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ई-पंजाब ट्रांसफर पोर्टल में तकनीकी खामियों से परेशान शिक्षक, आवेदन सुधार और स्टेशन चयन में आई दिक्कतें
पोर्टल दोबारा खोलने के बावजूद नहीं मिली राहत, डेटा त्रुटियों और सिस्टम फेल होने से कई शिक्षक समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ई-पंजाब ट्रांसफर पोर्टल दोबारा खोलने के बावजूद तकनीकी समस्याएं जारी रहीं। कई शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पोर्टल अधिकांश समय काम नहीं कर रहा था, जिससे वे डेटा सुधार और स्टेशन वरीयता भरने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए।
ई-पंजाब ट्रांसफर पोर्टल की तकनीकी खामियों से बढ़ी शिक्षकों की परेशानी
पंजाब के सरकारी स्कूल शिक्षकों के तबादला प्रक्रिया से जुड़े ई-पंजाब ट्रांसफर पोर्टल में तकनीकी खामियां सोमवार को भी जारी रहीं। स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की शिकायतों को देखते हुए पोर्टल को दोबारा खोला था, ताकि वे डेटा संबंधी त्रुटियों को सुधार सकें और अपनी पसंदीदा पोस्टिंग (स्टेशन प्रेफरेंस) दर्ज कर सकें। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि पोर्टल अधिकांश समय सही ढंग से काम नहीं कर पाया।
शिकायतों के बाद दोबारा खोला गया था पोर्टल
विभाग को बड़ी संख्या में शिक्षकों से आवेदन प्रक्रिया में डेटा मिसमैच और अन्य तकनीकी त्रुटियों की शिकायतें मिली थीं।
गैर-कार्य दिवस पर खोला गया था पोर्टल
शिक्षकों के अनुसार विभाग ने पहले 14 जून (रविवार) को अचानक पोर्टल खोला था। चूंकि उस दिन सरकारी कार्यालय बंद थे, इसलिए कई शिक्षक आवश्यक संशोधन नहीं कर पाए।कई मामलों में डेटा सुधार के लिए ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) की मंजूरी जरूरी थी, जो अवकाश के कारण संभव नहीं हो सकी।
सोमवार को भी तकनीकी समस्याएं बनी रहीं
शिक्षा विभाग ने सोमवार को अंतिम अवसर के रूप में पोर्टल फिर से शुरू किया, लेकिन शिक्षकों का आरोप है कि सिस्टम दिनभर बाधित रहा।
केवल एक घंटे मिला काम करने का मौका
शिक्षकों के मुताबिक पोर्टल दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रखने की घोषणा की गई थी, लेकिन यह लगभग शाम 4 बजे के बाद ही सामान्य रूप से काम करने लगा।
इस कारण आवेदकों को रिकॉर्ड सुधारने और स्टेशन वरीयता भरने के लिए बेहद कम समय मिला।
विशेष बच्चे की देखभाल के लिए ट्रांसफर चाहती हैं शिक्षिका
जालंधर वेस्ट-1 ब्लॉक में कार्यरत शिक्षिका रजनी बाला ने बताया कि वह अपने विशेष आवश्यकता वाले बच्चे की देखभाल के लिए घर के नजदीक तबादला चाहती हैं।
पात्र होने के बावजूद दिखाया गया अपात्र
उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2011 से वर्तमान स्कूल में कार्यरत हैं और छूट प्राप्त (Exempted Staff) श्रेणी के तहत स्थानांतरण की पात्र हैं।
रजनी बाला के अनुसार:
- उनका आवेदन पहले ही सत्यापित हो चुका था।
- स्टेशन विकल्प भरने के दौरान पोर्टल पर उन्हें "अयोग्य" दिखाया गया।
- रविवार को कार्यालय बंद होने के कारण समस्या का समाधान नहीं हो सका।
सेवा रिकॉर्ड में त्रुटि सुधारने में भी आई बाधा
एक अन्य शिक्षक वेद राज ने बताया कि उनके सेवा रिकॉर्ड में जॉइनिंग डेट गलत दर्ज थी।
DDO की मंजूरी के कारण अटका सुधार
उन्होंने कहा कि पोर्टल खुलने के बाद उन्होंने रिकॉर्ड सुधारने का प्रयास किया, लेकिन प्रक्रिया DDO की मंजूरी पर निर्भर थी।
जब तक पोर्टल सही तरीके से काम करना शुरू हुआ, तब तक सुधार और आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा था।
शिक्षकों में बढ़ रहा असंतोष
लगातार तकनीकी समस्याओं के कारण शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि विभाग ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाना चाहता है, तो पोर्टल की कार्यक्षमता और तकनीकी सहायता को मजबूत करना जरूरी है।
शिक्षकों ने मांग की है कि जिन आवेदकों को तकनीकी कारणों से परेशानी हुई है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाए ताकि कोई भी पात्र कर्मचारी अवसर से वंचित न रह जाए।
विभाग पर उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब शिक्षा विभाग पारदर्शी और डिजिटल ट्रांसफर नीति को लागू करने पर जोर दे रहा है। लेकिन बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं ने पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Key Highlights:
- ई-पंजाब ट्रांसफर पोर्टल में तकनीकी समस्याएं जारी रहीं।
- डेटा सुधार और स्टेशन प्रेफरेंस भरने में शिक्षकों को हुई परेशानी।
- विभाग ने शिकायतों के बाद पोर्टल दोबारा खोला।
- रविवार को पोर्टल खुलने से DDO मंजूरी नहीं मिल सकी।
- कई शिक्षकों को पात्र होने के बावजूद अपात्र दिखाया गया।
- पोर्टल शाम 4 बजे के बाद ही सामान्य रूप से काम करने का दावा।
- अतिरिक्त समय देने की मांग तेज हुई।
FAQ Section
प्रश्न: ई-पंजाब ट्रांसफर पोर्टल क्यों दोबारा खोला गया?
उत्तर: डेटा मिसमैच और तकनीकी त्रुटियों की शिकायतों के बाद शिक्षकों को सुधार का अवसर देने के लिए पोर्टल दोबारा खोला गया।
प्रश्न: शिक्षकों की मुख्य शिकायत क्या है?
उत्तर: पोर्टल अधिकांश समय काम नहीं कर रहा था, जिससे वे आवश्यक संशोधन और स्टेशन चयन नहीं कर सके।
प्रश्न: DDO की भूमिका क्या है?
उत्तर: सेवा रिकॉर्ड में कई संशोधनों के लिए ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) की मंजूरी आवश्यक होती है।
प्रश्न: शिक्षकों ने क्या मांग की है?
उत्तर: तकनीकी समस्याओं से प्रभावित शिक्षकों को अतिरिक्त समय और सुधार का नया अवसर देने की मांग की गई है।
प्रश्न: किन शिक्षकों को सबसे अधिक परेशानी हुई?
उत्तर: जिनके रिकॉर्ड में त्रुटियां थीं या जिन्हें पात्र होने के बावजूद पोर्टल पर अपात्र दिखाया गया, उन्हें सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
Conclusion:
ई-पंजाब ट्रांसफर पोर्टल को दोबारा खोलने का उद्देश्य शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करना था, लेकिन लगातार तकनीकी खामियों ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दीं। यदि विभाग समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं करता, तो कई पात्र शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित रह सकते हैं। ऐसे में पारदर्शी और प्रभावी डिजिटल व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

