हरियाणा के रेवाड़ी में 1,030 बच्चों ने छोड़ा स्कूल, प्रदेश में तीसरे स्थान पर जिला; बच्चों को वापस शिक्षा से जोड़ने की मुहिम शुरू

UDISE+ के आंकड़ों में गुरुग्राम और नूंह के बाद रेवाड़ी में सबसे ज्यादा ड्रॉपआउट; सरकारी स्कूलों में 2023 से 2026 के बीच 6,562 विद्यार्थियों की संख्या घटी

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हरियाणा के रेवाड़ी जिले में चालू शैक्षणिक वर्ष के दौरान सरकारी और निजी स्कूलों के 1,030 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी। इस आंकड़े के साथ रेवाड़ी प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। वहीं, जिला प्रशासन ने स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में बच्चों के स्कूल छोड़ने का मामला शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। चालू शैक्षणिक वर्ष के दौरान जिले के सरकारी और निजी स्कूलों से कुल 1,030 विद्यार्थियों के ड्रॉपआउट होने की जानकारी सामने आई है। इस आंकड़े के साथ रेवाड़ी हरियाणा के उन जिलों में तीसरे स्थान पर है, जहां स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई।

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में सबसे अधिक 1,122 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा, जबकि नूंह में यह संख्या 1,054 रही। रेवाड़ी तीसरे स्थान पर रहा। इसके बाद करनाल में 928 और फरीदाबाद में 927 विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने के मामले सामने आए।

यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

H2: सरकारी स्कूलों में तीन साल में 6,562 विद्यार्थियों की कमी

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रेवाड़ी जिले के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2023 से 2026 के बीच कुल 6,562 विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है। नामांकन में आई इस गिरावट ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की भागीदारी और उन्हें शिक्षा व्यवस्था से जोड़े रखने को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद जिले के लिए एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। राज्य शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा पहली से आठवीं तक लगभग शून्य ड्रॉपआउट दर बनाए रखी।

इससे स्पष्ट होता है कि अलग-अलग शैक्षणिक स्तरों और आंकड़ों के आधार पर स्थिति में अंतर हो सकता है। स्कूल छोड़ने वाले कुल विद्यार्थियों और प्रारंभिक स्तर की ड्रॉपआउट दर को एक ही मापदंड नहीं माना जाना चाहिए।

H2: स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस शिक्षा से जोड़ने का अभियान

बच्चों को दोबारा स्कूल तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की पहचान की जा रही है, ताकि उन्हें फिर से शिक्षा व्यवस्था में शामिल किया जा सके।

रेवाड़ी के अतिरिक्त उपायुक्त राहुल मोदी के अनुसार, जिले में ऐसे बच्चों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है, जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। सर्वे के जरिए उनकी पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

H3: 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए ब्रिज कोर्स

प्रशासन के मुताबिक, 6 से 14 वर्ष की आयु के उन बच्चों को विशेष प्रशिक्षण केंद्रों (STCs) में ब्रिज कोर्स कराया जा रहा है, जो नियमित शिक्षा से बाहर हो गए हैं।

इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप कक्षा में प्रवेश लेने के लिए तैयार करना है। इससे लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहे बच्चों को दोबारा स्कूल की मुख्यधारा में शामिल होने में मदद मिल सकती है।

विशेष प्रशिक्षण के जरिए बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने और उन्हें नियमित पढ़ाई के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

H2: ड्रॉपआउट रोकना शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती

रेवाड़ी में विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने के आंकड़े और सरकारी स्कूलों में घटता नामांकन शिक्षा विभाग के सामने दो अलग-अलग चुनौतियां पेश करते हैं। एक ओर स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर मौजूदा विद्यार्थियों को नियमित रूप से स्कूल में बनाए रखने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने होंगे।

जिला प्रशासन का सर्वेक्षण और ब्रिज कोर्स अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। हालांकि, बच्चों के स्कूल छोड़ने के कारणों की पहचान करना और उनकी जरूरतों के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा, ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

Key Highlights:

  1. रेवाड़ी जिले में चालू शैक्षणिक वर्ष के दौरान 1,030 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा।

  2. UDISE+ के आंकड़ों में रेवाड़ी हरियाणा में तीसरे स्थान पर है।

  3. गुरुग्राम में 1,122 और नूंह में 1,054 विद्यार्थियों के ड्रॉपआउट होने की जानकारी दी गई।

  4. करनाल में 928 और फरीदाबाद में 927 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा।

  5. रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में 2023 से 2026 के बीच विद्यार्थियों की संख्या 6,562 कम हुई।

  6. वर्ष 2025-26 में रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में कक्षा पहली से आठवीं तक ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य रही।

  7. जिला प्रशासन स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान के लिए सर्वेक्षण कर रहा है।

  8. 6 से 14 वर्ष के बच्चों को विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में ब्रिज कोर्स कराया जा रहा है।

FAQ Section:

प्रश्न 1: रेवाड़ी में कितने विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा?

उत्तर: उपलब्ध UDISE+ आंकड़ों के अनुसार, चालू शैक्षणिक वर्ष के दौरान रेवाड़ी जिले में सरकारी और निजी स्कूलों के 1,030 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा।

प्रश्न 2: हरियाणा में सबसे अधिक ड्रॉपआउट किन जिलों में दर्ज हुए?

उत्तर: उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में 1,122 और नूंह में 1,054 विद्यार्थियों के ड्रॉपआउट होने की जानकारी है। रेवाड़ी 1,030 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है।

प्रश्न 3: रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में नामांकन कितना घटा?

उत्तर: शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2026 के बीच जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में कुल 6,562 की गिरावट आई।

प्रश्न 4: बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए क्या किया जा रहा है?

उत्तर: जिला प्रशासन स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की पहचान के लिए सर्वेक्षण कर रहा है। इसके साथ ही 6 से 14 वर्ष के बच्चों को विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में ब्रिज कोर्स कराया जा रहा है।

प्रश्न 5: ब्रिज कोर्स का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: ब्रिज कोर्स का उद्देश्य पढ़ाई से दूर हो चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा के लिए तैयार करना और उनकी उम्र के अनुरूप कक्षा में प्रवेश दिलाने में मदद करना है।

प्रश्न 6: क्या रेवाड़ी में प्राथमिक स्तर पर भी ड्रॉपआउट की समस्या है?

उत्तर: राज्य शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में कक्षा पहली से आठवीं तक ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य रही। यह आंकड़ा कुल ड्रॉपआउट संख्या से अलग शैक्षणिक स्तर को दर्शाता है।

Conclusion:

रेवाड़ी जिले में 1,030 विद्यार्थियों का स्कूल छोड़ना और सरकारी स्कूलों में नामांकन का घटना शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। हालांकि, कक्षा पहली से आठवीं तक लगभग शून्य ड्रॉपआउट दर एक सकारात्मक संकेत है। जिला प्रशासन की ओर से चलाया जा रहा सर्वेक्षण और ब्रिज कोर्स अभियान बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने में मददगार हो सकता है। अब जरूरत इस बात की है कि स्कूल छोड़ने के कारणों की पहचान कर बच्चों को नियमित शिक्षा जारी रखने के लिए उचित सहयोग दिया जाए।Screenshot_584

Edited By: Atul Sharma

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