डीबीआरएएनएलयू सोनीपत में पहले संयुक्त अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन, सुशासन, AI और संवैधानिक मूल्यों पर वैश्विक मंथन

भारत और विदेशों के विशेषज्ञों ने लोकतंत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सार्वजनिक नीति और कानून के शासन पर रखे विचार, जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. चार्ल्स हैंकला ने भी किया संबोधन।

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डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DBRANLU), सोनीपत में आयोजित पहले संयुक्त अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को समापन हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में भारत और विदेशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विधि विशेषज्ञों ने सुशासन, लोकतंत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सार्वजनिक नीति और संवैधानिक कानून जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

डीबीआरएएनएलयू में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन

डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DBRANLU), सोनीपत में आयोजित पहले संयुक्त अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में भारत और विदेशों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विधि विशेषज्ञों और सार्वजनिक नीति के जानकारों ने भाग लेकर समकालीन वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन के दौरान सुशासन, लोकतंत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेंडर स्टडीज़, सार्वजनिक नीति और संवैधानिक कानून जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे।


वैश्विक शैक्षणिक सहयोग और शोध को बढ़ावा देने पर जोर

सम्मेलन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए नए अवसर तैयार करना था।

विशेषज्ञों ने बदलते वैश्विक परिवेश में कानून, नीति निर्माण और आधुनिक तकनीक के बीच समन्वय की आवश्यकता पर भी विस्तार से अपने विचार साझा किए।


कुलपति ने कानून के शासन और समावेशी विकास को बताया लोकतंत्र की नींव

समापन समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देविंदर सिंह ने कहा कि कानून का शासन (Rule of Law), समान अवसर और समावेशी विकास किसी भी लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला हैं।

उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की संस्थागत प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने सामाजिक समावेशन और ई-गवर्नेंस आधारित नागरिक-केंद्रित प्रशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

उन्होंने छात्रों से अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान भी किया।


प्रो. चार्ल्स हैंकला ने लोकतंत्र में विश्वास की भूमिका पर रखे विचार

कुलपति प्रो. देविंदर सिंह ने अमेरिका के अटलांटा स्थित जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर चार्ल्स हैंकला का सम्मेलन में शामिल होने के लिए आभार व्यक्त किया।

अपने संबोधन की शुरुआत प्रो. हैंकला ने हिंदी में "आप कैसे हैं?" कहकर की, जिससे छात्रों और शिक्षकों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।

उन्होंने भारत के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा कि वे भविष्य में अधिक बार भारत आना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास सुशासन की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला होता है।


समकालीन चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

सम्मेलन में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सार्वजनिक नीति, संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं के समक्ष उभरती चुनौतियों पर अपने अनुभव और शोध प्रस्तुत किए। साथ ही वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने और भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।


Key Highlights:

  • DBRANLU, सोनीपत में पहले संयुक्त अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन।
  • दो दिवसीय सम्मेलन में भारत और विदेशों के शिक्षाविदों एवं विधि विशेषज्ञों ने भाग लिया।
  • सुशासन, लोकतंत्र, AI, जेंडर स्टडीज़, सार्वजनिक नीति और संवैधानिक कानून पर चर्चा।
  • कुलपति प्रो. देविंदर सिंह ने कानून के शासन और समावेशी विकास पर जोर दिया।
  • छात्रों से न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान।
  • जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. चार्ल्स हैंकला ने सम्मेलन को संबोधित किया।
  • लोकतंत्र में नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास को सुशासन की आधारशिला बताया।
  • वैश्विक शैक्षणिक सहयोग और संयुक्त शोध को बढ़ावा देने पर बल।

FAQ Section

Q1. सम्मेलन का आयोजन कहां हुआ?
यह सम्मेलन डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DBRANLU), सोनीपत में आयोजित किया गया।

Q2. सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा हुई?
सुशासन, लोकतंत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेंडर स्टडीज़, सार्वजनिक नीति और संवैधानिक कानून जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

Q3. सम्मेलन का उद्देश्य क्या था?
वैश्विक शैक्षणिक सहयोग, शोध, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।

Q4. प्रो. चार्ल्स हैंकला ने अपने संबोधन में क्या कहा?
उन्होंने लोकतंत्र में नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास को सुशासन की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बताया और भारत के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की।

Q5. कुलपति प्रो. देविंदर सिंह ने छात्रों को क्या संदेश दिया?
उन्होंने छात्रों से न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।


Conclusion

डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, सोनीपत का पहला संयुक्त अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वैश्विक शैक्षणिक सहयोग और समकालीन कानूनी एवं नीतिगत विषयों पर सार्थक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया। सम्मेलन में व्यक्त विचार और सुझाव भविष्य में शोध, नवाचार तथा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।Screenshot_88

Edited By: Karan Singh

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