दो साल के भीतर दूसरी मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

अदालत ने कहा—कानूनी अधिकार वित्तीय नियमों से ऊपर

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहली मातृत्व अवकाश के दो साल के भीतर दूसरी छुट्टी मांगने पर इसे केवल इसी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि कोई महिला कर्मचारी पहली मातृत्व अवकाश के दो साल के भीतर दूसरी मातृत्व अवकाश मांगती है, तो इसे केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश से संबंधित अधिकार एक वैधानिक (कानूनी) अधिकार है और यह वित्तीय हैंडबुक या प्रशासनिक नियमों से ऊपर है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब कानून किसी कर्मचारी को विशेष अधिकार देता है, तो उसे केवल आंतरिक नियमों या दिशानिर्देशों के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।

इस निर्णय के साथ हाई कोर्ट ने महिला कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूती देते हुए यह सुनिश्चित किया कि उन्हें मातृत्व अवकाश का लाभ बिना किसी अनुचित बाधा के मिल सके।

यह फैसला उन मामलों में अहम माना जा रहा है, जहां सरकारी या अन्य संस्थानों में कर्मचारियों को नियमों का हवाला देकर ऐसी छुट्टियों से वंचित किया जाता रहा है।

 
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Edited By: Karan Singh

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