अंबाला में पराली जलाने पर नजर रखेंगे ड्रोन, 35 गांव संवेदनशील घोषित; इस साल शून्य घटनाओं का लक्ष्य

कृषि विभाग ने निगरानी के लिए तैनात किए दो ड्रोन, धान की 45% से अधिक कटाई पूरी; बेमौसम बारिश से मंडियों में भीगा धान, किसानों की बढ़ी चिंता

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हरियाणा के अंबाला जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने दो ड्रोन तैनात किए हैं। जिले के 35 गांवों को पराली जलाने के लिहाज से संवेदनशील माना गया है। इस बीच, बेमौसम बारिश से मंडियों में रखा धान भीगने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है।

हरियाणा के अंबाला जिले में धान की कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। विभाग ने दो ड्रोन तैनात किए हैं, जिनकी मदद से खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जाएगी। जिले के 35 गांवों को पराली में आग लगाने की आशंका के लिहाज से संवेदनशील चिह्नित किया गया है।

विभाग के अनुसार, इस बार जिले में सक्रिय आग की घटनाओं (Active Fire Locations यानी AFLs) को शून्य तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

हालांकि, दूसरी ओर बेमौसम बारिश ने धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मंडियों में खुले में रखी धान की बोरियां भीगने से खरीद और कटाई की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

H2: अंबाला के 35 संवेदनशील गांवों पर ड्रोन से निगरानी

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए जिले में दो ड्रोन तैनात किए हैं। उपनिदेशक कृषि (DDA) डॉ. वजीर सिंह के अनुसार, ड्रोन के माध्यम से प्रतिदिन एक गांव की निगरानी की जाएगी।

इस दौरान खेतों में फसल अवशेष जलाने की संभावित घटनाओं का पता लगाया जाएगा। ड्रोन से प्राप्त सर्वेक्षण संबंधी जानकारी सुरक्षित रखी जाएगी और संबंधित खेतों तथा स्थानों का विवरण प्रतिदिन जिला प्रशासन के साथ साझा किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं की समय पर पहचान करना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए जानकारी उपलब्ध कराना है।

H3: डिजिटल निगरानी से मिलेगी जानकारी

ड्रोन के माध्यम से निगरानी होने से खेतों में आग लगने की घटनाओं की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है। विभाग सर्वेक्षण के दौरान मिलने वाली जानकारी को रिकॉर्ड करेगा, ताकि संबंधित स्थानों की पहचान की जा सके और प्रशासन आवश्यक कदम उठा सके।

जिले के 35 संवेदनशील गांवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों के बारे में जानकारी देकर फसल अवशेष जलाने से रोका जाए।

H2: इस साल पराली जलाने की घटनाएं शून्य करने का लक्ष्य

उपनिदेशक कृषि डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि जिले में सक्रिय आग की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों के दौरान धीरे-धीरे कमी आई है। पिछले साल अंबाला में आठ सक्रिय आग के स्थान दर्ज किए गए थे, जिनके संबंध में तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं।

उन्होंने कहा कि कृषि विभाग विभिन्न स्तरों पर किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इस वर्ष सक्रिय आग की घटनाओं को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

विभाग किसानों को पराली जलाने के बजाय उसे खेत में ही प्रबंधित करने, खेत से बाहर निकालकर उपयोग करने या पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

H3: पराली प्रबंधन के लिए किसानों को प्रोत्साहन

कृषि विभाग के अनुसार, पराली प्रबंधन के लिए इन-सीटू और एक्स-सीटू तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

इन-सीटू प्रबंधन में फसल अवशेषों को खेत में ही उपयोग या प्रबंधित किया जाता है, जबकि एक्स-सीटू प्रबंधन में पराली को खेत से बाहर निकालकर अन्य उपयोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

विभाग किसानों को सरकार की ओर से दिए जा रहे प्रोत्साहनों का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है। इसका उद्देश्य पराली जलाने की जरूरत को कम करना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाना है।

H2: अंबाला में 2.20 लाख एकड़ में धान की खेती

कृषि विभाग के मुताबिक, अंबाला जिले में मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर लगभग 2.20 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती का पंजीकरण हुआ है।

अब तक धान की 45 प्रतिशत से अधिक कटाई पूरी हो चुकी है, जबकि करीब 25 प्रतिशत फसल अवशेषों का प्रबंधन किया जा चुका है।

धान की कटाई आगे बढ़ने के साथ पराली प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ सकती है। ऐसे में विभाग किसानों से अपील कर रहा है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उपलब्ध वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल करें।

