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यमुनानगर में दिव्यांग बच्चों संग मेयर सुमन बहमानी ने मनाया रक्षाबंधन, दिया समानता और सम्मान का संदेश
उत्थान संस्थान में बच्चों ने मेयर को बांधी राखी, सुमन बहमानी ने कहा—दिव्यांग बच्चों को दया नहीं, सम्मान और समान अवसरों की जरूरत।
यमुनानगर की मेयर सुमन बहमानी ने शुक्रवार को उत्थान संस्थान में दिव्यांग बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया। बच्चों के स्नेह और मुस्कान से भावुक मेयर ने समाज में समानता, सम्मान और अवसरों की जरूरत पर जोर दिया।
यमुनानगर: रक्षाबंधन के अवसर पर यमुनानगर की मेयर सुमन बहमानी ने शुक्रवार को उत्थान संस्थान पहुंचकर दिव्यांग बच्चों के साथ त्योहार मनाया। इस दौरान बच्चों ने मेयर को राखी बांधी और कार्यक्रम में प्रेम, स्नेह, सम्मान तथा समानता का संदेश दिया गया।
मेयर ने बच्चों के साथ समय बिताया और उनकी गतिविधियों को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि बच्चों के बीच रक्षाबंधन मनाना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
बच्चों की मुस्कान और स्नेह ने छुआ दिल
सुमन बहमानी ने कहा कि बच्चे ईश्वर का स्वरूप होते हैं और उनके साथ रक्षाबंधन मनाने का अनुभव बेहद विशेष रहा। उन्होंने बच्चों की मुस्कान, उनके निश्छल प्रेम और स्नेह की सराहना करते हुए कहा कि इस अनुभव ने उन्हें भावुक कर दिया।उन्होंने बच्चों के साथ काफी समय बिताया और संस्थान में होने वाली विभिन्न गतिविधियों को भी देखा।
दिव्यांग बच्चों को दया नहीं, सम्मान की जरूरत
मेयर ने कहा कि दिव्यांग बच्चे भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके प्रति दया का भाव रखने के बजाय उन्हें सम्मान देना और जीवन में आगे बढ़ने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बच्चों में अनेक प्रतिभाएं और क्षमताएं मौजूद होती हैं। जरूरत केवल उन्हें समझने, प्रोत्साहित करने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर देने की है।
आत्मविश्वास बढ़ाने पर दिया जोर
सुमन बहमानी ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और उनका आत्मविश्वास मजबूत हो।
उन्होंने समाज से भी अपील की कि बच्चों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सकारात्मक सहयोग दिया जाए।
उत्थान संस्थान के कार्यों की सराहना
मेयर ने उत्थान संस्थान की ओर से दिव्यांग बच्चों के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने संस्थान की निदेशक डॉ. अंजू बाजपेयी और डॉ. प्रमोद बाजपेयी के प्रयासों को सराहा।
उन्होंने कहा कि संस्थान बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ संस्कार, आत्मनिर्भरता और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहा है।
ऐसे संस्थान बढ़ाते हैं संवेदनशीलता और मानवता
मेयर ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के लिए काम करने वाले संस्थान समाज में संवेदनशीलता और मानवता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आकर ऐसे बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि वे अपनी क्षमताओं के आधार पर आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ सकें।
Key Highlights:
- यमुनानगर की मेयर सुमन बहमानी ने उत्थान संस्थान में रक्षाबंधन मनाया।
- दिव्यांग बच्चों ने मेयर को राखी बांधी।
- कार्यक्रम में प्रेम, सम्मान और समानता का संदेश दिया गया।
- मेयर ने दिव्यांग बच्चों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
- उन्होंने कहा कि बच्चों को दया नहीं, सम्मान और प्रोत्साहन की जरूरत है।
- मेयर ने बच्चों की प्रतिभा और क्षमताओं की सराहना की।
- डॉ. अंजू बाजपेयी और डॉ. प्रमोद बाजपेयी के कार्यों की प्रशंसा की गई।
- मेयर ने बच्चों के साथ समय बिताया और उनकी गतिविधियों का अवलोकन किया।
FAQ Section:
Q1. यमुनानगर की मेयर ने रक्षाबंधन कहां मनाया?
मेयर सुमन बहमानी ने यमुनानगर स्थित उत्थान संस्थान में दिव्यांग बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया।
Q2. कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने क्या किया?
दिव्यांग बच्चों ने मेयर सुमन बहमानी को राखी बांधी और उनके साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाया।
Q3. मेयर ने दिव्यांग बच्चों के लिए क्या संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों को दया की नजर से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन्हें सम्मान, प्रोत्साहन और समान अवसर मिलने चाहिए।
Q4. उत्थान संस्थान में बच्चों के लिए क्या कार्य किए जा रहे हैं?
मेयर के अनुसार संस्थान बच्चों को शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास कर रहा है।
Q5. मेयर ने संस्थान के किन लोगों की सराहना की?
मेयर ने उत्थान संस्थान की निदेशक डॉ. अंजू बाजपेयी और डॉ. प्रमोद बाजपेयी के कार्यों की प्रशंसा की।
Conclusion:
यमुनानगर के उत्थान संस्थान में दिव्यांग बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाकर मेयर सुमन बहमानी ने समाज को समानता, सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिव्यांग बच्चों की प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने की जरूरत है। ऐसे प्रयास न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में मानवता और समावेशिता की भावना को भी मजबूत करते हैं।
