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उत्तर प्रदेश में आत्महत्या के मामलों में चिंता बढ़ी, लखनऊ और मेरठ में रिकॉर्ड उछाल
एनसीआरबी 2024 रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में आत्महत्या के मामलों में मामूली गिरावट आई, लेकिन उत्तर प्रदेश में आंकड़े लगभग स्थिर रहे। लखनऊ और मेरठ जैसे शहरों में आत्महत्या के मामलों में तेज वृद्धि दर्ज की गई।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में आत्महत्या के मामलों में कोई खास कमी नहीं आई। खास तौर पर लखनऊ, मेरठ और प्रयागराज में मामलों में बड़ा उछाल देखा गया, जिससे शहरी तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर आत्महत्या के मामलों में कमी आने के बावजूद उत्तर प्रदेश इस मामले में अलग तस्वीर पेश कर रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट “Accidental Deaths & Suicides in India 2024” के अनुसार, राज्य में आत्महत्या के कुल मामलों में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि लखनऊ और मेरठ जैसे प्रमुख शहरों में मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
लखनऊ देश के सबसे चिंताजनक शहरों में उभरकर सामने आया है। वर्ष 2023 में जहां राजधानी में 218 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 389 हो गई। यह लगभग 78.44 प्रतिशत की वृद्धि है, जो देश के बड़े शहरों में सबसे अधिक बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है।
मेरठ में इससे भी अधिक तेज वृद्धि दर्ज की गई। यहां आत्महत्या के मामले 29 से बढ़कर 73 हो गए, जो 151.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वहीं पटना में भी 78.12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जहां मामले 160 से बढ़कर 285 हो गए।प्रयागराज में भी स्थिति चिंताजनक रही। यहां आत्महत्या के मामले 140 से बढ़कर 194 तक पहुंच गए। आगरा में 2023 के 147 मामलों की तुलना में 2024 में 157 मामले दर्ज किए गए।
हालांकि कानपुर में कुछ सुधार देखने को मिला। वहां 2023 में 724 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 687 रह गए। वाराणसी में आत्महत्या के मामलों की संख्या 197 पर स्थिर रही।
दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े महानगरों में आत्महत्या के मामलों में कमी या स्थिरता देखने को मिली। दिल्ली में 7.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि मुंबई में 0.6 प्रतिशत की मामूली कमी आई। चेन्नई में भी हल्की गिरावट देखी गई।
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2024 में कुल 9,180 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 9,154 थी। यानी राज्य में लगभग 0.3 प्रतिशत का मामूली बदलाव हुआ, जो यह दर्शाता है कि आत्महत्या के मामलों में कोई वास्तविक कमी नहीं आई है।
राष्ट्रीय स्तर पर 2024 में कुल 1,70,746 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 1,71,418 थी। यानी पूरे देश में 0.4 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहे शहरीकरण, बढ़ते मानसिक दबाव और सामाजिक तनाव के कारण बड़े शहरों में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

