गुरुग्राम में साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़, फिलीपींस-कंबोडिया से जुड़ा नेटवर्क

5 आरोपी गिरफ्तार, सिम बॉक्स के जरिए कॉल डायवर्जन कर करते थे साइबर अपराध

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गुरुग्राम पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फिलीपींस और कंबोडिया से संचालित हो रहा था। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में अवैध उपकरण बरामद किए हैं।

गुरुग्राम पुलिस ने फिलीपींस और कंबोडिया से संचालित एक साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। ये आरोपी अवैध सिम बॉक्स (GSM गेटवे) का उपयोग कर साइबर अपराधों को अंजाम दे रहे थे।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 13 सिम बॉक्स, 7 वाई-फाई TAPO कैमरे (ह्यूमन डिटेक्शन के साथ), 7 वाई-फाई राउटर, 7 इन्वर्टर, 30 बैटरियां, 29 TAPO वाई-फाई स्विच, 28 ईथरनेट वायर, 504 सिम कार्ड, एक रेलवे टिकट और चीन से जुड़े कार्टन बॉक्स बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, गुरुग्राम के DLF फेज-3 के यू ब्लॉक और चक्करपुर गांव के चार मकान मालिकों ने शिकायत दी थी कि उनके किरायेदार घरों में अवैध सिम बॉक्स चला रहे हैं, जिनका उपयोग अनधिकृत टेलीकॉम गतिविधियों और साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है।

शिकायत के बाद दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं और Priyanshu Dewan के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। इसके बाद पुलिस ने किराए के मकानों पर छापेमारी की और वहां से अवैध उपकरण बरामद किए।

आरोपियों की पहचान राहुल कुमार (उत्तर प्रदेश), यश अमृत सिंह दुगर (गुजरात), भावना रमेश भगचंदानी (गुजरात), लितेश (महाराष्ट्र) और सागर (महाराष्ट्र) के रूप में हुई है। इनमें से चार आरोपियों को उनके गृह राज्यों से गिरफ्तार किया गया, जबकि सागर को गुरुग्राम से पकड़ा गया।

पूछताछ में राहुल ने खुलासा किया कि वह अपने एक सहयोगी के जरिए फिलीपींस में बैठे एक व्यक्ति के संपर्क में था, जो उसे सिम बॉक्स, राउटर और अन्य उपकरण भेजता था। राहुल इन उपकरणों को गुरुग्राम में सेट करता था और वीडियो कॉल के माध्यम से विदेशी व्यक्ति से संपर्क रखता था, जिसके बदले उसे पैसे मिलते थे।

सागर के नाम पर किराए का कमरा और इंटरनेट कनेक्शन लिया गया था। वहीं, भावना कंबोडिया में बैठे एक अन्य सहयोगी के संपर्क में थी और यश के जरिए USDT (क्रिप्टोकरेंसी) को रुपये में और रुपये को USDT में बदलने का काम किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि ये उपकरण इंटरनेट के जरिए कॉल रूटिंग, कॉल डायवर्जन और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी में किया जाता था।

ये अवैध उपकरण चीन और फिलीपींस से नेपाल के रास्ते बिहार भेजे जाते थे और फिर देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में सप्लाई किए जाते थे।

पुलिस के अनुसार, इन उपकरणों का इस्तेमाल “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर अपराधों में भी किया जाता था। आरोपियों ने 2,258 फर्जी सिम कार्ड को रिचार्ज किया था, जिनका उपयोग विभिन्न साइबर अपराधों में किया जा रहा था।

 
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Edited By: Karan Singh

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