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फतेहाबाद में राइस मिलर्स का प्रदर्शन, CMR उठान में देरी पर भड़का गुस्सा; मिलों की चाबियां SDM को सौंपने की चेतावनी
2025-26 खरीफ सीजन के कस्टम मिल्ड राइस की डिलीवरी अटकी, मिलर्स ने तैयार चावल तुरंत उठाने और लंबित बैंक गारंटी व FDR जारी करने की मांग की
हरियाणा के फतेहाबाद में राइस मिलर्स ने सरकारी एजेंसियों द्वारा तैयार CMR का समय पर उठान नहीं किए जाने के विरोध में उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। मिलर्स ने जल्द समाधान नहीं होने पर आगामी सीजन में धान खरीद रोकने और मिलों की चाबियां SDM को सौंपने की चेतावनी दी है।
हरियाणा के फतेहाबाद जिले में राइस मिलर्स ने कस्टम मिल्ड राइस यानी CMR के उठान में हो रही देरी के खिलाफ बुधवार को विरोध जताया। जिले के कई राइस मिलर्स उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
मिलर्स का कहना है कि 2025-26 खरीफ सीजन के दौरान सरकारी खरीद एजेंसियों के लिए तैयार किया गया चावल डिलीवरी के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन संबंधित एजेंसियां निर्धारित समय पर इसका उठान नहीं कर रही हैं। इसके कारण मिलर्स को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
तैयार CMR का तुरंत उठान करने की मांग
राइस मिलर्स ने प्रशासन से मांग की कि तैयार CMR को तत्काल उठाने की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही उन्होंने लंबित बैंक गारंटी और फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDRs) भी जारी करने की मांग रखी।मिलर्स ने आरोप लगाया कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, HAFED और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के स्तर पर कामकाज के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी एजेंसियों पर लगाया देरी का आरोप
मिलर्स का कहना है कि उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत चावल तैयार कर रखा है, लेकिन सरकारी खरीद एजेंसियां उसे स्वीकार नहीं कर रही हैं।
उनके अनुसार, इस स्थिति के कारण एक तरफ मिलों में तैयार चावल जमा है और दूसरी ओर वित्तीय संसाधन भी अटके हुए हैं। इससे मिलर्स पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
FCI में भंडारण की कमी का मुद्दा
राइस मिलर्स ने दावा किया कि CMR उठान में देरी का कारण उनकी तरफ से नहीं, बल्कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं होना है।
उनका कहना है कि सरकारी एजेंसियों के साथ हुए समझौतों में उन्हें निर्धारित समय के भीतर CMR की डिलीवरी करनी होती है और समयसीमा पूरी नहीं होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
लेकिन यदि सरकारी एजेंसियों या FCI के पास चावल रखने के लिए पर्याप्त गोदाम उपलब्ध नहीं हैं, तो देरी के लिए मिलर्स को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
आगामी धान खरीद रोकने की चेतावनी
मिलर्स ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे आगामी धान खरीद सीजन में खरीद प्रक्रिया से पीछे हट सकते हैं।
उन्होंने कहा कि स्थिति नहीं सुधरी तो विरोध के तौर पर वे अपनी-अपनी राइस मिलों की चाबियां संबंधित SDM को सौंपने का कदम भी उठा सकते हैं।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब नए खरीफ सीजन की तैयारियां भी शुरू हो रही हैं।
चावल की गुणवत्ता खराब होने पर एजेंसी जिम्मेदार हो
राइस मिलर्स ने कहा कि यदि तैयार चावल का समय पर उठान नहीं होता और लंबे समय तक भंडारण के कारण उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित सरकारी एजेंसी की होनी चाहिए।
इसी तरह, भंडारण की कमी या उठान में देरी के कारण चावल की मात्रा में किसी तरह की कमी आती है, तो उसका दायित्व भी मिलर्स पर नहीं डाला जाना चाहिए।
Holding charges पर भी आपत्ति
मिलर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकारी एजेंसियों की देरी के कारण उनके ऊपर holding charges लगाए जाते हैं, तो वे इन शुल्कों की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेंगे।
उनकी मांग है कि प्रशासन संबंधित एजेंसियों को तैयार CMR के भंडारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने और बिना देरी के चावल उठाने का निर्देश दे।
Key Highlights:
- फतेहाबाद में राइस मिलर्स ने CMR उठान में देरी का विरोध किया।
- 2025-26 खरीफ सीजन का तैयार कस्टम मिल्ड राइस उठाए जाने की मांग।
- उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया।
- लंबित बैंक गारंटी और FDR जारी करने की मांग।
- Food & Supplies Department, HAFED और Haryana Warehousing Corporation की कार्यप्रणाली पर सवाल।
- मिलर्स ने FCI में पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं होने को देरी की वजह बताया।
- आगामी सीजन में धान खरीद रोकने की चेतावनी।
- जरूरत पड़ने पर मिलों की चाबियां SDM को सौंपने की बात कही।
- देरी के कारण चावल की गुणवत्ता या मात्रा प्रभावित होने पर एजेंसी को जिम्मेदार ठहराने की मांग।
- सरकारी देरी के कारण लगाए जाने वाले holding charges स्वीकार नहीं करने की चेतावनी।
FAQ Section
CMR क्या होता है?
CMR यानी Custom Milled Rice वह चावल है जिसे सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत मिलिंग के बाद संबंधित सरकारी एजेंसियों को वापस दिया जाता है।
फतेहाबाद के राइस मिलर्स की मुख्य मांग क्या है?
मिलर्स तैयार CMR का तत्काल उठान, लंबित बैंक गारंटी और FDR जारी करने तथा भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
CMR उठान में देरी की वजह क्या बताई गई है?
मिलर्स का दावा है कि देरी का मुख्य कारण सरकारी एजेंसियों और FCI के पास पर्याप्त भंडारण स्थान की कमी है।
मिलर्स ने क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने मांगें जल्द पूरी नहीं होने पर आगामी धान खरीद सीजन में खरीद रोकने और विरोध स्वरूप मिलों की चाबियां संबंधित SDM को सौंपने की चेतावनी दी है।
चावल की गुणवत्ता खराब होने पर कौन जिम्मेदार होगा?
मिलर्स का कहना है कि यदि सरकारी एजेंसियों द्वारा समय पर उठान नहीं किए जाने या भंडारण की कमी के कारण चावल की गुणवत्ता खराब होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होनी चाहिए।
Conclusion:
फतेहाबाद में CMR उठान को लेकर राइस मिलर्स और सरकारी एजेंसियों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। मिलर्स का कहना है कि तैयार चावल समय पर नहीं उठाया जा रहा, जबकि देरी की जिम्मेदारी उन पर डाली जा रही है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल भंडारण व्यवस्था कराने, CMR उठाने और लंबित बैंक गारंटी व FDR जारी करने की मांग की है। मांगों पर जल्द फैसला नहीं होने पर आगामी धान खरीद प्रभावित होने की आशंका है।
