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यूपी में बड़ा प्रशासनिक चूक मामला: पांच साल पहले दिवंगत हो चुकीं दो शिक्षिकाओं को मिला प्रमोशन
BSA और समकक्ष पदों पर पदोन्नति सूची में शामिल हुए मृत शिक्षकों के नाम, रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पांच वर्ष पहले निधन हो चुकीं दो शिक्षिकाओं के नाम बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और समकक्ष पदों के लिए जारी पदोन्नति सूची में शामिल कर दिए गए। मामले के सामने आने के बाद विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं।
पांच साल पहले दिवंगत शिक्षिकाओं को दे दिया प्रमोशन
उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में एक बड़ी प्रशासनिक चूक उजागर हुई है। विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) द्वारा जारी पदोन्नति सूची में दो ऐसी शिक्षिकाओं के नाम शामिल पाए गए हैं, जिनका निधन वर्ष 2021 में ही हो चुका था।
यह मामला सामने आने के बाद विभाग की रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
DPC बैठक के बाद जारी हुई थी पदोन्नति सूची
जानकारी के अनुसार, पदोन्नति संबंधी बैठकें 16 और 17 अप्रैल को Uttar Pradesh Public Service Commission में आयोजित की गई थीं।इन बैठकों में शिक्षा निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर पदोन्नतियों को मंजूरी दी गई।
इसके बाद 26 मई को विभिन्न श्रेणियों के अधिकारियों और शिक्षकों के लिए पदोन्नति आदेश जारी किए गए।
पदोन्नति पाने वालों में शामिल थे:
- निरीक्षण शाखा (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) के 164 अधिकारी
- महिला शिक्षण शाखा की 159 शिक्षिकाएं
- पुरुष शिक्षण शाखा के 167 शिक्षक
इन सभी को बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) में वरिष्ठ प्रवक्ता, राजकीय इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्य और अन्य समकक्ष पदों पर पदोन्नत किया गया।
मृत शिक्षिकाओं के नाम भी सूची में शामिल
महिला शिक्षण शाखा की पदोन्नति सूची में दो दिवंगत शिक्षिकाओं के नाम शामिल पाए गए।
1. सुनील लता
Sunil Lata का नाम पदोन्नति सूची में क्रम संख्या 19 पर दर्ज था।
- नियुक्ति: 11 जनवरी 1997
- पद: राजकीय माध्यमिक विद्यालय शिक्षिका
- निधन: 29 अप्रैल 2021
रिपोर्ट के अनुसार उनके पति ब्रजेश चंद्र लाल वर्तमान में पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
2. सुमन कुमारी
Suman Kumari का नाम सूची में क्रम संख्या 47 पर था।
- पद: प्रधानाध्यापिका, राजकीय हाई स्कूल अर्नधरा, हरदोई
- निधन: 27 मार्च 2021
उनके निधन के बाद उनके पुत्र जय प्रकाश पाल को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी गई थी।
रिकॉर्ड जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
दोनों शिक्षिकाओं के निधन के बावजूद उनके नाम पदोन्नति सूची में शामिल होना विभागीय रिकॉर्ड प्रबंधन और सत्यापन प्रक्रिया की गंभीर खामी को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि DPC बैठकों से पहले सेवा रिकॉर्ड, सेवानिवृत्ति और मृत्यु संबंधी जानकारी का गहन सत्यापन किया जाना चाहिए था।
इस घटना ने शिक्षा विभाग के डेटा प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
जांच के आदेश
मामले के सामने आने के बाद Pratap Singh Baghel ने कहा कि विभाग ने इस मामले का संज्ञान लिया है।
उन्होंने कहा कि:
"मामला हमारे संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और जो भी अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।"
प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल
यह मामला केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सरकारी विभागों में रिकॉर्ड अपडेट करने और मानव संसाधन प्रबंधन की प्रक्रियाओं पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मृत कर्मचारियों के नाम वर्षों बाद भी सक्रिय सेवा रिकॉर्ड में बने रहते हैं, तो इससे पदोन्नति, नियुक्ति और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई अन्य मामलों में भी त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है।
Key Highlights:
- उत्तर प्रदेश में दो दिवंगत शिक्षिकाओं को पदोन्नति सूची में शामिल किया गया
- दोनों शिक्षिकाओं का निधन वर्ष 2021 में हो चुका था
- BSA और समकक्ष पदों के लिए जारी हुई थी पदोन्नति सूची
- UPPSC में DPC बैठकों के बाद जारी हुए थे आदेश
- रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
- माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जांच के आदेश दिए
- दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई
FAQ Section:
Q1: मामला किस राज्य से जुड़ा है?
यह मामला उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग से संबंधित है।
Q2: कितनी दिवंगत शिक्षिकाओं के नाम पदोन्नति सूची में शामिल हुए?
दो शिक्षिकाओं के नाम सूची में शामिल पाए गए।
Q3: उनका निधन कब हुआ था?
दोनों शिक्षिकाओं का निधन वर्ष 2021 में हो चुका था।
Q4: किन पदों पर पदोन्नति दी जानी थी?
बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), DIET में वरिष्ठ प्रवक्ता, प्रधानाचार्य और समकक्ष पदों पर।
Q5: विभाग ने क्या कार्रवाई की है?
मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।
Conclusion:
उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग में सामने आया यह मामला सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन और पदोन्नति प्रक्रिया की गंभीर खामियों को उजागर करता है। पांच वर्ष पहले दिवंगत कर्मचारियों के नाम पदोन्नति सूची में शामिल होना प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़ा करता है। अब विभागीय जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह लापरवाही कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

