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महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल में मरीजों के रेफरल पर घमासान, BJP विधायक ने उठाए सवाल; अस्पताल प्रशासन ने आंकड़ों से दिया जवाब
विधायक कंवर सिंह यादव ने डॉक्टरों के सभी 42 पद भरे होने के बावजूद मरीजों को रेफर किए जाने पर निष्पक्ष जांच की मांग की। SMO ने बताया कि रिकॉर्ड में पद भरे हैं, लेकिन कई डॉक्टर इस्तीफा, डेपुटेशन और अवकाश पर हैं।
महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। BJP विधायक कंवर सिंह यादव ने जांच की मांग की, जबकि अस्पताल प्रशासन ने रेफरल के आंकड़े और डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता स्पष्ट की है।
हरियाणा के महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। सत्तारूढ़ BJP के स्थानीय विधायक कंवर सिंह यादव ने अस्पताल में डॉक्टरों के सभी स्वीकृत पद भरे होने के बावजूद मरीजों को रेफर किए जाने पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विधायक के आरोपों के बाद अस्पताल प्रशासन ने आंकड़ों के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अस्पताल का कहना है कि भर्ती मरीजों यानी IPD मरीजों में से 5 प्रतिशत से भी कम को ऐसे मामलों में रेफर किया गया, जहां उन्नत जांच सुविधाओं जैसे CT Scan या सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टर की जरूरत थी।
विधायक ने मरीजों के रेफरल पर उठाए सवाल
महेंद्रगढ़ से BJP विधायक कंवर सिंह यादव ने हाल ही में सिविल अस्पताल से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजे जाने का मुद्दा उठाया था।उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों के सभी 42 स्वीकृत पद भरे हुए हैं, इसके बावजूद मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। विधायक ने इसे चिंता का विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
यादव ने मीडिया से भी मामले की तह तक पहुंचने और वास्तविक स्थिति सामने लाने में सहयोग करने की अपील की।
विधायक का दावा- 42 पद भरे होने के बावजूद रेफरल
विधायक ने कहा कि प्रदेश के कई अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली हैं और कुछ जगहों पर 10, 20 या 30 प्रतिशत तक पद रिक्त हैं। लेकिन महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के सभी 42 स्वीकृत पद भरे हुए बताए जाते हैं।
ऐसे में उनके अनुसार मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर किए जाने की वजह स्पष्ट की जानी चाहिए।
अस्पताल प्रशासन ने बताई डॉक्टरों की वास्तविक स्थिति
विधायक के सवालों के बाद सिविल अस्पताल के Senior Medical Officer (SMO) डॉ. जय प्रकाश ने अस्पताल में डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता और रेफरल व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों के 42 स्वीकृत पद हैं और सरकारी रिकॉर्ड में सभी पद भरे हुए दिखाई दे रहे हैं। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
पांच डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा
SMO के अनुसार, पांच डॉक्टर सेवा से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि, उनके इस्तीफे अभी स्वीकार नहीं किए गए हैं। इसी वजह से सरकारी रिकॉर्ड में वे अब भी कार्यरत दिख रहे हैं।
इसका मतलब यह है कि कागजों पर सभी पद भरे होने के बावजूद अस्पताल में उनकी सेवाएं वास्तविक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
चार डॉक्टर दूसरे संस्थान में भेजे गए
डॉ. जय प्रकाश के मुताबिक, चार डॉक्टरों को महार्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज, कोरियावास भेजा गया है।
इसके अलावा पांच डॉक्टर नारनौल और सतनाली के अस्पतालों में डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे हैं। कुछ महिला डॉक्टर मातृत्व अवकाश और चाइल्डकेयर लीव पर भी हैं।
इस स्थिति के कारण स्वीकृत पदों और अस्पताल में वास्तव में उपलब्ध डॉक्टरों की संख्या में अंतर है।
5 प्रतिशत से कम IPD मरीज हुए रेफर
अस्पताल प्रशासन ने रेफरल को लेकर आंकड़े भी सामने रखे हैं। प्रशासन के अनुसार, भर्ती मरीजों में से 5 प्रतिशत से कम मरीजों को रेफर किया गया।
