संयुक्त राष्ट्र में GNDU कुलपति ने रखा सिख दृष्टिकोण, AI के नैतिक और सुरक्षित उपयोग पर दिया वैश्विक संदेश

जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में UNIDIR के अंतरधार्मिक संवाद में शामिल हुए प्रो. करमजीत सिंह, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शासन और नैतिकता पर रखे विचार

On

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU) के कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के अंतरधार्मिक संवाद में सिख धर्म का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास और शासन में नैतिकता, जवाबदेही और मानव कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की वकालत की।

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर GNDU कुलपति की महत्वपूर्ण भागीदारी

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU), अमृतसर के कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने हाल ही में स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में आयोजित संयुक्त राष्ट्र निशस्त्रीकरण अनुसंधान संस्थान (UNIDIR) के अंतरधार्मिक संवाद में वक्ता के रूप में भाग लिया।

यह संवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI), सुरक्षा और नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक विषयों पर केंद्रित था। कार्यक्रम का आयोजन UNIDIR द्वारा अपनी वैश्विक AI, सुरक्षा एवं नैतिकता सम्मेलन से पहले किया गया था।


दुनिया के प्रमुख धर्मों के प्रतिनिधियों ने साझा किए विचार

इस अंतरधार्मिक संवाद में विभिन्न धार्मिक परंपराओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें हिंदू, बौद्ध, सिख, ईसाई, यहूदी और इस्लाम धर्म के विद्वान शामिल थे।

कार्यक्रम में विश्व के विभिन्न धार्मिक दृष्टिकोणों से AI के नैतिक उपयोग, मानवता पर इसके प्रभाव और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की गई।


‘सरबत दा भला’ को बताया AI विकास का आधार

सिख दर्शन से जुड़ा वैश्विक संदेश

अपने संबोधन की शुरुआत प्रो. करमजीत सिंह ने पारंपरिक सिख अभिवादन "वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह" से की और अमृतसर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

उन्होंने कहा कि सिख धर्म की दैनिक अरदास "सरबत दा भला" यानी समस्त मानवता के कल्याण की कामना के साथ समाप्त होती है। यही सिद्धांत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और उसके नियमन का मार्गदर्शक होना चाहिए।

उनका कहना था कि AI का उद्देश्य केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि मानव समाज के व्यापक हितों की पूर्ति भी होना चाहिए।


‘जफरनामा’ से बताया नैतिक नेतृत्व का महत्व

जवाबदेही और नैतिक साहस की आवश्यकता

प्रो. सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा 1705 में लिखे गए ऐतिहासिक ‘जफरनामा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि नैतिक नेतृत्व के लिए अंतरात्मा, जवाबदेही और नैतिक साहस आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि जफरनामा केवल अन्याय के खिलाफ एक विरोध-पत्र नहीं था, बल्कि जिम्मेदार नेतृत्व और नैतिक निर्णय लेने का कालातीत मार्गदर्शक भी है।


AI गवर्नेंस के लिए बताए पांच प्रमुख सिद्धांत

सिख दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए प्रो. करमजीत सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शासन और विकास के लिए पांच महत्वपूर्ण सिद्धांतों का उल्लेख किया।

1. निर्भउ, निरवैर (Nirbhau, Nirvair)

AI का विकास भय, पक्षपात या शत्रुता के आधार पर नहीं होना चाहिए। तकनीक निष्पक्ष और न्यायसंगत होनी चाहिए।

2. किरत करो (Kirat Karo)

नवाचार और तकनीकी विकास ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।

3. वंड छको (Vand Chhako)

AI से मिलने वाले लाभ केवल कुछ शक्तिशाली संस्थाओं तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचें।

4. सेवा (Sewa)

तकनीक का उपयोग मानवता, गरिमा, शांति और सामूहिक कल्याण की सेवा के लिए होना चाहिए।

5. संगत और पंगत (Sangat-Pangat)

AI गवर्नेंस में समावेशिता, सामूहिक निर्णय और विभिन्न समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।


वैश्विक स्तर पर बढ़ रही AI नैतिकता पर चर्चा

तकनीक और मानव मूल्यों के बीच संतुलन पर जोर

संवाद के दौरान विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि AI जैसी उभरती तकनीकों के विकास में नैतिक मूल्यों, मानव अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारी को केंद्र में रखा जाना चाहिए।

विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक होगी जब वह मानवता के हितों की रक्षा करते हुए आगे बढ़े।


Key Highlights:

  • GNDU कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम में भाग लिया।
  • UNIDIR द्वारा AI, सुरक्षा और नैतिकता पर अंतरधार्मिक संवाद आयोजित किया गया।
  • प्रो. सिंह ने सिख धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए AI पर दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
  • "सरबत दा भला" को AI विकास का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।
  • जफरनामा का उदाहरण देकर नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • AI गवर्नेंस के लिए पांच प्रमुख सिख सिद्धांतों की व्याख्या की।
  • विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने नैतिक AI विकास पर चर्चा की।

FAQ Section

Q1. कार्यक्रम का आयोजन किसने किया था?

यह अंतरधार्मिक संवाद संयुक्त राष्ट्र निशस्त्रीकरण अनुसंधान संस्थान (UNIDIR) द्वारा आयोजित किया गया था।

Q2. GNDU की ओर से किसने भाग लिया?

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने कार्यक्रम में भाग लिया।

Q3. कार्यक्रम का मुख्य विषय क्या था?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सुरक्षा और नैतिकता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

Q4. प्रो. करमजीत सिंह ने कौन-सा प्रमुख संदेश दिया?

उन्होंने "सरबत दा भला" के सिद्धांत को AI विकास और शासन का आधार बनाने की बात कही।

Q5. AI गवर्नेंस के लिए कौन-कौन से सिद्धांत सुझाए गए?

निर्भउ-निरवैर, किरत करो, वंड छको, सेवा और संगत-पंगत जैसे सिख सिद्धांत प्रस्तुत किए गए।


Conclusion:

जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के इस महत्वपूर्ण मंच पर GNDU कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने सिख दर्शन के मूल्यों को आधुनिक तकनीकी चुनौतियों से जोड़ते हुए AI के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग का संदेश दिया। "सरबत दा भला" और "सेवा" जैसे सिद्धांतों को वैश्विक AI गवर्नेंस से जोड़ना इस बात का संकेत है कि तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय मूल्यों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।Screenshot_2399

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

कम रेट पर ठेके लेने वालों पर सख्त हुए CM योगी, घटिया निर्माण मिलने पर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश

Advertisement

नवीनतम

कम रेट पर ठेके लेने वालों पर सख्त हुए CM योगी, घटिया निर्माण मिलने पर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश कम रेट पर ठेके लेने वालों पर सख्त हुए CM योगी, घटिया निर्माण मिलने पर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि टेंडर अनुमान से बहुत कम दरों पर...
अमृतसर में कृषि स्टोर संचालक की गोली मारकर हत्या, बाइक सवार हमलावरों ने बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियां
यूपी की CM Fellowship Scheme बनी सुशासन की ताकत, युवा प्रोफेशनल्स से विकास को मिली रफ्तार
ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर सख्ती की मांग, पंजाब केमिस्ट्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार को सौंपा ज्ञापन
जेवर एयरपोर्ट की पहली उड़ान में सफर करेंगे 172 किसान, लखनऊ में CM योगी से करेंगे मुलाकात
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software