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हरियाणा में किसानों की मुश्किलें बरकरार, गेहूं से सीमित कमाई तो कपास की खेती में ₹15,143 प्रति एकड़ का नुकसान
नायब सिंह सैनी सरकार के दो साल बाद भी कृषि क्षेत्र में आय और फसल खरीद को लेकर सवाल; कपास का रकबा सात साल में करीब 65% घटा
हरियाणा में किसानों की आमदनी, फसल नुकसान और सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कृषि बजट में बढ़ोतरी के बावजूद गेहूं से औसत शुद्ध कमाई सीमित है, जबकि कपास की खेती में भारी नुकसान का अनुमान सामने आया है। वहीं, भावांतर भरपाई योजना और फसलों की खरीद प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के दो साल पूरे होने के बीच कृषि क्षेत्र की चुनौतियां चर्चा में हैं। किसानों की आमदनी, फसलों को हुए नुकसान और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए बजट बढ़ाया है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि कई प्रमुख फसलों की खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
गेहूं की खेती से होने वाली औसत शुद्ध कमाई सीमित है, जबकि कपास की खेती में लगातार नुकसान के कारण किसानों का रुझान घटा है। इसके अलावा, भावांतर भरपाई योजना के भुगतान और खरीफ फसलों की खरीद में देरी ने भी किसानों की चिंताएं बढ़ाई हैं।
कृषि बजट बढ़ा, लेकिन किसानों की कमाई पर सवाल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद संभाला था। उनकी सरकार ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए नवीनतम बजट में 9,790 करोड़ रुपये आवंटित किए, जो पिछले बजट के संशोधित अनुमान की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक है।
सरकार का कहना रहा है कि किसान उसकी प्राथमिकताओं के केंद्र में हैं। हालांकि, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) की एक रिपोर्ट में फसलों की खेती से होने वाली कमाई और लागत के आंकड़ों ने कृषि आय की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं।
गेहूं की खेती से एक एकड़ में कितनी कमाई?
HAU की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में गेहूं की खेती से औसत शुद्ध रिटर्न लगभग 15,180 रुपये प्रति एकड़ आंका गया है।
खेती की लागत, परिवार की जरूरतों और कृषि जोखिमों को देखते हुए यह आंकड़ा छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाता है। हालांकि, वास्तविक कमाई जमीन, उत्पादन, मौसम, खेती के तरीकों और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कपास की खेती में नुकसान, सात साल में रकबा 65% घटा
हरियाणा में कपास पारंपरिक रूप से प्रमुख नकदी फसलों में शामिल रही है। लेकिन लगातार आर्थिक नुकसान के चलते किसानों का इस फसल से मोहभंग होता दिखाई दे रहा है।
राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सात वर्षों में कपास की खेती का क्षेत्रफल करीब 65 प्रतिशत घट गया है। वर्ष 2025-26 के सीजन में इसका रकबा लगभग 2.82 लाख हेक्टेयर रह गया।
कपास की खेती में प्रति एकड़ कितना नुकसान?
HAU की रिपोर्ट में 2025 के खरीफ सीजन के दौरान कपास की खेती से औसतन 15,143 रुपये प्रति एकड़ नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार:
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प्रति एकड़ कुल लागत: 40,024 रुपये
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प्रति एकड़ सकल आय: 24,882 रुपये
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प्रति एकड़ अनुमानित नुकसान: 15,143 रुपये
इन आंकड़ों के अनुसार, कपास की खेती से होने वाली सकल आय भी कुल लागत को पूरा नहीं कर पा रही है। लगातार घाटे की आशंका किसानों को दूसरी फसलों की ओर जाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
भावांतर भरपाई योजना पर भी उठे सवाल
हरियाणा सरकार ने भावांतर भरपाई योजना (BBY) जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इसका उद्देश्य कुछ निर्धारित फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर बेचने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता देना है। बाजरे सहित कुछ फसलों के लिए इस योजना के तहत सहायता का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, किसानों ने आरोप लगाया है कि कुछ वास्तविक लाभार्थियों को सहायता नहीं मिल पा रही है। वहीं, कृषि विभाग की ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था में कथित खामियों का फायदा उठाकर कुछ लोग गलत तरीके से भुगतान हासिल कर रहे हैं।
हिसार और भिवानी जिलों में कथित अनियमितताओं को लेकर कई FIR दर्ज की गई हैं। इन मामलों की पुलिस जांच जारी है।
MSP पर खरीद के दावे और जमीनी स्थिति पर विवाद
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दावा किया है कि हरियाणा में किसानों के अनाज की खरीद MSP पर सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कथित धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी भरोसा दिया है।
पिछले साल कई जिलों में धान की खरीद में कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद सरकार ने कार्रवाई की थी। इसके बावजूद, चालू खरीद सीजन में भी इसी तरह के आरोप सामने आए हैं, जिनमें करनाल का मामला भी शामिल है।
