शन में यह कार्यशाला लगातार नई पीढ़ी को थिएटर और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ रही है।
Key Highlights:
- जालंधर में ‘The Acting Hearts’ थिएटर वर्कशॉप का 12वां संस्करण आयोजित
- 9 से 71 वर्ष तक के प्रतिभागी ले रहे हिस्सा
- थिएटर के माध्यम से व्यक्तित्व विकास पर जोर
- शरीर, मन, आवाज़ और संवेदनात्मक प्रशिक्षण शामिल
- 10 दिनों में प्रतिभागी तैयार करते हैं एकांकी नाटक
- डॉ. अंकुर शर्मा ने 13 वर्ष पहले की थी शुरुआत
- बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए खुली है कार्यशाला
FAQ Section:
Q1: ‘The Acting Hearts’ वर्कशॉप क्या है?
यह थिएटर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो अभिनय और व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित है।
Q2: वर्कशॉप का आयोजन कहां हो रहा है?
यह वर्कशॉप जालंधर में आयोजित की जा रही है।
Q3: इसमें कौन भाग ले सकता है?
इसमें किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति भाग ले सकता है। इस वर्ष 9 से 71 वर्ष तक के प्रतिभागी शामिल हैं।
Q4: प्रतिभागियों को क्या सिखाया जाता है?
अभिनय, आवाज़ नियंत्रण, शारीरिक अभिव्यक्ति, रचनात्मक लेखन, गीत और मंच प्रस्तुति जैसी गतिविधियां सिखाई जाती हैं।
Q5: वर्कशॉप का अंतिम परिणाम क्या होता है?
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागी मिलकर एक एकांकी नाटक का मंचन करते हैं।
Conclusion:
‘The Acting Hearts – Theatre for All’ केवल एक थिएटर वर्कशॉप नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सामाजिक संवाद को विकसित करने का एक सशक्त मंच बन चुकी है। जालंधर में इसकी बढ़ती लोकप्रियता यह दर्शाती है कि लोग डिजिटल दुनिया से हटकर वास्तविक अनुभवों और रचनात्मक गतिविधियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

