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चार साल बाद परिवार से मिली बिछड़ी महिला, जिला प्रशासन और सोशल सिक्योरिटी विभाग की कोशिशें रंग लाईं
बौद्धिक दिव्यांगों के सामुदायिक गृह में रह रही 43 वर्षीय महिला की आधार कार्ड और काउंसलिंग की मदद से पश्चिम बंगाल स्थित परिवार से हुई मुलाकात।
करीब चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के सामुदायिक गृह में रह रही 43 वर्षीय महिला अपने परिवार से दोबारा मिल सकी। जिला प्रशासन और सोशल सिक्योरिटी विभाग के संयुक्त प्रयासों से महिला की पहचान कर उसके पश्चिम बंगाल स्थित घर का पता लगाया गया।
चार साल बाद परिवार से हुआ भावुक मिलन
करीब चार वर्षों के इंतजार के बाद एक 43 वर्षीय महिला, जो बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संचालित कम्युनिटी होम फॉर मेंटली रिटार्डेड में रह रही थी, आखिरकार अपने परिवार से मिल गई। जिला प्रशासन और सोशल सिक्योरिटी विभाग के लगातार प्रयासों से महिला का पश्चिम बंगाल स्थित पैतृक घर खोजा गया और उसका परिवार से पुनर्मिलन संभव हो सका।
महिला 5 जुलाई 2021 से मजीठा रोड स्थित सामुदायिक गृह में रह रही थी।
जिला प्रशासन की पहल से मिली सफलता

इसके बावजूद विभाग ने लगातार प्रयास जारी रखे, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।
आधार कार्ड बना परिवार तक पहुंचने का माध्यम
अधिकारियों के अनुसार, महिला के आधार कार्ड से उसके मूल गांव की जानकारी मिली। इसके बाद विभाग ने एक काउंसलर को नियुक्त किया, जिसने महिला से बातचीत कर उसके परिवार से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाईं।
इन्हीं सूचनाओं के आधार पर प्रशासन ने पश्चिम बंगाल में उसके परिजनों से संपर्क स्थापित किया और पुनर्मिलन की प्रक्रिया पूरी की।
सामाजिक सुरक्षा विभाग की पहल बनी मिसाल
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशीलता और धैर्य का एक अच्छा उदाहरण है। विभाग के प्रयासों से न केवल एक महिला अपने परिवार तक पहुंच सकी, बल्कि वर्षों से बिछड़े रिश्तों का भी पुनर्मिलन संभव हुआ।
Key Highlights:
- चार साल बाद 43 वर्षीय महिला अपने परिवार से मिली।
- महिला 5 जुलाई 2021 से मजीठा रोड स्थित सामुदायिक गृह में रह रही थी।
- जिला प्रशासन और सोशल सिक्योरिटी विभाग ने मिलकर परिवार का पता लगाया।
- आधार कार्ड और काउंसलिंग की मदद से पश्चिम बंगाल स्थित परिवार तक पहुंच बनाई गई।
- भाषा संबंधी कठिनाइयों के बावजूद अधिकारियों ने लगातार प्रयास जारी रखे।
FAQ Section
प्रश्न 1: महिला कितने समय बाद अपने परिवार से मिली?
उत्तर: करीब चार वर्ष बाद।
प्रश्न 2: महिला कहां रह रही थी?
उत्तर: वह मजीठा रोड स्थित बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के सामुदायिक गृह में रह रही थी।
प्रश्न 3: परिवार का पता कैसे चला?
उत्तर: महिला के आधार कार्ड और काउंसलिंग के दौरान मिली जानकारी की मदद से उसके मूल गांव और परिवार का पता लगाया गया।
प्रश्न 4: इस अभियान में किस विभाग की प्रमुख भूमिका रही?
उत्तर: जिला प्रशासन और सोशल सिक्योरिटी विभाग की।
Conclusion
चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक महिला का अपने परिवार से पुनर्मिलन प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा विभाग की संवेदनशील कार्यशैली का प्रेरणादायक उदाहरण है। यह घटना दर्शाती है कि समन्वित प्रयास, धैर्य और मानवीय दृष्टिकोण से बिछड़े परिवारों को फिर से मिलाया जा सकता है।
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