किसानों की चिंताओं में खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता, भुगतान और निर्धारित कीमत पर फसल बेचने की सुविधा प्रमुख हैं।
मूंग, बाजरा और धान की खरीद में देरी से बढ़ी परेशानी
मौजूदा खरीफ सीजन में खरीद प्रक्रिया की रफ्तार भी किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मूंग की खरीद शुरू नहीं हो पाई थी, जबकि बाजरे और धान की खरीद धीमी गति से आगे बढ़ रही थी।
खरीद में देरी से किसानों को अपनी उपज बेचने और भुगतान प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में खरीद केंद्रों की व्यवस्था, समय पर खरीद और MSP के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व मंत्री संपत सिंह ने सरकार पर साधा निशाना
हरियाणा के पूर्व मंत्री संपत सिंह ने कृषि क्षेत्र की स्थिति को लेकर सरकार की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को किसानों की जमीनी समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
संपत सिंह के अनुसार, किसानों को MSP का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने खरीद प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों पर कथित मिलीभगत के जरिए व्यवस्था को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया।
ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। खरीद व्यवस्था में अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक आंकड़ों से ही स्पष्ट होगी।
Key Highlights
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हरियाणा सरकार ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 9,790 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया।
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यह आवंटन पिछले बजट के संशोधित अनुमान से करीब 13% अधिक है।
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HAU के अनुसार, गेहूं से औसत शुद्ध रिटर्न 15,180 रुपये प्रति एकड़ है।
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कपास की खेती में 2025 के खरीफ सीजन के दौरान 15,143 रुपये प्रति एकड़ औसत नुकसान का अनुमान लगाया गया।
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सात वर्षों में कपास की खेती का रकबा करीब 65% घटा है।
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भावांतर भरपाई योजना के भुगतान में कथित गड़बड़ियों को लेकर हिसार और भिवानी में FIR दर्ज हुई हैं।
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मूंग की खरीद शुरू होने में देरी और बाजरा-धान की धीमी खरीद को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ी हैं।
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पूर्व मंत्री संपत सिंह ने MSP खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
FAQ Section
1. हरियाणा में कृषि क्षेत्र के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?
राज्य के नवीनतम बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 9,790 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले बजट के संशोधित अनुमान से करीब 13 प्रतिशत अधिक है।
2. हरियाणा में गेहूं की खेती से प्रति एकड़ कितनी शुद्ध कमाई होती है?
HAU की रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं से औसत शुद्ध रिटर्न लगभग 15,180 रुपये प्रति एकड़ है। वास्तविक आय किसान और खेती की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।
3. कपास की खेती में किसानों को कितना नुकसान हो रहा है?
HAU की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के खरीफ सीजन में कपास की खेती से औसतन 15,143 रुपये प्रति एकड़ नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
4. हरियाणा में कपास की खेती का रकबा कितना घटा है?
राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, सात वर्षों में कपास का रकबा करीब 65 प्रतिशत घटकर 2025-26 में लगभग 2.82 लाख हेक्टेयर रह गया।
5. भावांतर भरपाई योजना क्या है?
भावांतर भरपाई योजना के तहत निर्धारित फसलों को MSP से कम कीमत पर बेचने की स्थिति में पात्र किसानों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। योजना का लाभ फसल और लागू नियमों के अनुसार मिलता है।
6. हरियाणा में फसलों की खरीद को लेकर क्या शिकायतें हैं?
किसानों ने MSP पर खरीद, भुगतान और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। मूंग की खरीद में देरी और बाजरा तथा धान की धीमी खरीद भी चिंता का विषय रही है।
Conclusion
हरियाणा में कृषि बजट बढ़ने के बावजूद किसानों की आय, कपास की खेती में नुकसान और फसलों की खरीद व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। गेहूं से सीमित शुद्ध कमाई, कपास के घटते रकबे और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के बीच सरकार के सामने किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा देने की चुनौती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक कितना पहुंचता है और MSP पर खरीद को अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

