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नारायण मूर्ति बोले- भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नए विचारों और उद्यमिता से पैदा करने होंगे रोजगार
OP जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के 17वें यूनिवर्सिटी डे पर इंफोसिस के संस्थापक ने युवाओं को नैतिक नेतृत्व, ईमानदारी, मेहनत और असफलताओं से सीखने का संदेश दिया।
इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नए विचारों और उद्यमिता के जरिए रोजगार पैदा करना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को ईमानदारी, मेहनत और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
सोनीपत: इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने कहा कि भारत नए विचारों और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार पैदा कर सकता है। यही भविष्य में देश को विकसित राष्ट्र बनाने का एकमात्र रास्ता है। वह OP जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के 17वें यूनिवर्सिटी डे समारोह में बतौर विशिष्ट मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
समारोह में नारायण मूर्ति ने 'नैतिक नेतृत्व, परिवर्तनकारी विकास और तकनीक : इंफोसिस की कहानी और भारत का भविष्य' विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्यमिता, नैतिक मूल्यों, मेहनत और असफलताओं से सीखने का संदेश दिया।
ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को दें प्राथमिकता: नारायण मूर्ति
नारायण मूर्ति ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में उसके परिवार, मित्रों और आसपास के वातावरण से मिले संस्कारों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत लाभ से पहले मेहनत, ईमानदारी, सम्मान और सत्यनिष्ठा को प्राथमिकता देनी चाहिए।उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपने सहकर्मियों और आने वाली पीढ़ियों में भी अच्छे सिद्धांतों को बढ़ावा दें। हर फैसला ऐसा होना चाहिए, जिससे समाज और संबंधित लोगों के बीच सम्मान बना रहे।
नारायण मूर्ति ने विद्यार्थियों से कहा कि साफ अंतरात्मा सबसे आरामदायक तकिया है। यदि सही काम को अपना मानदंड बना लिया जाए तो सही निर्णय लेना आसान हो जाता है।
असफलता को सफलता की सीढ़ी मानें युवा
अपने शुरुआती कारोबारी अनुभव साझा करते हुए नारायण मूर्ति ने बताया कि उनकी पहली कंपनी सफल नहीं हो पाई थी। इसके बाद उन्होंने इंफोसिस की स्थापना की।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि असफलता को सफलता की ओर बढ़ने वाले कदमों की तरह देखना चाहिए। यदि व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखता है और उन्हें दोहराने से बचता है, तो वह असफलताओं से उबर सकता है।
उन्होंने कहा कि असफलता के कारण युवाओं को निष्क्रिय नहीं होना चाहिए। वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी मनचाहे परिणाम नहीं मिलने पर काम करना नहीं छोड़ते, बल्कि अपनी गलतियों का विश्लेषण करके दोबारा प्रयास करते हैं।
नारायण मूर्ति ने युवाओं को एकाग्रता और तार्किक सोच के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी।
भारत में विश्वस्तरीय संस्थान बनाने की क्षमता: प्रो. सी. राज कुमार
OP जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति प्रो. सी. राज कुमार ने नारायण मूर्ति का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी यात्रा से साबित किया है कि भारत में भी विश्वस्तरीय संस्थान स्थापित कर उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि किसी संस्थान की पहचान केवल उसकी इमारतों, संसाधनों, रैंकिंग या प्रतिष्ठा से नहीं होती, बल्कि उसके विचारों और दूरगामी दृष्टिकोण से भी होती है।
प्रो. राज कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य भारत की वैश्विक ज्ञान और विचारों की दुनिया में ऐतिहासिक भूमिका को फिर से मजबूत करना है। उन्होंने विश्वविद्यालय को आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाला संस्थान बताया।
दो संस्थानों की स्थापना की कहानियों का संगम
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. डाबिरु श्रीधर पटनायक ने स्वागत भाषण में कहा कि 17वें यूनिवर्सिटी डे पर नारायण मूर्ति की उपस्थिति विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन दो संस्थानों की स्थापना से जुड़ी कहानियों को एक साथ लाता है। इनमें एक कहानी वैश्विक पहचान वाला तकनीकी उद्यम स्थापित करने की आकांक्षा से जुड़ी है।
राष्ट्र निर्माण में नारायण मूर्ति की भूमिका का उल्लेख
जिंदल स्कूल ऑफ गवर्नमेंट एंड पब्लिक पॉलिसी के डीन प्रो. आर. सुदर्शन ने कहा कि नारायण मूर्ति ने राष्ट्र निर्माण और वैश्विक पहचान वाला संस्थान स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने नारायण मूर्ति को नैतिक नेतृत्व, दूरदृष्टि, नवाचार और कड़ी मेहनत का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि नारायण मूर्ति का दर्शन इस विचार पर आधारित है कि किसी भी उपलब्धि का उपयोग व्यापक जनहित के लिए किया जाना चाहिए।
Key Highlights
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एनआर नारायण मूर्ति OP जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के 17वें यूनिवर्सिटी डे में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
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उन्होंने कहा कि उद्यमिता और नए विचारों से रोजगार पैदा करना भारत के विकास के लिए जरूरी है।
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युवाओं को ईमानदारी, मेहनत, सम्मान और सत्यनिष्ठा अपनाने की सलाह दी।
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नारायण मूर्ति ने अपनी पहली कंपनी की असफलता और इंफोसिस की स्थापना का अनुभव साझा किया।
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उन्होंने युवाओं से असफलताओं से सीखकर दोबारा प्रयास करने का आह्वान किया।
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विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने नैतिक नेतृत्व और संस्थान निर्माण में नारायण मूर्ति के योगदान का उल्लेख किया।
FAQ Section
1. एनआर नारायण मूर्ति ने भारत के विकास के लिए क्या कहा?
उन्होंने कहा कि नए विचारों और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार पैदा करना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का रास्ता है।
2. नारायण मूर्ति किस कार्यक्रम में शामिल हुए?
वह OP जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के 17वें यूनिवर्सिटी डे समारोह में विशिष्ट मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
3. नारायण मूर्ति ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
उन्होंने युवाओं को मेहनत, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों को अपनाने तथा असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ने की सलाह दी।
4. नारायण मूर्ति ने अपनी पहली कंपनी के बारे में क्या बताया?
उन्होंने बताया कि उनकी पहली कंपनी सफल नहीं हुई थी, जिसके बाद उन्होंने इंफोसिस की स्थापना की।
5. कार्यक्रम में नारायण मूर्ति ने किस विषय पर संबोधन दिया?
उन्होंने नैतिक नेतृत्व, परिवर्तनकारी विकास, तकनीक, इंफोसिस की यात्रा और भारत के भविष्य पर अपने विचार रखे।
Conclusion
एनआर नारायण मूर्ति ने OP जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के समारोह में युवाओं को उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन, ईमानदारी और नवाचार भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीखकर लगातार प्रयास करते रहने का संदेश दिया।

