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प्रयागराज का समोसा बना पहचान, ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन क्यूज़ीन’ योजना में मिला स्थान
136 साल पुरानी परंपरा से लेकर आधुनिक दुकानों तक, समोसे की खुशबू बनी शहर की पहचान
प्रयागराज का प्रसिद्ध समोसा अब उत्तर प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन क्यूज़ीन’ योजना के तहत जिले की आधिकारिक पहचान बन गया है। यह कदम स्थानीय खानपान को बढ़ावा देने और वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संगम नगरी प्रयागराज में समोसे की खुशबू इतनी खास है कि लोग उसे ढूंढने नहीं जाते, बल्कि उसकी महक खुद उन्हें अपनी ओर खींच लेती है। गरम देसी घी और मसालों की सुगंध दूर से ही लोगों को आकर्षित कर लेती है।
लोकनाथ में 136 साल पुरानी हरी राम एंड संस की विरासत हो या सिविल लाइंस की हीरा हलवाई और बैहराना की ग्रीन स्वीट हाउस जैसी मशहूर दुकानें—हर जगह समोसे तलने का दृश्य एक परंपरा जैसा लगता है। बड़ी कढ़ाइयों में सुनहरे और कुरकुरे समोसे तले जाते हैं और ग्राहक स्वाद लेने के लिए कतार में खड़े रहते हैं।
हलवाई अपने अनुभव से आटा गूंथकर उसमें मसालेदार आलू या खास मसाला भरते हैं और उसे त्रिकोण आकार देकर तलते हैं। यह प्रक्रिया न सिर्फ स्वाद बल्कि कला का भी एक रूप है।
मालवीय नगर निवासी 56 वर्षीय व्यापारी संजय सिंह जैसे लोग पिछले 40 सालों से हरी राम एंड संस के मिनी मसाला समोसे का स्वाद लेते आ रहे हैं। उनका कहना है कि ये समोसे खास हैं क्योंकि इनमें आलू नहीं बल्कि विशेष मसाला भरा होता है, जो लंबे समय तक खराब भी नहीं होता।
अब यह रोजमर्रा का व्यंजन एक नई पहचान हासिल कर चुका है।
उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन क्यूज़ीन’ (ODOC) योजना के तहत प्रयागराज के समोसे को जिले की विशिष्ट डिश के रूप में चुना गया है। जनवरी 2026 में शुरू की गई यह योजना ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन प्रोडक्ट’ (ODOP) से प्रेरित है और इसका उद्देश्य हर जिले के एक खास व्यंजन को पहचान देना है।
इस योजना के तहत खाद्य उद्यमिता को बढ़ावा देना, स्वच्छता मानकों में सुधार करना और स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाना प्रमुख लक्ष्य हैं।
उद्योग विभाग के डिप्टी कमिश्नर शरद टंडन के अनुसार, इस चयन प्रक्रिया में खाद्य विशेषज्ञों, इतिहासकारों और स्थानीय व्यापार से जुड़े लोगों से व्यापक सलाह-मशविरा किया गया। विभिन्न स्तरों पर सर्वे और विचार-विमर्श के बाद समोसे को प्रयागराज की प्रतिनिधि डिश के रूप में चुना गया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस चयन में समोसे के किसी एक प्रकार को नहीं, बल्कि पूरे व्यंजन को ही जिले की पहचान माना गया है—चाहे वह सूखा समोसा हो, आलू वाला या मीठा।
समोसे के उत्पादन और बिक्री को लेकर विस्तृत सर्वे भी पूरा कर सरकार को सौंप दिया गया है, जिससे भविष्य में इस पारंपरिक व्यंजन को और बढ़ावा दिया जा सके।
