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यूपी में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट जारी
बिल्डिंग नियमों में एकरूपता लाने की तैयारी, FAR समेत कई प्रावधानों में बदलाव प्रस्तावित
उत्तर प्रदेश सरकार ने इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटीज़ के लिए यूनिफाइड रेगुलेशंस 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें बिल्डिंग नियमों को सरल और एक समान बनाने का प्रस्ताव है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटीज़ (IDA) के लिए यूनिफाइड रेगुलेशंस 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है और इस पर लोगों से आपत्तियां व सुझाव मांगे हैं।
प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य विभिन्न प्रक्रियाओं—जैसे नक्शा स्वीकृति, प्लॉट का एकीकरण (अमलगमेशन), कवर एरिया की सीमा, अग्नि सुरक्षा मानक, सड़कों की चौड़ाई और भवनों की ऊंचाई—को सरल और व्यवस्थित करना है।
इस ड्राफ्ट में एक अहम बदलाव फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) से जुड़ा है, जो यह तय करता है कि किसी प्लॉट पर कितनी निर्माण की अनुमति होगी। वर्तमान में अलग-अलग विकास प्राधिकरणों में FAR की सीमा अलग-अलग है और सेटबैक, ग्राउंड कवरेज तथा भवन की ऊंचाई को लेकर काफी विवेकाधिकार भी होता है।
मौजूदा समय में औद्योगिक प्लॉट्स के लिए FAR आमतौर पर 0.6 से 2 के बीच, ग्रुप हाउसिंग के लिए 2.75 से 3.5, संस्थागत परियोजनाओं के लिए 0.8 से 2.75 और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए 1.2 से 4 तक होता है।
ये नए नियम नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, यूपीएसआईडीए, यूपीईआईडीए सहित सभी मौजूदा और भविष्य की इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटीज़ पर लागू होंगे।
अधिकारियों के अनुसार, अभी हर प्राधिकरण के नियम अलग-अलग होने से लोगों में भ्रम पैदा होता है और प्रशासन के लिए इन्हें लागू करना भी मुश्किल होता है।
सरकार का उद्देश्य सभी औद्योगिक निकायों के लिए एक समान बिल्डिंग नियम लागू करना है, जिससे पारदर्शिता बढ़े और नियमों को लागू करना आसान हो सके।
प्रस्तावित बदलावों में FAR के अलावा अन्य निर्माण मानकों में भी संशोधन शामिल हैं, जिससे विकास कार्यों को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सके।

