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NDRI की बड़ी उपलब्धि: भू-तापीय ऊर्जा से गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म रहेंगे पशु, डेयरी किसानों को मिलेगा लाभ
करनाल स्थित ICAR-NDRI के वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक, पशुशालाओं में तापमान नियंत्रित कर दूध उत्पादन बढ़ाने की संभावना
आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) ने भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) आधारित तकनीक विकसित कर डेयरी किसानों की एक बड़ी समस्या का समाधान खोजा है। यह प्रणाली गर्मियों में पशुओं को ठंडा और सर्दियों में गर्म रखने में मदद करेगी, जिससे ऊर्जा खर्च कम होने के साथ पशुओं की उत्पादकता में भी सुधार हो सकता है।
डेयरी किसानों की बड़ी समस्या का समाधान
हरियाणा के डेयरी किसानों के लिए राहत भरी खबर है। करनाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (ICAR-NDRI) ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो पशुओं को गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रखने में मदद करेगी।
भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) आधारित इस प्रणाली का सफल परीक्षण संस्थान के पशुधन अनुसंधान केंद्र (Livestock Research Centre) में किया गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक पशुशालाओं में सालभर संतुलित तापमान बनाए रखने में सक्षम है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
जमीन के भीतर की प्राकृतिक ऊर्जा का उपयोग
यह प्रणाली धरती की सतह से लगभग 3 से 4 मीटर नीचे मौजूद स्थिर तापमान का उपयोग करती है। वैज्ञानिकों ने भूमिगत पाइपों के माध्यम से ताजी हवा को गुजारकर उसे प्राकृतिक रूप से नियंत्रित तापमान में परिवर्तित किया।इसके बाद यह हवा पशुशाला में पहुंचाई जाती है, जिससे अंदर का वातावरण अधिक आरामदायक बना रहता है।
गर्मियों में ठंडक, सर्दियों में गर्माहट
गर्मी के मौसम में भूमिगत तापमान बाहरी वातावरण की तुलना में कम होता है, जिससे अंदर आने वाली हवा ठंडी हो जाती है। वहीं सर्दियों में यही तापमान बाहरी वातावरण से अधिक होने के कारण पशुशाला को गर्म बनाए रखने में मदद करता है।
50 प्रतिशत तक घट सकता है ऊर्जा खर्च
NDRI के निदेशक डॉ. धीर सिंह के अनुसार, इस तकनीक की मदद से पशुशालाओं को ठंडा या गर्म रखने में लगने वाली ऊर्जा लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि पशुओं की अधिकतम उत्पादकता 30 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहती है। जब तापमान इस सीमा से ऊपर या नीचे चला जाता है, तो पशु अपने शरीर का तापमान संतुलित रखने में अधिक ऊर्जा खर्च करते हैं, जिससे दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
वैज्ञानिकों ने किया विस्तृत अध्ययन
12 मीटर गहरा बोरवेल कर जुटाए आंकड़े
वैज्ञानिकों ने इस परियोजना के तहत 12 मीटर गहरा बोरवेल तैयार किया और वर्षभर विभिन्न गहराइयों पर तापमान का अध्ययन किया।
अध्ययन में पाया गया कि 4 मीटर की गहराई के बाद तापमान में दिन-रात के बदलाव का प्रभाव लगभग समाप्त हो जाता है।
चौंकाने वाले तापमान अंतर सामने आए
शोध के दौरान जून माह में बाहरी तापमान और 4 मीटर गहराई के तापमान के बीच 9.5 डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज किया गया। वहीं जनवरी में यह अंतर 14.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
इन परिणामों ने भू-तापीय ऊर्जा आधारित प्रणाली की प्रभावशीलता को साबित किया।
पशुशाला में किया गया सफल परीक्षण
भूमिगत पाइपलाइन से नियंत्रित की गई हवा
अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने एक पशुशाला के नीचे लगभग 3 मीटर गहराई पर कास्ट आयरन पाइप बिछाए। इन पाइपों के जरिए हवा का प्रवाह नियंत्रित किया गया।
परीक्षण के दौरान पाया गया कि पशुशाला के अंदर तापमान बाहरी वातावरण की तुलना में अधिक स्थिर रहा, जिससे पशुओं को बेहतर आराम मिला।
किसानों और डेयरी उद्योग को होगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है तो डेयरी किसानों को बिजली और ऊर्जा खर्च में बड़ी बचत होगी। साथ ही पशुओं पर मौसम के प्रभाव को कम कर दूध उत्पादन और स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकेगा।
यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां गर्मी और सर्दी दोनों का प्रभाव अधिक रहता है।
Key Highlights:
- NDRI ने भू-तापीय ऊर्जा आधारित पशुशाला तकनीक विकसित की।
- गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- ऊर्जा खर्च में लगभग 50% तक कमी संभव।
- 12 मीटर गहरे बोरवेल के जरिए किया गया वैज्ञानिक अध्ययन।
- 4 मीटर गहराई पर तापमान स्थिर पाया गया।
- पशुओं की उत्पादकता और स्वास्थ्य में सुधार की संभावना।
- डेयरी किसानों को बिजली लागत में राहत मिल सकती है।
FAQ Section
Q1. भू-तापीय ऊर्जा प्रणाली क्या है?
यह ऐसी तकनीक है जो जमीन के नीचे मौजूद स्थिर तापमान का उपयोग कर वातावरण को नियंत्रित करती है।
Q2. इस तकनीक का डेयरी किसानों को क्या लाभ होगा?
इससे पशुशालाओं का तापमान संतुलित रहेगा, ऊर्जा खर्च कम होगा और पशुओं की उत्पादकता बढ़ सकती है।
Q3. यह तकनीक कहां विकसित की गई है?
यह तकनीक ICAR-NDRI, करनाल द्वारा विकसित और परीक्षण की गई है।
Q4. ऊर्जा लागत में कितनी बचत हो सकती है?
वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत तक ऊर्जा खर्च कम किया जा सकता है।
Q5. पशुओं के लिए आदर्श तापमान कितना माना जाता है?
NDRI के अनुसार पशुओं की बेहतर उत्पादकता 30 से 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर देखी जाती है।
Conclusion:
ICAR-NDRI की यह भू-तापीय ऊर्जा आधारित तकनीक डेयरी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभर सकती है। इससे न केवल पशुओं को मौसम की मार से बचाया जा सकेगा, बल्कि किसानों के ऊर्जा खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। यदि यह तकनीक व्यापक स्तर पर अपनाई जाती है, तो हरियाणा सहित देशभर के डेयरी किसानों को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।

