गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को, यूपी बनेगा देश का इंफ्रास्ट्रक्चर हब

594 किमी लंबा देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे, पश्चिम से पूर्व यूपी की दूरी होगी कम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे, जिससे यूपी में कनेक्टिविटी, रोजगार और आर्थिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

यदि एक्सप्रेसवे को विकास का पैमाना माना जाए, तो उत्तर प्रदेश जल्द ही देश के इंफ्रास्ट्रक्चर मानचित्र पर अग्रणी स्थान हासिल करने जा रहा है, क्योंकि यहां भारत के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60% हिस्सा होगा।

29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई जिले से 594 किलोमीटर लंबे छह-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे, जो देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा।

यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा समय को कम करेगा और ग्रामीण क्षेत्रों को विशेष लाभ देगा, जो अब तक विकास की मुख्यधारा से बाहर रहे हैं।

यह परियोजना योगी आदित्यनाथ सरकार की 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर पहल मानी जा रही है। इससे पहले 28 मार्च को प्रधानमंत्री ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था।

करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे से मेरठ से प्रयागराज तक सीधा संपर्क स्थापित होगा। यह 12 जिलों—हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज—से होकर गुजरेगा।

यह एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला माना जा रहा है और उत्तर प्रदेश को इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास में अग्रणी बनाएगा।

मौजूदा हाईवे की तुलना में यह एक्सप्रेसवे अधिक प्रभावी होगा, खासकर उत्तर भारत से पूर्वी भारत—जैसे दक्षिण बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल—जाने वाले ट्रैफिक के लिए।

सरकार ने एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने की भी योजना बनाई है। इस परियोजना में 140 जल निकाय, 7 रोड ओवरब्रिज, 17 इंटरचेंज, 14 बड़े पुल, 126 छोटे पुल, 28 फ्लाईओवर, 50 वाहन अंडरपास, 171 लाइट व्हीकल अंडरपास, 160 छोटे वाहन अंडरपास और 946 कलवर्ट शामिल हैं, जो इसे देश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक बनाते हैं।

उद्घाटन से पहले उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने इस एक्सप्रेसवे के साथ विकसित किए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (IMLCs) में प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ आम जनता और निवेशकों तक पहुंचे। इन क्लस्टर्स के जरिए 10 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

यह परियोजना 500 से अधिक गांवों के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हापुड़ और बुलंदशहर जैसे जिलों में किसान मानते हैं कि बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी।

गेहूं, गन्ना, आलू और दाल जैसी फसलों का परिवहन अधिक कुशल होगा, जिससे लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे। साथ ही कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स हब के विकास की भी संभावना है।

एक्सप्रेसवे के किनारे पेट्रोल पंप, होटल, ढाबे, ट्रांसपोर्ट हब और छोटे उद्योग विकसित होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। निर्माण के दौरान भी कई लोगों को रोजगार मिला है और भविष्य में ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

गुणवत्ता और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने स्विट्जरलैंड की ETH ज्यूरिख यूनिवर्सिटी और RTDT लेबोरेट्रीज AG के साथ समझौता किया है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेंसर आधारित तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे निर्माण के दौरान ही सड़क की खामियों का पता लगाकर उन्हें ठीक किया जा सके।

इस तकनीक के सफल उपयोग के बाद इसे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भी लागू किया जाएगा।

 
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Edited By: Karan Singh

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