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हरियाणा के 22 बाल देखभाल संस्थान वित्तीय संकट में, अनुदान जारी न होने से परेशानी
करीब 500 बच्चों पर असर, भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतें पूरी करना हुआ मुश्किल
सरकारी अनुदान में देरी के कारण हरियाणा के कई बाल देखभाल संस्थान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, जिससे बच्चों की बुनियादी जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।
हरियाणा के 22 बाल देखभाल संस्थान गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, क्योंकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकारी अनुदान अभी तक जारी नहीं किया गया है। इन संस्थानों में करीब 500 बच्चे रहते हैं और उनका कहना है कि इस देरी के कारण भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक खर्च जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
गैर-सरकारी बाल देखभाल संस्थानों के महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार, राज्य में सभी संस्थानों का निरीक्षण पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद फंड अभी तक जारी नहीं किए गए हैं। चूंकि ये संस्थान सरकारी सहायता पर काफी हद तक निर्भर हैं, इसलिए इस देरी ने उन पर भारी दबाव डाल दिया है।

महासंघ ने यह भी चिंता जताई है कि विभाग ने संकेत दिया है कि अब अनुदान अप्रैल 2026 के बाद ही जारी हो सकता है, जब केंद्र सरकार से धन प्राप्त होगा।
नाथ ने कहा, “हम बिना अनुदान के राशन, दूध, स्कूल फीस, किताबें और यूनिफॉर्म जैसे खर्च कैसे उठाएं? ये बच्चे पूरी तरह हम पर निर्भर हैं और हम सरकार की सहायता की उम्मीद करते हैं।”
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में महासंघ ने कहा कि समय पर सहायता मिलना सैकड़ों बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है और यह किशोर न्याय अधिनियम के तहत काम कर रहे संस्थानों के समर्थन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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