रेल सुरक्षा पर सख्ती: यूपी GRP अब दोषसिद्धि पर दे रहा जोर

रेलवे एक्ट की धारा 152 के तहत तोड़फोड़ और पत्थरबाजी पर कड़ी कार्रवाई

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यूपी सरकार की GRP ने रेल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई रणनीति अपनाई है, जिसमें मामलों के पंजीकरण के बजाय दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक बदलाव के तहत उत्तर प्रदेश सरकार की Government Railway Police (GRP) ने सामान्य पुलिसिंग से हटकर एक आक्रामक और परिणाम-आधारित प्रवर्तन नीति अपनाई है। इस नई राज्यव्यापी रणनीति का मुख्य लक्ष्य रेलवे तोड़फोड़ और पत्थरबाजी जैसे मामलों में अदालतों से दोषसिद्धि सुनिश्चित करना है।

GRP की इस रणनीति के केंद्र में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 152 का सख्ती से लागू किया जाना है। यह एक कड़ा कानूनी प्रावधान है, जो ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले दुर्भावनापूर्ण कृत्यों से संबंधित है।

रेलवे महानिदेशक (DG) प्रकाश डी ने बताया कि वर्ष 2025 के 400 से अधिक ऐसे मामले अभी भी ट्रायल कोर्ट में लंबित हैं, जिनमें से कई प्रक्रियागत देरी या कमजोर फॉलो-अप के कारण अटके हुए हैं। उन्होंने लखनऊ, मुरादाबाद, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा और झांसी सहित सभी छह GRP जोनों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सबसे गंभीर 10 मामलों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएं और वरिष्ठ स्तर पर उनकी नियमित निगरानी करें।

DG ने कहा, “सिर्फ मामले दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। असली लक्ष्य दोषसिद्धि तक पहुंचना होना चाहिए, क्योंकि इससे ही अपराधियों में डर पैदा होगा।”

इस रणनीति के तहत जांच अधिकारियों, अभियोजन एजेंसियों और रेलवे प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया है।

रेलवे अधिनियम की धारा 152 के अंतर्गत पटरियों पर बाधा डालना, रेलवे सिस्टम से छेड़छाड़ करना या पत्थरबाजी जैसी गतिविधियां शामिल हैं, जो चलती ट्रेन को नुकसान पहुंचा सकती हैं या यात्रियों को घायल कर सकती हैं। अपराध की गंभीरता के आधार पर इसमें 10 साल तक की सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है, खासकर जब इससे गंभीर खतरा या नुकसान होता है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पत्थरबाजी, जिसे अक्सर एक छोटा अपराध समझा जाता है, अब इस सख्त कानूनी ढांचे के तहत देखा जा रहा है यदि इससे यात्रियों की सुरक्षा को खतरा होता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “चलती ट्रेन पर पत्थर लगने से गंभीर चोट या मृत्यु तक हो सकती है, और कानून इस जोखिम को मान्यता देता है।”

हाल ही में रायबरेली के ऊंचाहार में एक मामले में पत्थरबाजी करने वाले व्यक्ति को एक साल की सजा सुनाई गई, जिसे अधिकारी एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं जो कानून के डर को मजबूत करेगा।Screenshot_932

Edited By: Karan Singh

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