H2: बेमौसम बारिश से मंडियों में भीगा धान

पराली प्रबंधन की तैयारियों के बीच बेमौसम बारिश ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण अनाज मंडियों में रखा धान भीग गया है, जिससे खरीद कार्य और कटाई की गति प्रभावित होने की आशंका है।

कृषि विभाग के अनुसार, अब तक फसल को नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि, बारिश के कारण धान की कटाई में देरी हो सकती है।

मंडियों में मौजूद किसानों का कहना है कि धान की हजारों बोरियां बारिश से भीग गईं। किसानों ने स्टॉक को तिरपाल से ढकने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद काफी मात्रा में धान बारिश की चपेट में आ गया।

नमी बढ़ने से किसानों को सता रही चिंता

बारिश से भीगे धान में नमी बढ़ने की आशंका के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। अधिक नमी होने पर धान की गुणवत्ता और सरकारी खरीद की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, वास्तविक नुकसान और गुणवत्ता पर असर का आकलन संबंधित जांच के बाद ही किया जा सकता है।

किसानों को उम्मीद है कि मौसम साफ होने के साथ मंडियों में खरीद और उठान की प्रक्रिया तेज होगी, ताकि उनकी उपज को लंबे समय तक खुले में न रखना पड़े।

Key Highlights:

  1. अंबाला में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए दो ड्रोन तैनात किए गए।

  2. जिले के 35 गांवों को पराली जलाने के लिहाज से संवेदनशील चिह्नित किया गया।

  3. इस साल सक्रिय आग की घटनाओं को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है।

  4. पिछले साल अंबाला में आठ सक्रिय आग के स्थान दर्ज हुए थे और तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं।

  5. जिले में लगभग 2.20 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती का पंजीकरण हुआ।

  6. धान की 45 प्रतिशत से अधिक कटाई पूरी हो चुकी है।

  7. करीब 25 प्रतिशत फसल अवशेषों का प्रबंधन किया जा चुका है।

  8. बेमौसम बारिश से मंडियों में धान की हजारों बोरियां भीगने की बात किसानों ने कही।

  9. कृषि विभाग के अनुसार, अब तक फसल नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

FAQ Section:

प्रश्न 1: अंबाला में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाया गया है?

उत्तर: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने निगरानी के लिए दो ड्रोन तैनात किए हैं। इनके माध्यम से खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की पहचान की जाएगी।

प्रश्न 2: अंबाला में कितने गांव पराली जलाने के लिहाज से संवेदनशील हैं?

उत्तर: जिले के 35 गांवों को पराली जलाने की घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील चिह्नित किया गया है।

प्रश्न 3: इस साल कृषि विभाग का क्या लक्ष्य है?

उत्तर: विभाग ने इस साल सक्रिय आग की घटनाओं (AFLs) को शून्य तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

प्रश्न 4: अंबाला में कितने क्षेत्र में धान की खेती हुई है?

उत्तर: मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर जिले में लगभग 2.20 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती का पंजीकरण हुआ है।

प्रश्न 5: अब तक धान की कितनी कटाई पूरी हुई है?

उत्तर: कृषि विभाग के अनुसार, धान की 45 प्रतिशत से अधिक कटाई पूरी हो चुकी है और करीब 25 प्रतिशत फसल अवशेषों का प्रबंधन किया गया है।

प्रश्न 6: बारिश से किसानों को क्या परेशानी हुई है?

उत्तर: बारिश के कारण मंडियों में खुले में रखी धान की बोरियां भीग गई हैं। इससे नमी बढ़ने, गुणवत्ता प्रभावित होने और खरीद प्रक्रिया में देरी की आशंका है।

प्रश्न 7: पराली प्रबंधन के कौन-कौन से तरीके अपनाए जा सकते हैं?

उत्तर: किसान पराली को खेत में ही प्रबंधित कर सकते हैं, उसे खेत से बाहर निकालकर दूसरे उपयोगों में ला सकते हैं या पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

Conclusion:

अंबाला में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए ड्रोन निगरानी और किसानों को जागरूक करने की पहल की गई है। 35 संवेदनशील गांवों पर विशेष नजर रखते हुए विभाग ने इस साल सक्रिय आग की घटनाओं को शून्य करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, बेमौसम बारिश ने धान की कटाई और मंडियों में रखी उपज की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। पराली का उचित प्रबंधन, समय पर खरीद और धान के सुरक्षित भंडारण से किसानों को राहत मिल सकती है।Screenshot_583

Edited By: Atul Sharma

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