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हरियाणा में श्रमिकों के लिए बड़ा ऐलान, बनेगा स्टेट सोशल सिक्योरिटी बोर्ड
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया ऐलान, मजदूरों को मिलेगा व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवच
हरियाणा सरकार ने श्रमिकों के कल्याण के लिए स्टेट सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और DBT के जरिए करोड़ों रुपये ट्रांसफर करने की घोषणा की।
‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन और श्रमिक कल्याण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को ताऊ देवी लाल स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में संगठित श्रमिकों के लिए स्टेट सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन की घोषणा की।
यह प्रस्तावित बोर्ड सामाजिक सुरक्षा में मौजूद अंतर को दूर करने के लिए बनाया जा रहा है, खासतौर पर ऑटो चालकों और व्यावसायिक वाहन चालकों को लाभ देने के लिए—जो भारतीय मजदूर संघ की लंबे समय से मांग रही है। मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा कि श्रम देश की अर्थव्यवस्था का “सबसे मजबूत स्तंभ” है।
ऐतिहासिक वेतन सुधार और DBT ट्रांसफर:
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा औद्योगिक संबंधों में अग्रणी बन गया है और देश का पहला राज्य है जिसने ‘कोड ऑन वेजेज’ के तहत न्यूनतम मूल वेतन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू की है।
उन्होंने बताया, “2014 में न्यूनतम मजदूरी 6,289 रुपये थी, जो आज हमारी सरकार के तहत बढ़कर 19,425 रुपये हो गई है।” यानी पिछले एक दशक में मजदूरी तीन गुना से अधिक बढ़ी है।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिचौलियों को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने 34,197 श्रमिकों के बैंक खातों में 40 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए। यह राशि 29 विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए दी गई।
स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूती:
श्रमिकों के सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार ने कई बुनियादी ढांचा सुधारों की योजना बनाई है—
- स्वास्थ्य: मानेसर स्थित ESI अस्पताल को 100 से बढ़ाकर 200 बेड का किया जाएगा और इसे मेडिकल कॉलेज में बदला जाएगा। साथ ही हरसारू, कादीपुर और फतेहाबाद में नए डिस्पेंसरी खोले जाएंगे।
- ‘सेफ वर्कर’ पहल: औद्योगिक श्रमिकों के लिए मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच और निर्माण मजदूरों के लिए व्यापक चिकित्सा सुविधा दी जाएगी।
- शिक्षा: श्रमिकों के बच्चों के लिए कक्षा 6 से 12 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने हेतु अटल रेजिडेंशियल स्कूल स्थापित किए जाएंगे।
डिजिटल और रोजगार सुरक्षा:
सरकार श्रमिकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर रोजगार सुरक्षा और सुविधाओं की पहुंच को और मजबूत करने पर काम कर रही है। अभी तक 54.32 लाख से अधिक श्रमिक इस प्रणाली में पंजीकृत किए जा चुके हैं।
इस पहल को श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