इन मरीजों को ऐसे मामलों में रेफर किया गया, जहां उन्हें CT Scan जैसी उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधा या सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टर की जरूरत थी।
अस्पताल का कहना है कि ऐसे मामलों में मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में भेजना चिकित्सा जरूरतों के अनुसार किया जाता है।
विवाद के केंद्र में 'पद भरे' और 'डॉक्टर उपलब्ध' होने का अंतर
महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल का मामला सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी स्तर पर उपलब्ध मानव संसाधन के बीच अंतर को भी सामने लाता है।
एक ओर आधिकारिक रिकॉर्ड में सभी 42 डॉक्टरों के पद भरे हुए हैं, वहीं इस्तीफा दे चुके डॉक्टरों, डेपुटेशन पर गए चिकित्सकों और विभिन्न प्रकार के अवकाश के कारण अस्पताल में उपलब्ध डॉक्टरों की वास्तविक संख्या कम है।
अब विवाद का मुख्य सवाल यही है कि अस्पताल से मरीजों को किन परिस्थितियों में रेफर किया गया और क्या सभी रेफरल चिकित्सकीय रूप से आवश्यक थे।
Key Highlights:
- महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल से मरीजों के रेफरल पर विवाद शुरू हुआ।
- BJP विधायक कंवर सिंह यादव ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
- विधायक के अनुसार अस्पताल में डॉक्टरों के सभी 42 स्वीकृत पद भरे हैं।
- SMO डॉ. जय प्रकाश ने डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट की।
- पांच डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन उनके इस्तीफे अभी स्वीकार नहीं हुए हैं।
- चार डॉक्टर महार्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज, कोरियावास भेजे गए हैं।
- पांच डॉक्टर नारनौल और सतनाली के अस्पतालों में डेपुटेशन पर हैं।
- कुछ महिला डॉक्टर मातृत्व और चाइल्डकेयर लीव पर हैं।
- अस्पताल के अनुसार 5 प्रतिशत से कम IPD मरीज रेफर किए गए।
- रेफर किए गए मरीजों को CT Scan या सुपर-स्पेशलिस्ट उपचार की जरूरत थी।
FAQ Section:
प्रश्न: महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल में विवाद किस बात को लेकर है?
उत्तर: विवाद अस्पताल से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने को लेकर है। BJP विधायक कंवर सिंह यादव ने डॉक्टरों के सभी स्वीकृत पद भरे होने के बावजूद रेफरल पर सवाल उठाया है।
प्रश्न: महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के कितने पद स्वीकृत हैं?
उत्तर: अस्पताल में डॉक्टरों के 42 स्वीकृत पद हैं। हालांकि, सभी पद भरे होने के बावजूद कई डॉक्टर फिलहाल अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं।
प्रश्न: कितने डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया है?
उत्तर: SMO डॉ. जय प्रकाश के अनुसार, पांच डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन उनके इस्तीफे अभी स्वीकार नहीं किए गए हैं।
प्रश्न: कितने डॉक्टर डेपुटेशन पर हैं?
उत्तर: चार डॉक्टर महार्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज, कोरियावास भेजे गए हैं, जबकि पांच डॉक्टर नारनौल और सतनाली के अस्पतालों में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं।
प्रश्न: कितने मरीजों को रेफर किया गया?
उत्तर: अस्पताल प्रशासन के अनुसार, भर्ती मरीजों यानी IPD मरीजों में से 5 प्रतिशत से कम को रेफर किया गया।
प्रश्न: मरीजों को रेफर करने की वजह क्या बताई गई है?
उत्तर: अस्पताल प्रशासन के अनुसार, जिन मरीजों को CT Scan जैसी उन्नत जांच या सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टर की आवश्यकता थी, उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया।
Conclusion:
महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल में मरीजों के रेफरल को लेकर उठे विवाद में अब अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता और रेफरल के आंकड़े सामने रखे हैं। रिकॉर्ड में 42 पद भरे होने के बावजूद इस्तीफा, डेपुटेशन और अवकाश के कारण कई डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं हैं। वहीं, प्रशासन का दावा है कि 5 प्रतिशत से कम IPD मरीजों को उन्नत जांच या सुपर-स्पेशलिस्ट उपचार की आवश्यकता के चलते रेफर किया गया। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर डॉक्टरों की उपलब्धता और प्रत्येक रेफरल के कारणों की विस्तृत जांच से ही स्पष्ट होगी।
